देश में एक समान पंचायत राज व्यवस्था हो लागूः रामसेवक

जालौन। देश को एकता के सूत्र में पिरोने के लिये समूचे देश में एक समान पंचायत राज व्यवस्था लागू होनी चाहिये। जब तक देश के प्रदेशों में अलग-अलग पंचायत राज व्यवस्था लागू रहेगी न तो ग्राम पंचायतों का विकास संभव होगा और न ही देश एकता के सूत्र में बंध सकेगा। उक्त बात आज मंगलवार को अखिल भारतीय प्रधान संगठन के तत्वावधान में निकाली जा रही ग्राम स्वराज जागृति यात्रा लेकर जिले में आये संगठन के प्रदेशाध्यक्ष रामसेवक यादव ने कही।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1992 में 73 वें संविधान संशोधन के तहत 29 विषय व अधिकार ग्राम पंचायतों को पूर्ण रूप से सौंपे जायें ताकि ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि विकास की कार्ययोजना बनाकर गांवों को विकसित कर सकें। उन्होंने कहा कि लोकसभा में सांसदों द्वारा पारित किये गये प्रस्ताव की भांति लोकसभा सचिवालय के सचिव से सांसदों को दिये जाने वाले मानदेय एक रुपये अधिक दिये जाने की तर्ज पर ग्राम प्रधानों को भी पंचायत अधिकारी से एक रुपये अधिक यानी कम से कम 30 हजार रुपये वेतन व कार्यकाल खत्म होने पर दस हजार रुपये पेंशन की व्यवस्था की जानी चाहिये। इतना ही किसी भी प्रधान की आकस्मिक निधन पर 20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाये। उन्होंने कहा कि राज्य व केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2011 में सामाजिक व आर्थिक सर्वे कराया गया था जिसमें ग्राम पंचायतों को विश्वास में नहीं लिया गया।

यह सर्वे सरकार ने अपनी एजेंसियों द्वारा कराया गया जिसमें 90 प्रतिशत पात्र व्यक्ति छूट गये हैं अतः उक्त सर्वे दुबारा कराया जाये ताकि जो पात्र व्यक्ति छूट गये हैं उन्हें योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने मांग उठायी कि प्रदेश सरकार द्वारा लागू 10 जून 2016 के शासनादेश को तत्काल वापस लिया जयो जिसमें ग्राम पंचायतों में निर्वाचित प्रत्याशी से हारे प्रत्याशी को उपाध्यक्ष बनाया जा रहा है। इसी प्रकार से स्थानीय निकायों से निर्वाचित 36 विधान परिषद के चुनाव में पंचायत प्रतिनिधियों को ही प्रत्याशी बनाने का कानून बनाया जाये। इस दौरान आमोद कुमार उदैनिया मंडल अध्यक्ष, सुदेश तिवारी मंडल प्रभारी, जिलाध्यक्ष अमित द्विवेदी इतिहास, जिला प्रभारी राघवेंद्र सेंगर, नीलेंद्र सिंह राजावत, कुसुमलता त्रिपाठी, त्रिलोक, रामकेश, चित्रांगद पांडेय रेढ़र, तुलाराम, सीमा तिवारी, ओमकार पाल, सौरभ उदैनिया सहित अनेकों पार्टी नेता उपस्थित रहे।

जालौन से सौरभ पांडेय की रिपोर्ट

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