बुंदेलखंड में किसानों के लिए चलाया गया राहत पैकेज दो साल से हुआ ठप

उरई । बुंदेलखंड राहत पैकेज जो कि किसानों के लिए केेंद्र सरकार द्वारा चलाया गया था जिसमें लाखों किसान लाभान्वित हुए थे परंतु विगत दो वर्षों से यह पैकेज रोक दिया गया है जिसका लाभ अब किसानों को नहीं मिल पा रहा है। वहीं उद्यान विभाग में जो मटर पर अनुदान किसानों को प्राप्त होता था यह योजना भी खत्म कर दी गई। अब पूरे रेटों पर उद्यान विभाग से मटर उपलब्ध हो पाती है।




उक्त जानकारी से अवगत कराते हुए डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर अनिल पाठक ने बताया कि बुंदेलखंड पैकेज में स्प्रिंकलर से लेकर अन्य योजनाओं में नब्बे से लेकर पचहत्तर प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान था परंतु विगत दो वर्षों से यह पैकेज बंद कर दिया गया है और जो अनुदान की स्कीमें चल रही हैं वह दूसरे तरह की हैं। चूंकि बुंदेलखंड राहत पैकेज से किसानों को काफी मदद मिल जाती थी। सूखा की मार से परेशान किसान जो इस पैकेज के सहारे अपनी खेती कर लेता था परंतु अब उससे भी वह हाथ धो बैठा है। वहीं जनपदमें जिला उद्यान मिशन के अंतर्गत मटर पर एक हेक्टेयर के लिए पच्चीस हजार रुपए का अनुदान मिलता था वह काटकर साढ़े बारह हजार कर दिया गया था। अबसाढ़े बारह हजार भी अनुदान खत्म किया जा चुका है।

मटर किसान को पूरे मूल्य पर मिलती है। इस तरह की जो भी योजनाएं चल रही हैं वह किसानके लिए हितकर साबित नहीं हो रही हैं। वहीं जिला उद्यान अधिकारी गमपाल सिंह ने बताया कि चूंकि मटर जनपद में होने लगी है इसलिए इस योजना को केेंद्र सरकार द्वारा बंद कर दिया गया है। हालांकि उद्यान विभाग में अन्य योजनाएं संचालित हो रही हैं लेकिन वह योजनाएं ऐसीहैं जैसे ऊंट के मुंह में जीरा इसलिए किसानों का भी अब सरकारी योजनाओं से विश्वास सा उठने लगा है। वहीं जो पचास प्रतिशत अनुदान का बीज किसानों को मिलता है वह भी अगर किसान एक बार ले चुका है तो उसे तीन साल तक बीज उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। इस तरह कीउलझाने वाली योजनाएं किसान हित में लाभदायक प्रतीत नहीं होरही हैं।

वास्तविकता यह है कि किसान हर तरह से परेशान है और उसकी आवाज को दबा दिया जाता है जबकि बुंदेलखंड अति पिछड़ा क्षेत्र होने के कारण यहां अनेक ऐसी योजनाएं चलना चाहिए जिनसे इस क्षेत्र के किसानों काउद्धार हो सके। बुंदेलखंड में जितनी भी मंडियां शासन द्वारा बनाई गईहैं उनमें बुरा हाल है और वह वीरान हो चुकी हैं जबकि योजना इसलिएबनी थी कि गांव का किसान पांच किलोमीटर के दायरे में निर्मित मंडी में अपना माल आसानी से बेच सके। खा-खा-खैया में बुंदेलखंड राहत पैकेज जो किसानों के लिए आया था वह कागजों तक ही सीमित रह गया। यही वजह है कि रीढ़ से टूटा किसान अब तक नहीं उठ पा रहा।

जालौन से सौरभ पांडेय की रिपोर्ट