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जम्मू-कश्मीर: मुठभेड़ में मारा गया कुख्यात हिजबुल कमांडर हारून हफज

Jammu And Kashmir Notorious Hizbul Commander Aaron Hafez Killed In An Encounter

By बलराम सिंह 
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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के डोडा में सुरक्षाबलों ने आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के जिला कमांडर हारुण हफाज को मार गिराया है। सुरक्षाबलों ने हारुण हफाज को एक एनकाउंटर में मार गिराया। अभी भी पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। हिजबुल मुजाहिद्दीन के इस जिला कमांडर की भारतीय सेना को काफी दिनों से तलाश थी।

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जानकारी के मुताबिक किश्तवाड़ के परिहार बंधुओं और आरएसएस नेता चंद्रकांत शर्मा, उनके पीएसओ का हत्यारा हिजबुल आतंकी हरूण काे सुरक्षाबलों ने डोडा में एक मुठभेड़ में मार गिराया है। मुठभेड़ स्थल पर अभी भी एक आतंकी छिपा हुआ है और दोनों ओर से गोलीबारी जारी है। सेना, एसओजी के जवानों ने डोडा में गुंदना जंगलों में छिपे इन आतंकियों को चारों ओर से घेर रखा है। आतंकियों के बचकर निकलने की कोई संभावना नहीं है। यही नहीं सुरक्षाबलों ने डोडा के साथ लगते जंगलों में सर्च आपरेशन भी चलाया हुआ है।

हिजबुल मुजाहिदीन का जिला कमांडर हरुण की डोडा व किश्तवाड़ पुलिस कई महीनों से तलाश कर रही थी। यही नहीं डोडा पुलिस ने हरूण और उसके साथी मसूद पर डोडा पुलिस ने 15 लाख का इनाम भी रखा था। हरुण वानी डोडा का ही रहने वाला था। एमबीए कर चुका हरूण डोडा में एमआर की नौकरी भी कर चुका है। वर्ष 2017 में अचानक वह घर से लापता हो गया। घरवालों ने उसकी तलाश की परंतु कुछ पता नहीं चला। वर्ष 2018 में हरूण को हिज्ब के एक ग्रुप फोटाे में श्रीनगर में देखा गया। घरवालों ने उसे वापस बुलाने का काफी प्रयास किया परंतु वह नहीं माना। जहां तक की उसने घर पर बात करना भी बंद कर दी।

श्रीनगर में सुरक्षाबलों द्वारा आतंकवादियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिए जाने के बाद हरूण किसी तरह किश्तवाड़ पहुंचा और अमीन भट्ट उर्फ जहांगीर सरूरी के अधीन काम करने लगा। उसके साथ औसामाबिन जावेद भी था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि हरूण और औसामा बिन जावेद ने भी किश्तवाड़ के अनिल परिहार, अजीत परिहार की हत्या की। यही नहीं डीसी किश्तवाड़ अंग्रेज सिंह राणा के पीएसओ की बूंदक छीनने उसके बाद 9 अप्रैल को आरएसएस नेता चंद्रकांत व उनके पीएसओ राजेंद्र सिंह की हत्या में भी इन्हीं दोनों का हाथ था। कुछ माह पहले पीडीपी जिला प्रधान शेख नसिर हुसैन के पीएसओ की बंदूक छिनने में भी हरूण का ही हाथ था।

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