जल निगम भर्ती: चेहतों के लिए अफसरों ने उड़ाईं नियमों की धज्जियां, अधर में फंसा हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य

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जल निगम भर्ती: चेहतों के लिए अफसरों ने उड़ाईं नियमों की धज्जियां, हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में

लखनऊ। जल निगम की भर्तियों में अफसरों ने जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाईं। भर्ती प्रक्रिया का विज्ञापन जारी होने से लेकर साक्षात्कार तक अफसरों ने इसमें सेंध लगाई। अपने चेहतों के लिए अफसरों ने हर नियम को दरकिनार किया। यहां तक की साक्षात्कार में चेहतों को मनमाने तरीके से नंबर भी दिए गए।

Jal Nigam Recruitment Officers Flouted The Rules For The Warnings Future Of Thousands Of Candidates In Balance :

जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ तो सीधे तत्कालीन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। वहीं, अफसरों की इस करतूत से वह अभ्यार्थी बेहद ही चिंतित हैं, जिन्होंने मेहनत और ईमानदारी से इस भर्ती में अपनी जगह बनायी थी। सूत्रों की माने तो ऐसे अभ्या​र्थी अब कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। सूत्रों की माने तो तत्कालीन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

नगर विकास विभाग ने जांच रिपोर्ट के आधार पर परीक्षण शुरू कर दिया है। सूत्रों की माने तो तत्कालीन अफसरों की लिस्ट बनाई जा रही है, जिनके खिलाफ भी कार्रवाई की जायेगी। एसआईटी, आईआईटी कानपुर और ट्रिपल आईटी इलाहाबाद की जांच रिपोर्ट में कई बातें सामान्य पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट में बताया ​गया है कि भर्ती प्रक्रिया शुरूआती दौर से ही संदेह के घेरे में थी।

भर्ती के विज्ञापन निकलने से लेकर चयन प्रक्रिया तक अफसरों की सह पर जमकर धांधली की गयी। नियमत: लिखित परीक्षा के बाद वेबसाइट पर उत्तरपुस्तिका अपलोड किया जाना चाहिए। जल निगम ने इसके लिए मुंबई की एक कंपनी से लिखित अनुबंध भी किया, इसके बाद भी इसे अपलोड नहीं किया गया। उत्तरपुस्तिका अपलोड किए जाने के बाद इस पर आपत्तियां मांगी जाती हैं, जिससे किसी भी तरह की चूक को सुधारा जा सके। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बाद भी कंपनी वालों ने इसकी अनदेखी की।

साक्षात्कार में अफसरों ने लगाई सेंध
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि भर्ती प्रक्रिया के साक्षात्कार में अफसरों ने हर कदम पर खेल किया। अपने चेहतों को नंबर दिलाने के लिए उन्होंने नियमों को दरकिनार कर उन्हें नंबर दिलवाये। वहीं, जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि जल निगम ने लिखित परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों का परीक्षण कराए बिना साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी। नियमत: लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की पात्रता जांचने के लिए एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची का परीक्षण किया जाना जरूरी होता है। लिखित परीक्षा, शैक्षिक योग्यता और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों को जोड़कर मनमाने तरीके से अंतिम परिणाम घोषणा कर दिया गया।

उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन पर भी सवाल!
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने जेईई मेंस और जेईई एडवांस और गेट में जो प्रक्रिया अपनाई जाती है, उनका पालन नहीं किया गया है। इस कारण लिखित परीक्षा की शुचिता पर भी संदेह है। सूत्रों की माने तो जिन उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन किया गया है उस पर भी संदेह जताया जा रहा है। ऐसी स्थिति में जो अभ्यर्थी सफल हुए है या जो सफल नहीं हुए उनकी वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन नहीं किया जा सकता है।

लखनऊ। जल निगम की भर्तियों में अफसरों ने जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाईं। भर्ती प्रक्रिया का विज्ञापन जारी होने से लेकर साक्षात्कार तक अफसरों ने इसमें सेंध लगाई। अपने चेहतों के लिए अफसरों ने हर नियम को दरकिनार किया। यहां तक की साक्षात्कार में चेहतों को मनमाने तरीके से नंबर भी दिए गए। जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ तो सीधे तत्कालीन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। वहीं, अफसरों की इस करतूत से वह अभ्यार्थी बेहद ही चिंतित हैं, जिन्होंने मेहनत और ईमानदारी से इस भर्ती में अपनी जगह बनायी थी। सूत्रों की माने तो ऐसे अभ्या​र्थी अब कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। सूत्रों की माने तो तत्कालीन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है। नगर विकास विभाग ने जांच रिपोर्ट के आधार पर परीक्षण शुरू कर दिया है। सूत्रों की माने तो तत्कालीन अफसरों की लिस्ट बनाई जा रही है, जिनके खिलाफ भी कार्रवाई की जायेगी। एसआईटी, आईआईटी कानपुर और ट्रिपल आईटी इलाहाबाद की जांच रिपोर्ट में कई बातें सामान्य पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट में बताया ​गया है कि भर्ती प्रक्रिया शुरूआती दौर से ही संदेह के घेरे में थी। भर्ती के विज्ञापन निकलने से लेकर चयन प्रक्रिया तक अफसरों की सह पर जमकर धांधली की गयी। नियमत: लिखित परीक्षा के बाद वेबसाइट पर उत्तरपुस्तिका अपलोड किया जाना चाहिए। जल निगम ने इसके लिए मुंबई की एक कंपनी से लिखित अनुबंध भी किया, इसके बाद भी इसे अपलोड नहीं किया गया। उत्तरपुस्तिका अपलोड किए जाने के बाद इस पर आपत्तियां मांगी जाती हैं, जिससे किसी भी तरह की चूक को सुधारा जा सके। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बाद भी कंपनी वालों ने इसकी अनदेखी की। साक्षात्कार में अफसरों ने लगाई सेंध जांच रिपोर्ट में सामने आया कि भर्ती प्रक्रिया के साक्षात्कार में अफसरों ने हर कदम पर खेल किया। अपने चेहतों को नंबर दिलाने के लिए उन्होंने नियमों को दरकिनार कर उन्हें नंबर दिलवाये। वहीं, जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि जल निगम ने लिखित परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों का परीक्षण कराए बिना साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी। नियमत: लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की पात्रता जांचने के लिए एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची का परीक्षण किया जाना जरूरी होता है। लिखित परीक्षा, शैक्षिक योग्यता और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों को जोड़कर मनमाने तरीके से अंतिम परिणाम घोषणा कर दिया गया। उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन पर भी सवाल! जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने जेईई मेंस और जेईई एडवांस और गेट में जो प्रक्रिया अपनाई जाती है, उनका पालन नहीं किया गया है। इस कारण लिखित परीक्षा की शुचिता पर भी संदेह है। सूत्रों की माने तो जिन उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन किया गया है उस पर भी संदेह जताया जा रहा है। ऐसी स्थिति में जो अभ्यर्थी सफल हुए है या जो सफल नहीं हुए उनकी वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन नहीं किया जा सकता है।