इन नेशनल हाइवे के किनारे है आतं​कवादियो का गढ़, सेना ने कसा शिकंजा

jammu srinager highway
इन नेशनल हाइवे के किनारे है आतं​कवादियो का गढ़, सेना ने कसा शिकंजा

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के दस्ते पर हुए आतंकी हमले के बाद सेना एक्शन में आ गई है। अब वो आतंकियों को सबक सिखाने की तैयारी सेना कर रही है। छानबीन के दौरान सेना ने जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के पास उन इलाकों को चिन्हित किया है, जहां आतंकियों द्वारा ज्यादा घटनाएं अंजाम दी गई हैं।

Jammu Srinager Highway Is Soft Target For Terrerist From 2014 To 2019 :

पड़ताल में पता चला कि इस हाइवे पर 20 से 25 किलोमीटर का ये इलाका ऐसा है, जो आतंकियों के लिए सॉफ्ट टारगेट है। बता दें कि वर्ष 2013 से 2018 तक यहां सबसे ज्यादा सेना पर हमले हुए हैं। कश्मीर में आतंकी पहले आम लोगों को निशाना बनाया करते थे, लेकिन अब उनका तरीका बदल गया है। हौसलाबुलंद आतंकियों ने अब सेना और पुलिस के जवानों को भी निशाना बनाना शुरु कर दियाय है।

बता दें कि जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर सेना पर हमला 2013 में नौगाम में हुआ। जहां सड़क पर ड्यूटी कर रहे सेना के जवानों को अपना निशाना बनाया था। इस हमले में सीआरपीएफ जवान की मौत हुई थी, जबकि कई जवान घायल हो गए थे। यहीं नहीं आतंकवादी जवानों के हथियार भी लूट ले गए थे। इसके बाद 2014 और 2015 में दो बार रोड आपरेटिंग पार्टी पर हमला किया गया।

2016 में भी आतंकियों ने अपनी नापाक हरकत जम्मू-श्रीनगर इलाके में जारी रखी और फरवरी माह में पांपोर में आतंकी हमले में दो सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे। वहीं मार्च में कूद इलाके में आतंकी हमले में एक जवान के साथ ही एक स्थानीय शख्स की जान चली गई।

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के दस्ते पर हुए आतंकी हमले के बाद सेना एक्शन में आ गई है। अब वो आतंकियों को सबक सिखाने की तैयारी सेना कर रही है। छानबीन के दौरान सेना ने जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के पास उन इलाकों को चिन्हित किया है, जहां आतंकियों द्वारा ज्यादा घटनाएं अंजाम दी गई हैं। पड़ताल में पता चला कि इस हाइवे पर 20 से 25 किलोमीटर का ये इलाका ऐसा है, जो आतंकियों के लिए सॉफ्ट टारगेट है। बता दें कि वर्ष 2013 से 2018 तक यहां सबसे ज्यादा सेना पर हमले हुए हैं। कश्मीर में आतंकी पहले आम लोगों को निशाना बनाया करते थे, लेकिन अब उनका तरीका बदल गया है। हौसलाबुलंद आतंकियों ने अब सेना और पुलिस के जवानों को भी निशाना बनाना शुरु कर दियाय है। बता दें कि जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर सेना पर हमला 2013 में नौगाम में हुआ। जहां सड़क पर ड्यूटी कर रहे सेना के जवानों को अपना निशाना बनाया था। इस हमले में सीआरपीएफ जवान की मौत हुई थी, जबकि कई जवान घायल हो गए थे। यहीं नहीं आतंकवादी जवानों के हथियार भी लूट ले गए थे। इसके बाद 2014 और 2015 में दो बार रोड आपरेटिंग पार्टी पर हमला किया गया। 2016 में भी आतंकियों ने अपनी नापाक हरकत जम्मू-श्रीनगर इलाके में जारी रखी और फरवरी माह में पांपोर में आतंकी हमले में दो सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे। वहीं मार्च में कूद इलाके में आतंकी हमले में एक जवान के साथ ही एक स्थानीय शख्स की जान चली गई।