जम्मू-कश्मीर और लद्दाख कल बन जायेंगे केंन्द्र शासित प्रदेश, आधिकारिक भाषा होगी हिन्दी

Jammu Kashmir and Ladakh
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख कल बन जायेंगे केंन्द्र शासित प्रदेश, आधिकारिक भाषा होगी हिन्दी

नई दिल्ली। आतंक से घिेरे हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख 31 अक्टूबर यानी कल से दो नए केंद्र शासित प्रदेश बन जायेंगे। सबसे अहम बात यह होगी कि अब यहां पर आधिकारिक भाषा उर्दू नही बल्कि हिन्दी होगी। भारत में अभी तक जम्मू कश्मीर ही एक मात्र ऐसा प्रदेश था जहां की आधिकारिक भाषा उर्दू थी। आपको बता दें कि इन प्रदेशों में 106 नए कानून पहली बार लागू होंगे। इससे पहले विशेष राज्य होने के चलते यहां पर 153 विशेष कानून लागू थे।

Jammu And Kashmir And Ladakh Will Become Central Areas Tomorrow Will Be The Official Language :

आपको बता दें कि पहले जम्मू कश्मीर एक विशेष राज्य था और यहां पर अनुच्छेद 370 और 35 ए लागू था। लेकिन केन्द्र सरकार ने संसद में 6 अगस्त को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून पारित करवा लिया जिसके बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग अलग केन्द्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला लिया गया। जम्मू-कश्मीर में 114 सीटों की विधानसभा होगी जबकि लद्दाख बिना विधानसभा वाला सीधे केंद्र से शासित प्रदेश होगा। इससे पहले कभी ऐसा नही हुआ कि किसी राज्य को बांटकर दो केन्द्र शासित प्रदेश बनाये गये हों।

गृहमंत्रालय के सूत्रों की माने तो इसकी शुरूवात जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए नियुक्त लेफ्टिनेंट गवर्नर के शपथ ग्रहण के साथ होगी। बताया जा रहा है जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लेफ्टिनेंट गर्वनर की शपथ दिलाएंगी। गीता मित्तल पहले श्रीनगर में जी सी मुर्मु को फिर लेह जाकर राधा कृष्ण माथुर को लेफ्टिनेंट गवर्नर की शपथ दिलाएंगी। सरकार ने सुरक्षा के मददेनजर भारी मात्रा में सेना, अर्धसैनिक बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस बल को तैनात कर दिया है।

केन्द्र सरकार 31 अक्टूबर को इसलिए जम्मू कश्मीर पुनर्गठन का आयोजन करवा रही है क्योंकि इसी दिन देश के पहले गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती है। आपको बता दें कि जबसे संसद में जम्मू कश्मीर पुर्नगठन का बिल पास हुआ था तभी से जम्मू कश्मीर की संचार व्यवस्था पर बैन लगा दिया गया था और काफी सुरक्षा बल बढ़ा दिया गया था, यही नही इस दौरान पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनो ने यहां के लोगों को भड़काने की भी खूब कोशिश की।

नई दिल्ली। आतंक से घिेरे हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख 31 अक्टूबर यानी कल से दो नए केंद्र शासित प्रदेश बन जायेंगे। सबसे अहम बात यह होगी कि अब यहां पर आधिकारिक भाषा उर्दू नही बल्कि हिन्दी होगी। भारत में अभी तक जम्मू कश्मीर ही एक मात्र ऐसा प्रदेश था जहां की आधिकारिक भाषा उर्दू थी। आपको बता दें कि इन प्रदेशों में 106 नए कानून पहली बार लागू होंगे। इससे पहले विशेष राज्य होने के चलते यहां पर 153 विशेष कानून लागू थे। आपको बता दें कि पहले जम्मू कश्मीर एक विशेष राज्य था और यहां पर अनुच्छेद 370 और 35 ए लागू था। लेकिन केन्द्र सरकार ने संसद में 6 अगस्त को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून पारित करवा लिया जिसके बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग अलग केन्द्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला लिया गया। जम्मू-कश्मीर में 114 सीटों की विधानसभा होगी जबकि लद्दाख बिना विधानसभा वाला सीधे केंद्र से शासित प्रदेश होगा। इससे पहले कभी ऐसा नही हुआ कि किसी राज्य को बांटकर दो केन्द्र शासित प्रदेश बनाये गये हों। गृहमंत्रालय के सूत्रों की माने तो इसकी शुरूवात जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए नियुक्त लेफ्टिनेंट गवर्नर के शपथ ग्रहण के साथ होगी। बताया जा रहा है जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लेफ्टिनेंट गर्वनर की शपथ दिलाएंगी। गीता मित्तल पहले श्रीनगर में जी सी मुर्मु को फिर लेह जाकर राधा कृष्ण माथुर को लेफ्टिनेंट गवर्नर की शपथ दिलाएंगी। सरकार ने सुरक्षा के मददेनजर भारी मात्रा में सेना, अर्धसैनिक बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस बल को तैनात कर दिया है। केन्द्र सरकार 31 अक्टूबर को इसलिए जम्मू कश्मीर पुनर्गठन का आयोजन करवा रही है क्योंकि इसी दिन देश के पहले गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती है। आपको बता दें कि जबसे संसद में जम्मू कश्मीर पुर्नगठन का बिल पास हुआ था तभी से जम्मू कश्मीर की संचार व्यवस्था पर बैन लगा दिया गया था और काफी सुरक्षा बल बढ़ा दिया गया था, यही नही इस दौरान पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनो ने यहां के लोगों को भड़काने की भी खूब कोशिश की।