जल निगम भर्ती: जब 175 अभ्यर्थी के अंकों में हुई धांधली तो पूरी भर्ती प्रक्रिया क्यों की गई निरस्त?

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जल निगम भर्ती: जब 175 अभ्यर्थी के अंकों में हुई धांधली तो पूरी भर्ती प्रक्रिया क्यों की गई निरस्त?

लखनऊ। सपा शासनकाल में जल निगम की भर्ती में धांधली उजागर होने के बाद नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया है। अब उन अभ्यर्थियों पर शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है जिनके अंकों में गड़बड़ी पाई गयी है। ऐसे 175 अभ्यर्थी हैं, जिनके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं, ऐसे में सवाल उठने लगा है कि जब 175 अभ्यर्थियों के अंकों में धंधली की गयी तो पूरी भर्ती प्रक्रिया को क्यों रद्द किया गया है?

Jal Nigam Recruitment When The Rigging Of Marks Of 175 Candidates Why Was The Entire Recruitment Process Canceled :

वहीं, अब मेहनत और संघर्ष से भर्ती प्रक्रिया में अपनी जगह बनाने वाले अ​भ्यार्थियों पर भी भर्ती निरस्त होने का बड़ा असर पड़ेगा। बता दें कि जल निगम में सहायक व अवर अभियंता और नैत्यिक लिपिक पदों पर भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितता के मामले में एफआईआर कराने की तैयारी है। साक्षात्कार के लिए गठित सात बोर्ड के 35 सदस्यों के खिलाफ भी एफआईआर होगी। अभी तक की पड़ताल में 175 लोगों के खिलाफ अनियमितता के सुबूत मिले हैं।

जांच में सामने आया है कि इनकी उत्तर पुस्तिकाओं में नंबरों व अन्य प्रविष्टियों को लेकर छेड़छाड़ की गई है। वहीं, कुछ और भी नाम सामने आने का अंदेशा है। जल निगम के प्रबंध निदेशक विकास गोठलवाल के मुताबिक इन सबको मिलाकर कुल दो सौ से अधिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। जल निगम में 122 सहायक अभियंताओं की भर्ती हुई थी। इनमें 38 ने सेवा छोड़ दी थी और 84 काम कर रहे थे।

इनकी सेवा सोमवार को समाप्त कर दी गई है। वहीं, अवर अभियंता के 857 पदों पर भर्ती हुई। इनमें से 729 काम कर रहे थे, इन्हें भी बर्खास्त कर दिया गया है। इसी तरह नैत्यिक सहायक की 325 भर्तियों में से 166 सेवारत थे, इन्हें भी हटा दिया गया है। सोमवार को कुल 979 अधिकारियों व कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई। गौरतलब है कि जल निगम में कुल 1304 भर्तियां हुई थीं। इस तरह सभी भर्तियां निरस्त हो गईं।

भर्ती प्रक्रिया पर हुए खर्च की करेंगे वसूली
जल निगम के जिन अधिकारियों व कर्मचारियों की सेवा समाप्त की गई है, उनसे कोई वसूली नहीं की जाएगी। प्रबंध निदेशक का कहना है कि जिनकी सेवा समाप्त की गई, उन्हें काम करने के अंतिम दिन के वेतन का भी भुगतान किया जाएगा। पर, यह तय किया गया है कि भर्ती प्रक्रिया पर हुए खर्च की वसूली की जाएगी। यह वसूली भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों से की जाएगी। इसके लिए जिम्मेदारी तय की जा रही है। जल्द कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

भर्ती प्रक्रिया निरस्ता होने से ठप हुआ विभाग का काम
सूत्रों की माने तो एक साथ इतनी बड़ी संख्या में जल निगम में काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से हटाये जाने के बाद विभाग के काम काज ठप हो गए हैं। सूत्र बतातें हैं कि इस समय जल निगम में भर्ती प्रक्रिया निरस्त होने के बाद वहां के कर्मचारी बेहद परेशान हैं। इस कारण वहां पर सुचारू रूप से काम काज भी नहीं चल पा रहा है।

लखनऊ। सपा शासनकाल में जल निगम की भर्ती में धांधली उजागर होने के बाद नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया है। अब उन अभ्यर्थियों पर शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है जिनके अंकों में गड़बड़ी पाई गयी है। ऐसे 175 अभ्यर्थी हैं, जिनके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं, ऐसे में सवाल उठने लगा है कि जब 175 अभ्यर्थियों के अंकों में धंधली की गयी तो पूरी भर्ती प्रक्रिया को क्यों रद्द किया गया है? वहीं, अब मेहनत और संघर्ष से भर्ती प्रक्रिया में अपनी जगह बनाने वाले अ​भ्यार्थियों पर भी भर्ती निरस्त होने का बड़ा असर पड़ेगा। बता दें कि जल निगम में सहायक व अवर अभियंता और नैत्यिक लिपिक पदों पर भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितता के मामले में एफआईआर कराने की तैयारी है। साक्षात्कार के लिए गठित सात बोर्ड के 35 सदस्यों के खिलाफ भी एफआईआर होगी। अभी तक की पड़ताल में 175 लोगों के खिलाफ अनियमितता के सुबूत मिले हैं। जांच में सामने आया है कि इनकी उत्तर पुस्तिकाओं में नंबरों व अन्य प्रविष्टियों को लेकर छेड़छाड़ की गई है। वहीं, कुछ और भी नाम सामने आने का अंदेशा है। जल निगम के प्रबंध निदेशक विकास गोठलवाल के मुताबिक इन सबको मिलाकर कुल दो सौ से अधिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। जल निगम में 122 सहायक अभियंताओं की भर्ती हुई थी। इनमें 38 ने सेवा छोड़ दी थी और 84 काम कर रहे थे। इनकी सेवा सोमवार को समाप्त कर दी गई है। वहीं, अवर अभियंता के 857 पदों पर भर्ती हुई। इनमें से 729 काम कर रहे थे, इन्हें भी बर्खास्त कर दिया गया है। इसी तरह नैत्यिक सहायक की 325 भर्तियों में से 166 सेवारत थे, इन्हें भी हटा दिया गया है। सोमवार को कुल 979 अधिकारियों व कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई। गौरतलब है कि जल निगम में कुल 1304 भर्तियां हुई थीं। इस तरह सभी भर्तियां निरस्त हो गईं। भर्ती प्रक्रिया पर हुए खर्च की करेंगे वसूली जल निगम के जिन अधिकारियों व कर्मचारियों की सेवा समाप्त की गई है, उनसे कोई वसूली नहीं की जाएगी। प्रबंध निदेशक का कहना है कि जिनकी सेवा समाप्त की गई, उन्हें काम करने के अंतिम दिन के वेतन का भी भुगतान किया जाएगा। पर, यह तय किया गया है कि भर्ती प्रक्रिया पर हुए खर्च की वसूली की जाएगी। यह वसूली भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों से की जाएगी। इसके लिए जिम्मेदारी तय की जा रही है। जल्द कानूनी कार्यवाही की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया निरस्ता होने से ठप हुआ विभाग का काम सूत्रों की माने तो एक साथ इतनी बड़ी संख्या में जल निगम में काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से हटाये जाने के बाद विभाग के काम काज ठप हो गए हैं। सूत्र बतातें हैं कि इस समय जल निगम में भर्ती प्रक्रिया निरस्त होने के बाद वहां के कर्मचारी बेहद परेशान हैं। इस कारण वहां पर सुचारू रूप से काम काज भी नहीं चल पा रहा है।