यूपी जल निगम भर्ती फर्जीवाड़ा: तत्कालीन मंत्री और एमडी ने बदल डाले थे तमाम नियम

यूपी जल निगम भर्ती फर्जीवाड़ा: तत्कालीन मंत्री और एमडी ने बदल डाले थे तमाम नियम

लखनऊ। यूपी जल निगम में भर्ती फर्जीवाडे की परतें उधड़ना शुरू हो गई हैं। एसआईटी को सौंपी गई जांच में खुलासा हुआ है कि पूर्व नगर विकास मंत्री मो0 आजम खां और जल निगम के तत्कालीन एमडी पीके आसुदानी ने संयुक्त रुप से इस फर्जीवाडे की रूपरेखा तैयार की थी। आजम खां ने अपने रुतवे के दम पर 2015 में सरकार के मंत्रिमंडल को विश्वास में लेकर नैत्यिक लिपिक भर्ती प्रक्रिया को अधीनस्थ सेवा आयोग के बजाय सीधे जल निगम को करने का अधिकार दिलाया था। जिसके लिए पेश किए गए प्रस्ताव में नैत्यिक लिपिकों की तत्काल भर्ती का आवश्यकता बताकर भर्ती प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की बात कही गई थी।

जल निगम को भर्ती का अधिकार मिलने के बाद तत्कालीन एमडी पीके आसुदानी ने लिपिक भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल डाला। सेवा चयन प्रक्रिया के तहत अभ्यार्थियों की योग्यता परीक्षण के लिए नियत 175 अंकों की पांच अलग अलग लिखित परीक्षाओं के स्थान पर 40 अंक की मात्र एक परीक्षा रखी गई और जिसके अलावा 10—10 अंकों की सामान्य ज्ञान और सामान्य जानकारी परीक्षा ली गई। यह प्रक्रिया जल निगम के सर्विस रूल्स के खिलाफ थी।

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एसआईटी जांच में सामने आया है कि जल निगम को मंत्रि परिषद से 30 दिसबंर 2015 में लिपिक भर्ती करवाने की अनुमति मिली थी। जल निगम को तत्काल भर्ती करनी थी परीक्षा करवाने के लिए निगम की ओर से इलाहाबाद की एमएनएनआईटी और सुलतानपुर की केएनआईटी जैसी अनुभवी एजेंसियों से संपर्क किया गया। एमएनएनआईटी की ओर से दिए गए प्रस्ताव में मार्च 2016 में परीक्षा के आयोजन का प्रस्ताव दिया गया। एकाएक जल निगम ने इस प्रक्रिया से इन दोनों अनुभवी एजेंसियों को दरकिनार कर अपटेक लिमिटेड को परीक्षा आयोजित करवाने का ठेका दे दिया। जो इस तरह की परीक्षाओं को आयोजित करवाने के लिए पूरी तरह से अनुभवहीन बाताई जा रही है।

लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों पर भी उठा सवाल — 

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एसआईटी की जांच में सामने आया है कि जल निगम के लिपिक भर्ती फर्जीवाडे में तमाम लूप होल सामने आए हैं। जिसे देखकर लगता है कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को अपनाने के लिए जो भी जिम्मेदार अधिकारी थे, उन्होंने न तो विभागीय नियमों को देखा और न ही चयन प्रक्रिया की गुणवत्ता को। इसे देखकर ऐसा लगता है कि जल​ निगम ने यह पहले ही तय कर लिया था कि भर्ती किसकी होनी है, परीक्षा मात्र औपचारिकता को पूरी करने के लिए आयोजित की गई थी।

एसआईटी के जांच अधिकारियों के सामने आया है कि 40 अंकों की लिखित परीक्षा के लिए 25 अंको का साक्षात्कार रखना गलत था। नियमानुसार लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों के बीच 4:1 का अुनपात होना चाहिए यानी 100 अंकों की लिखित परीक्षा के लिए होने वाले साक्षात्कार में निर्धारित अंकों की सीमा अधिकतम 25 हो सकती है।

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