भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा माहिल तालाब का चिल्ड्रन पार्क

जालौन । भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने नगर के ऐतिहासिक माहिल तालाब के सुंदरीकरण के साथ-साथ नौनिहालों को खेलने कूंदने के लिये चिल्ड्रन पार्क बनाने के नाम पर लाखों रुपये का बजट आवंटित किया था लेकिन कार्यदायी संस्था ने चिल्ड्रन पार्क विकसित करने के नाम पर ऐसा भ्रष्टाचार का तड़का लगा दिया जिसे नगरवासी ही नहीं बल्कि बच्चे भी लंबे समय तक नहीं भूल पायेंगे। चिल्ड्रन पार्क को विकसित करने में कितने रुपये खर्च किये गये यह तो स्थलीय निरीक्षण में स्वतः ही स्पष्ट हो जाता है।




जब पर्यटन मंत्रालय ने 1 करोड़ 61 रुपये का बजट नगर के ऐतिहासिक माहिल तालाब के सौंदर्यीकरण के लिये जारी किया गया था तो बच्चों ने सपने संजोये थे कि अब उन्हें भी खेलने कूंदने के लिये नगर के बीचों बीच एक अच्छी जगह मिल जायेगी। लेकिन बच्चों के अरमानों को पलीता कार्यदायी संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम ने लगाते हुये लाखों रुपये के बजट में हजारों रुपये खर्च कर पेटी ठेकेदारों से चिल्ड्रन पार्क विकसित कराने के नाम पर खानापूर्ति को अंजाम दिलवाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर डाली।

लाखों रुपये के बजट से निर्मित होने वाले चिल्ड्रन पार्क में न तो घास लगायी गयी और न ही बैठने के लिये अच्छी बैंचें डलवायी गयी और न ही आकर्षक पौधों को रोपित कराया। कार्यदायी संस्था के माध्यम से पेटी ठेकेदारों ने महज कागजों में ही चिल्ड्रन पार्क को दर्शाकर लंबा बजट खर्च करना दिखा गया गया। यही कारण है कि जब से चिल्ड्रन पार्क बना है उसमें बच्चों ने खेलने कूंदने में कोई रुचि नहीं दिखायी। समाजसेवियों ने आरोप लगाया कि कार्यदायी संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम का कोई भी अधिकारी तो छोड़िये किसी कर्मचारी ने मौके पर आकर यह देखना जरूरी नहीं समझा कि पर्यटन मंत्रालय ने जो बजट जिस कार्य के लिये आवंटित गिया गया है वह कराया गया या नहीं। इतना ही नहीं जो कार्य पेटी ठेकेदार ने कराया है वह मानक के अनुरूप हुये या मानकों की धज्जियां उड़ाई गयी इससे कार्यदायी संस्था ने कोई वास्ता नहीं रखा।

लाखों रुपये की लागत से निर्मित होने वाले चिल्ड्रन पार्क के निर्माण में तो भ्रष्टाचार की सारी सीमायें तोड़ दी गयी। समाजसेवियों का कहना था कि पार्क मंे न तो घास लगायी गयी और न ही वहां बच्चों को बैठने के लिये पर्याप्त संख्या में कुर्सियां लगवायी गयी। हां इतना जरूर हुआ कि चिल्ड्रन पार्क में इंटरलाकिंग की डिजायन बना दी गयी। नगर के समाजसेवियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि वह अपने स्तर से पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा दिये गये 1 करोड़ 61 लाख के भारी भरकम बजट से जमीनी स्तर पर क्या कार्य कराये गये उसकी टीम द्वारा जांच करायें और यदि निर्माण कार्य अधूरे हैं या मानकों को पूरा नहीं करते तो कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करायें ताकि एक हजार साल पुराने ऐतिहासिक माहिल तालाब सौंदर्यीकरण की मंशा पर्यटन मंत्रालय की पूरी हो सके।

जालौन से सौरभ पाण्डेय की रिपोर्ट