सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद नगर में फल-फूल रहा अवैघ गुटका का कारोबार

उरई। शहर में तम्बाकू मिश्रित निकोटीनयुक्त गुटका बनाने का कारोबार इस समय खूब फल-फूल रहा है। जिसमें क्षमता से अधिक जहर से भी जहरीली निकोटीन का प्रयोग तम्बाकू एवं सुपाड़ी के मिश्रण में मिलाकर किया जा रहा है। जिसके सेवन से व्यक्ति उस गुटके का आदी हो जाता है। और सारी जिन्दगी इसी के रस में डूबने पर विवश होने को मजबूर होने लगता है और धीरे-धीरे वह मौत के इतने करीब पहुंच जाता है कि वहां से उसका वापस लौटना भी नामुकिन सा प्रतीत होने लगता है।

उरई नगर के कोंच बस स्टैंड के समीप, उमरारखेरा, शान्तिनगर एवं शहर के राठ रोड स्थित एक नामचीन होटल जोकि लोगों के ठहराव के लिए बनाया गया था जिसमें आजकल खुलआम गुटके का निर्माण हो रहा है। नगर में गणेश, गणेश वीआईपी एवं सांई जैसे नामचीन गुटकों का निर्माण खुलेआम हो रहा। इनके निर्माण के लिए आधा सैकड़ा से अधिक महिला एवं पुरूषों को सिर्फ इस बात के लिए लगा दिया जाता है कि वह सुपाड़ी में तम्बाकू, कत्था, पिपरमेन्ट, चूना एवं जहर से भी ज्यादा जहरीली निकोटीन जोकि कोई व्यक्ति अगर एक बूंद ही उसका सेवन कर ले जो शायद वह भगवान को प्यारा हो जायें। इस सभी चीजों का मिश्रण बनाने के लिए इन लोंगों को बन्द कमरे में रखा जाता है ताकि इसकी भनक बाहरी लोगों को न हो सकें। और जब गुटका बनकर तैयार हो जाता है तो वह बाजार में जगह-जगह बिक्री के लिए फैला दिया जाता है।




और जब व्यक्ति जहर से भी जहरीले गुटके का सेवन करने लगता है तो वह इसका आदी हो जाता है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इसके निर्माण, बिक्री एवं भण्डारण पर पूर्णतया रोक लगाकर शासन व प्रशासन को आदेश का शक्ति से पालन कराने का निर्देश भी जारी कर रखा है। जिससे खाद्य विभाग भी कभी-कभी भूले भटके पहंुचकर उन स्थानों पर पहंुच जाता है जहां यह अवैद्य करोबार कि भट्टियां जल रही होती है वहंा पर छोटी-मोटी कार्यवाही कर इतिश्री कर अपने फर्ज की आदयगी कर एहसास दिलाने का काम कर देता है।

डेन्टल सर्जनों की याचिका पर कोर्ट ने लगायी थी रोक

जब पूरे देश में दिन-प्रतिदिन जबड़े, दन्त एवं गले में कैंसर जैसी घातक बीमारी से मरने वालों की सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था और सरकार भी करोड़ो रूपये मरीज की रक्षा के लिए खर्च कर रही थी फिर भी मरीज कर बच पाना मुश्किल हो रहा था तब डेन्टल सर्जनों ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर गुहार लगायी थी जिसमें कहा गया था कि सरकार को गुटका के कारोबार से जितना राजस्व प्राप्त होता है उससे कई गुना अधिक सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करती है। फिर भी कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझकर व्यक्ति मौत के आगोश में समा जाता है। और उसकी मौत हो जाती है। तब पूरी बात सुनकर शीर्ष अदालत ने गुटका के निर्माण, बिक्री एवं भण्डारण पर पूरी तरह रोक लगाकर शासन एवं प्रशासन को शक्ति से पालन कराने का निर्देश जारी किया था।

पैकिंग में हो रहा पालिथीन का प्रयोग




शीर्ष अदालत ने जहां गुटका के निर्माण, भण्डारण एवं बिक्री पर रोक लगायी थी वहीं यह भी आदेश जारी किया था कि पान मसाला में भी पालिथीन का प्रयोग न किया जाये। क्योंकि पालिथीन जो कि नालियों के माध्यम से एकत्रित होकर दुर्गध एवं बिषैसी गैस छोड़ती है जोकि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इतना ही नहीं आवारा जानवर भी इसके सेवन से मौत के आगोश में समा जाते है। पालिथीन गलती नहीं है। और धीरे-धीरे जानवर जब इसे खा लेते है तो यह उसके पेट में जाकर जहर का काम करती है।

जहर से भी जहरीली होती है निकोटीन

गुटका निर्माण में कारोबारी निकोटीन का प्रयोग खुलआम करता है। जबकि निकोटीन जहर से भी जहरीली मानी गयी है। निकोटीन जब गुटके में मिश्रित कर दी जाती है और जब व्यक्ति उसका सेवन करता है तो वह व्यक्ति के खून में मिश्रित हो जाती है। और व्यक्ति गुटका खाने का आदी हो जाता है। धीरे-धीरे निकोटीन के मात्रा खून में मिलने एवं शरीर में पहंुचने के कारण उसकी आंते धीरे-धीरे खराब होने लगती है। और वह किसी गम्भीर बीमारी का शिकार हो जाता है।

जालौन से सौरभ पांडेय की रिपोर्ट