छमाही परीक्षाएं 18 से बच्चों को नही मिली पुस्तकें

उरई । परिषदीय स्कूलों में 18 अक्टूबर16 से अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं बोर्ड की तर्ज पर कराने का फरमान शासन ने जिलों में सुना तो दिया लेकिन जनपद के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों बच्चों को आज तक पाठ्य पुस्तके उपलब्ध नही करा पाई। शासन के इस फरमान से परिषदीय स्कूलों बच्चों में हड़कंप मचा हुआ है। शासन ने जिस तरह से शासनादेश जारी किया है कि 18 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं यूपी बोर्ड की तर्ज पर कराई जाएगी। परीक्षा को स्वच्छ माहौल में कराने के लिए उड़नदस्ते भी बनाए जाएगे जो परीक्षा केन्द्रों पर निगरानी रखेंगे। परीक्षा शुरू होने से एक घंटे पहले ही विद्यालयों को प्रश्नपत्र भेजने का शासनादेश है। 18 अक्टूबर से होने वाली यूपी बोर्ड की तर्ज पर परीक्षा के आदेश को लेकर जहां बच्चे चिंतित है वहीं शिक्षक भी खासे परेशान है।




शिक्षकों का कहना है कि एक अप्रैल से सत्र शुरू हुआ है और छह माह पूरे गुजर चुके है बच्चों को आज तक पुस्तके तब नही मिली है सरकार के इस फैसले को इस तरह से अमली जामा पहनाया जाए। इधर शासन की यह भी मंशा है कि परिषदीय विद्यालयों के छात्रों को फेल न किया जाए और दूसरे तरफ यूपी बोर्ड की तर्ज पर परीक्षा कराने चाहती है। सरकार का यह आदेश महज मजाक के अलावा कुछ नही है। अगर हकीकत में परिषदीय विद्यालयों में यूपी बोर्ड की तर्ज पर परीक्षा कराई जाए तो शिक्षा विभाग की पोल तो खुलेगी ही बल्कि सरकार को भी समझ में आ जाएगी कि इस तरह के फरमान करना कहां तक लाजमी है। यदि प्रशासन परिषदीय विद्यालयों की परीक्षाएं वास्तव में यूपी बोर्ड की तर्ज पर कराना चाहता था तो समय रहते विद्यालयों में बच्चों को पाठ्य पुस्तके उपलब्ध कराना चाहिए थी और जनपद स्तर पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी अवगत कराकर विद्यालयों को इस तरह के आशय का आदेश किया जाना चाहिए था ताकि शिक्षक बच्चों को तैयारियां करा सकते थे जो एक सही प्रक्रिया थी लेकिन परीक्षा शुरू होने के महज दो चार दिन पहले इस तरह का शासन द्वारा फरमान जारी करना केवल बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कराने के अलावा कुछ नही है|

अब होगा वहीं जो शासन की मंशा है कि किसी तरह उनके आदेशों की मर्यादा करते हुए सांप मरे न लाठी टूटे की कहावत से परीक्षाएं संपन्न कराई जाएगी। शिक्षकों का मानना है कि जब शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह माह बाद तक तक भी स्कूलों में बच्चों के लिए पाठ्य पुस्तके उपलब्ध नही हो सकी तो प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से एक घंटे पहले पहुंचना असंभव है। फिलहाल में शासन के इस आदेश को शिक्षक महज मजाक के रूप में मान रहे है। देखना अब ये है कि परिषदीय स्कूलों की 18 अक्टूबर से शुरू होने वाली अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं में जिला प्रशासन शासन के आदेशों पर इतना खरा उतरता है और कितने उड़नदस्ते परीक्षा केन्द्रों पर दस्तक देते है।

जालौन से सौरभ पांडेय की रिपोर्ट