जम्मू-कश्मीर: लद्दाख प्रांत के भाजपा सांसद छवांग ने दिया इस्तीफा

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जम्मू-कश्मीर: लद्दाख प्रांत के भाजपा सांसद छवांग ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के वरिष्ठ नेता और लद्दाख प्रांत के सांसद थुपस्तान छवांग ने पार्टी और लोकसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया है। थुपस्तान छवांग ने गत 14 नवंबर को प्रदेश भाजपा प्रमुख रविंद्र रैना को एक पत्र लिख कर कहा कि मैं आपको सूचित कर रहा हूं कि मैं स्वास्थ्य कारणों से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहा हूं।

Jammu Bjp Mp From Ladakh Thupstan Chhewang Resign :

थुपस्तान के करीबियों की मानें तो वह अब अपना पूरा ध्यान लद्दाख प्रांत में बौद्ध धर्म के विकास और प्रचार पर केंद्रित करना चाहते हैं। इसके लिए वह करीब बीते एक साल से लगातार सक्रिय राजनीति में अपनी गतिविधियों को घटा रहे थे। प्रदेश भाजपा प्रमुख रविंद्र रैना ने थुपस्तान छवांग के इस्तीफे की पुष्टि करते हुए बताया कि वह अब आध्यात्मिकता की तरफ खुद को समर्पित कर रहे हैं। वह बीते कई दिनों से हम सभी पर जोर दे रहे थे कि उन्हें संगठनात्मक गतिविधियों से मुक्त किया जाए।

थुप्सतान छवांग 1972 में पहली बार रियासत की सियासत में सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री सईद मीर कासिम के लद्दाख दौरे पर विरोध-प्रदर्शनों का आयोजन किया था। उन्हें उस समय 20 दिनों तक जेल में रखा गया था।

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के वरिष्ठ नेता और लद्दाख प्रांत के सांसद थुपस्तान छवांग ने पार्टी और लोकसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया है। थुपस्तान छवांग ने गत 14 नवंबर को प्रदेश भाजपा प्रमुख रविंद्र रैना को एक पत्र लिख कर कहा कि मैं आपको सूचित कर रहा हूं कि मैं स्वास्थ्य कारणों से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहा हूं। थुपस्तान के करीबियों की मानें तो वह अब अपना पूरा ध्यान लद्दाख प्रांत में बौद्ध धर्म के विकास और प्रचार पर केंद्रित करना चाहते हैं। इसके लिए वह करीब बीते एक साल से लगातार सक्रिय राजनीति में अपनी गतिविधियों को घटा रहे थे। प्रदेश भाजपा प्रमुख रविंद्र रैना ने थुपस्तान छवांग के इस्तीफे की पुष्टि करते हुए बताया कि वह अब आध्यात्मिकता की तरफ खुद को समर्पित कर रहे हैं। वह बीते कई दिनों से हम सभी पर जोर दे रहे थे कि उन्हें संगठनात्मक गतिविधियों से मुक्त किया जाए। थुप्सतान छवांग 1972 में पहली बार रियासत की सियासत में सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री सईद मीर कासिम के लद्दाख दौरे पर विरोध-प्रदर्शनों का आयोजन किया था। उन्हें उस समय 20 दिनों तक जेल में रखा गया था।