तीन माह से ग्राम पंचायतों में मनरेगा का नहीं आया एक भी धेला

जालौन । कदौरा विकासखंड में आने वाली 71 ग्राम पंचायतों में पिछले तीन माह से मनरेगा योजना में एक भी धेला न आने से जहां गांवों में मनरेगा योजना वेन्टीलेटर पर पहुंच गयी तो वहीं जिन मजदूरों ने इससे पूर्व मजदूरी की थी उनका भी भुगतान अधर में लटक गया। मजदूरी का पैसा न मिलने से परेशान मजदूर आये दिन ग्राम प्रधानों के दरवाजे पर दस्तक देकर भुगतान दिलाने की मांग करते देखे जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों में काम न मिलने से अब मजदूर भी गांवों से पलायन करने को विवश होने लगे हैं।




गौरतलब हो विगत तीन माह से मनरेगा योजना में ग्राम पंचायतों के खातों में काम कराने के लिये एक फूटी कौड़ी न आने से ग्राम प्रधानों की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गयी। जिन मजदूरों के पूर्व के समय में मनरेगा योजना में काम किया था उनके खातों में अभी तक मजदूरी का पैसा न पहुंचने से मजदूरों के सामने परिवार के सदस्यों का पेट भरने की समस्या खड़ी हो गयी। आये दिन मजदूर ग्राम प्रधानों के दरवाजे पर पहुंचकर मजदूरी का पैसा देने की मांग करते हैं तो प्रधान उन्हें समझाने का प्रयास करते हैं इसी बात को लेकर दोनों के बीच में तूं-तूं, मैं-मैं होती रहती है। इतना ही नहीं ग्राम प्रधान भी मजदूरों की समस्याओं को लेकर अनेकों बार ब्लाक कार्यालय में शिकायतें दर्ज करवा चुके हैं लेकिन अभी तक मनरेगा योजना में पैसा कम तक आयेगा कोई अधिकारी अपना मुंह खोलने को तैयार नहीं है। ग्राम प्रधान बागी अर्चना तिवारी, बबीना प्रधान गौरव उपाध्याय, हांसा प्रधान रामकिशोर, सोंधी प्रधान इरशाद, मवई अहीर प्रधान अनवार खां ने बताया कि हम लोग मनरेगा के पैसों के लिये ब्लाक, तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक के अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुयी। आये दिन मजदूरों द्वारा प्रधानों के दरवाजे पहुंच भला बुरा सुनाना एक नियम सा बन गया हैं।

ग्राम प्रधान महादेव कुशवाहा, उकुरवा प्रधान संजय कुशवाहा, इटौरा बावनी देवेंद्र सिंह का कहना था कि गांवों से यदि मजदूरों का पलायन न रुका तो फिर उन्हें मनरेगा का कार्य कराने के लिये मजदूर नहीं मिल पायेंगे। वहीं गुलौली मुस्तकिल के प्रधान अब्दुल हई ने बताया कि प्रधानों की स्थिति अजीबोगरीब हो गयी हैं मनरेगा योजना में महीनों से रुपया न आने से कुछ प्रधानों ने तो ब्याज पर रुपये लेकर मजदूरों की मजदूरी का भुगतान कर दिया लेकिन इस तरह की रिक्स इक्का दुक्का प्रधान ही उठा रहे हैं। जब उक्त संबंध में सहायक विकास अधिकारी राजबहादुर से बात की गयी तो उन्होंने वर्तमान में शासन के खाते में मनरेगा योजना का पैसा नहीं हैं जिससे मजदूरों को समस्या से जूझना पड़ा है। जैसे ही शासन के खाते में पैसा आयेगा तत्काल मजदूरों के बकाया काम का भुगतान कराया जायेगा। वहीं पंचायत सचिव संतोष गौतम व रामकुमार का कहना था कि गांवों में रहने वाले मजदूरों का पलायन हर हाल में रोका जायेगा। कागजी कार्यवाही पूरी हो चुकी है जल्द ही मजदूरों के खातों में पैसा पहुंच जायेगा।

जालौन से सौरभ पांडेय की रिपोर्ट