क्या योगीराज में आईएएस ही संभालेंगे सभी विभागों के एमडी का पद ?

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क्या योगीराज में आईएएस ही संभालेंगे सभी विभागों के एमडी का पद ?

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां एक तरफ प्रदेशवासियों को सभी तरह की सुविधाएं बेहतर तरीके से उपलब्ध कराने का दावा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्ही के कुछ ऐसे निर्णय हैं, जो उनके दावों का पलीता लगाने के लिए काफी है। इसकी बानगी अभी हाल ही तब देखने को मिली, जब सरकार ने जल निगम एक एमडी पद पर एक आईएएस अधिकारी को बैठा दिया, जबकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। इस पद पर विभाग का ही कोई अनुभवी इंजीनियर बैठाया जाता था।

Jal Nigam Up Md Ka Sach :

अब सरकार के इस फैसले के बाद विभाग में चर्चाएं हैं कि बिना विभाग की कार्यशैली जाने वो विभाग के कामों का प्रभावी ढंग से कैसे क्रियान्वयन कर पाएंगे। बता दें जल शहर के सीवर से लेकर वॉटर सप्लाई तक का काम जल निगम के जिम्मे ही होता है, अब ऐसे में अगर अनुभवहीन अधिकारी विभाग का मुखिया होगा तो जनता के बेहद जरूरी ये सुविधाएं सुचारू रूप से संचालित नहीं हो सकेंगी, लिहाजा इसका खामियाजा जनता को ही भुगतना पड़ेगा।

बता दें कि इस अनुभवहीनता के चलते ही शहर में तमाम विकास कार्य ऐसे पूर्ण करवा दिए गए हैं, जिनकी कोई भविष्यगामी कार्ययोजना नहीं बनाई थी। अब वहीं योजनाएं शहर के लिए मुसीबत का सबब बन गई हैं। अब यदि इन कामों में अनुभवप्राप्त अधिकारी संलिप्त होते तो उन्हे एक समुचित कार्ययोजना के तहत कराया जाता है और शहर जिन समस्याओं से गुजर रहा है, ऐसी स्थितियां उनके सामने न आती है।

दूसरी तरफ सरकार के इस फैसले का असर विभाग में तैनात अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मनोबल पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। विभाग में असिस्टेंट इंजीनियर से काम शुरु करने वाले अधिकारी जिन कामों को अंजाम नहीं दे पाते हैं, तो उनकी सोंच होती है, वो काम एमडी बनने के बाद प्रभावी ढंस से पूर्ण करा लिया जाएगा, अब ऐसे में यदि इस पद पर आईएएस अधिकारियों की तैनाती कर दी जाएगी तो उनके सपने तो पूरे होने से पहले ही टूट जाएंगे क्योंकि उन्हे हमेशा मुखिया के अनुसार ही काम करना होगा।

नाम न लिखे जाने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि प्रदेश के कई ऐसे विभाग हैं, जिनके द्वारा कराए गए ज्यादातर कामों की लगातार शिकायतें मिलती रहती हैं, अगर सरकार को ये प्रयोग करना था, तो पहले उन विभागों को नहीं चुना गया। अधिकारियों के मुताबिक ब्यूरोक्रेट प्रदेश सरकार के मुखिया को सब ठीक कर देने का विश्वास दिलाकर विभाग के अहम पद पर बैठ तो जाते हैं, लेकिन उनकी अनुभवहीनता का खामियाजा सीधे तौर पर जनता को भुगतना पड़ेगा, और कहीं न कहीं सरकार को भी नुकसान उठाना पड़ेगा। उनके मुताबिक जल निगम का एमडी पब्लिक इंजीनियरिंग में विशेषज्ञ होना चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में पहलू को बिल्कुल दरकिनार कर दिया गया।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां एक तरफ प्रदेशवासियों को सभी तरह की सुविधाएं बेहतर तरीके से उपलब्ध कराने का दावा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्ही के कुछ ऐसे निर्णय हैं, जो उनके दावों का पलीता लगाने के लिए काफी है। इसकी बानगी अभी हाल ही तब देखने को मिली, जब सरकार ने जल निगम एक एमडी पद पर एक आईएएस अधिकारी को बैठा दिया, जबकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। इस पद पर विभाग का ही कोई अनुभवी इंजीनियर बैठाया जाता था। अब सरकार के इस फैसले के बाद विभाग में चर्चाएं हैं कि बिना विभाग की कार्यशैली जाने वो विभाग के कामों का प्रभावी ढंग से कैसे क्रियान्वयन कर पाएंगे। बता दें जल शहर के सीवर से लेकर वॉटर सप्लाई तक का काम जल निगम के जिम्मे ही होता है, अब ऐसे में अगर अनुभवहीन अधिकारी विभाग का मुखिया होगा तो जनता के बेहद जरूरी ये सुविधाएं सुचारू रूप से संचालित नहीं हो सकेंगी, लिहाजा इसका खामियाजा जनता को ही भुगतना पड़ेगा। बता दें कि इस अनुभवहीनता के चलते ही शहर में तमाम विकास कार्य ऐसे पूर्ण करवा दिए गए हैं, जिनकी कोई भविष्यगामी कार्ययोजना नहीं बनाई थी। अब वहीं योजनाएं शहर के लिए मुसीबत का सबब बन गई हैं। अब यदि इन कामों में अनुभवप्राप्त अधिकारी संलिप्त होते तो उन्हे एक समुचित कार्ययोजना के तहत कराया जाता है और शहर जिन समस्याओं से गुजर रहा है, ऐसी स्थितियां उनके सामने न आती है। दूसरी तरफ सरकार के इस फैसले का असर विभाग में तैनात अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मनोबल पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। विभाग में असिस्टेंट इंजीनियर से काम शुरु करने वाले अधिकारी जिन कामों को अंजाम नहीं दे पाते हैं, तो उनकी सोंच होती है, वो काम एमडी बनने के बाद प्रभावी ढंस से पूर्ण करा लिया जाएगा, अब ऐसे में यदि इस पद पर आईएएस अधिकारियों की तैनाती कर दी जाएगी तो उनके सपने तो पूरे होने से पहले ही टूट जाएंगे क्योंकि उन्हे हमेशा मुखिया के अनुसार ही काम करना होगा। नाम न लिखे जाने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि प्रदेश के कई ऐसे विभाग हैं, जिनके द्वारा कराए गए ज्यादातर कामों की लगातार शिकायतें मिलती रहती हैं, अगर सरकार को ये प्रयोग करना था, तो पहले उन विभागों को नहीं चुना गया। अधिकारियों के मुताबिक ब्यूरोक्रेट प्रदेश सरकार के मुखिया को सब ठीक कर देने का विश्वास दिलाकर विभाग के अहम पद पर बैठ तो जाते हैं, लेकिन उनकी अनुभवहीनता का खामियाजा सीधे तौर पर जनता को भुगतना पड़ेगा, और कहीं न कहीं सरकार को भी नुकसान उठाना पड़ेगा। उनके मुताबिक जल निगम का एमडी पब्लिक इंजीनियरिंग में विशेषज्ञ होना चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में पहलू को बिल्कुल दरकिनार कर दिया गया।