जम्मू-कश्मीर: नजरबंदी खत्म होने के साढ़े सात महीने बाद रिहा होंगे फारुख अब्दुल्ला

Farooq Abdullah
लोकसभा: नेशलन कांफ्रेंस नेता फारूक अब्‍दुल्‍ला ने की जम्‍मू कश्मीर में 4G सेवा की मांग

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी हटा दी है। विगत वर्ष 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से घाटी में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए वहां के स्थानीय नेताओं को नजरबंद कर लिया गया था। पिछले साल 4 अगस्त से अब्दुल्ला नजरबंद थे और करीब साढ़े सात महीने बाद वह रिहा होंगे। फारूक अब्दुल्ला समेत उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और सज्जाद लोन को नजरबंद किया गया था।

Jammu And Kashmir Farrukh Abdullah To Be Released After Seven And A Half Months Of House Arrest :

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की रिहाई का आदेश जारी किया है। फारूक अपने घर में ही गिरफ्तार थे। उन्हें घर मे बंद रखा गया था। किन शर्तों पर रिहाई हुई है, इसका अभी पता किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा कानून को रद कर दिया है।

नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 10 मार्च मंगलवार को अपने 50वें जन्मदिन के मौके पर अधिकांश समय तक सब जेल हरि निवास में अकेले ही रहे। इस दौरान उन्होंने अपने पिता डॉ. फारूक अब्दुल्ला का बधाई संदेश का एक फोन रसीव किया था। करीब 10 मिनट तक बातचीत की।

शाम चार बजे उमर अब्दुल्ला की मां मौली अब्दुल्ला, बहन साफिया व उसका बेटा व तीन अन्य रिश्तेदार एक केक व कुछ अन्य उपहार लेकर हरि निवास पहुंचे। डॉ. फारूक अब्दुल्ला गुपकार स्थित अपने मकान में ही रहे। डॉ. अब्दुल्ला सितंबर 2019 से पीएसए के तहत बंदी बनाकर रखा गया है। उमर के दोनों बेटे जमीन और जहीर श्रीनगर नहीं पहुंचे। दोनों दिल्ली में अपनी मां पायल के पास ही हैं।

गैर कांग्रेसी विपक्षी दलों के आधा दर्जन दिग्गज नेताओं ने हिरासत में नजरबंद जम्मू-कश्मीर के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत सभी राजनीतिक बंदियों की तत्काल रिहाई की मांग उठाई थी। विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा है कि मोदी सरकार लोकतांत्रिक विरोध को दंडात्मक प्रशासनिक कार्रवाई से कुचल रही है।

इस क्रम में प्रजातांत्रिक मूल्यों व मौलिक अधिकारों के साथ नागरिकों के स्वतंत्रता के अधिकार पर हमला बढ़ता जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौडा, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा के डी राजा और राजद के मनोज कुमार झा ने एक संयुक्त बयान जारी कर यह मांग की।

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी हटा दी है। विगत वर्ष 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से घाटी में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए वहां के स्थानीय नेताओं को नजरबंद कर लिया गया था। पिछले साल 4 अगस्त से अब्दुल्ला नजरबंद थे और करीब साढ़े सात महीने बाद वह रिहा होंगे। फारूक अब्दुल्ला समेत उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और सज्जाद लोन को नजरबंद किया गया था। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की रिहाई का आदेश जारी किया है। फारूक अपने घर में ही गिरफ्तार थे। उन्हें घर मे बंद रखा गया था। किन शर्तों पर रिहाई हुई है, इसका अभी पता किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा कानून को रद कर दिया है। नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 10 मार्च मंगलवार को अपने 50वें जन्मदिन के मौके पर अधिकांश समय तक सब जेल हरि निवास में अकेले ही रहे। इस दौरान उन्होंने अपने पिता डॉ. फारूक अब्दुल्ला का बधाई संदेश का एक फोन रसीव किया था। करीब 10 मिनट तक बातचीत की। शाम चार बजे उमर अब्दुल्ला की मां मौली अब्दुल्ला, बहन साफिया व उसका बेटा व तीन अन्य रिश्तेदार एक केक व कुछ अन्य उपहार लेकर हरि निवास पहुंचे। डॉ. फारूक अब्दुल्ला गुपकार स्थित अपने मकान में ही रहे। डॉ. अब्दुल्ला सितंबर 2019 से पीएसए के तहत बंदी बनाकर रखा गया है। उमर के दोनों बेटे जमीन और जहीर श्रीनगर नहीं पहुंचे। दोनों दिल्ली में अपनी मां पायल के पास ही हैं। गैर कांग्रेसी विपक्षी दलों के आधा दर्जन दिग्गज नेताओं ने हिरासत में नजरबंद जम्मू-कश्मीर के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत सभी राजनीतिक बंदियों की तत्काल रिहाई की मांग उठाई थी। विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा है कि मोदी सरकार लोकतांत्रिक विरोध को दंडात्मक प्रशासनिक कार्रवाई से कुचल रही है। इस क्रम में प्रजातांत्रिक मूल्यों व मौलिक अधिकारों के साथ नागरिकों के स्वतंत्रता के अधिकार पर हमला बढ़ता जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौडा, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा के डी राजा और राजद के मनोज कुमार झा ने एक संयुक्त बयान जारी कर यह मांग की।