जानें कब है होली पूजन और दहन के शुभ चौघड़िया का मुहूर्त

holi pooja
जानें कब है होली पूजन और दहन के शुभ चौघड़िया का मुहूर्त

लखनऊ। भारत में होली के रंगों के साथ-साथ होलिका दहन की पूजा का भी खास महत्व है। रंगों वाली होली से एक दिन पहले चौराहों पर होलिका दहन किया जाता है। इसे छोटी होली और होलिका भी कहते हैं। इस दिन बड़ी संख्याओं में महिलाएं होली की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस पूजा से घर में सुख और शांति आती है।

Janein Holika Pujan Aur Dehan Ka Shubh Muhurat :

दरअसल पूजा के लिए होलिका दहन किया जाता है जिसमें होली जलाई जाती है, ये होली माघ महीने की पूर्णिमा के दिन से शुरू हो जाती है। इस दिन से ही महिलाएं गुलर के पेड़ की टहनी को चौराहों पर गाड़ देती हैं। इसके बाद होली की पूजा के दिन तक धीरे-धीरे लड़कियां बढ़ाई जाती हैं। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन इसी होली को जलाकर गांव की महिलाएं होली का पूजन करती हैं। 

होलिका दहन की सामाग्री

गोबर के कंडें, गोबर, एक लोटा जल, फूलों की मालाएं, कच्चा धागा, पांच प्रकार के अनाज जैसे नए गेहूं और अन्य फसलों की बालियां, रोली, अक्षत, साबुत हल्दी, बताशे, गुलाल, बड़ी-फुलौरी, मीठे पकवान या मिठाइयां और फल।

होलिका दहन के लिए पुजा की विधि

सबसे पहले होलिका पूजन के लिए पूर्व या उत्तर की ओर अपना मुख करके बैठें।

अब अपने आस-पास पानी की बूंदे छिड़कें।

गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बनाएं।

थाली में रोली, कच्चा सूत, चावल, फूल, साबुत हल्दी, बताशे, फल और एक लोटा पानी रखें।

नरसिंह भगवान का स्मरण करते हुए प्रतिमाओं पर रोली, मौली, चावल, बताशे और फूल अर्पित करें।

अब सभी सामान लेकर होलिका दहन वाले स्थान पर ले जाएं।

अग्नि जलाने से पहले अपना नाम, पिता का नाम और गोत्र का नाम लेते हुए अक्षत (चावल) में उठाएं और भगवान गणेश का स्मरण कर होलिका पर अक्षत अर्पण करें।

इसके बाद प्रहलाद का नाम लें और फूल चढ़ाएं।

भगवान नरसिंह का नाम लेते हुए पांचों अनाज चढ़ाएं।

अब दोनों हाथ जोड़कर अक्षत, हल्दी और फूल चढ़ाएं।

कच्चा सूत हाथ में लेकर होलिका पर लपेटते हुए परिक्रमा करें।

गोबर के कंडें को होली में डालें।

मीठा अर्पित करें

आखिर में गुलाल डालकर लोटे से जल चढ़ाएं।

पूजन का समय

शुभ मुहूर्त शुरू – रात 08:58 से
शुभ मुहूर्त खत्म – 11:34 तक

लखनऊ। भारत में होली के रंगों के साथ-साथ होलिका दहन की पूजा का भी खास महत्व है। रंगों वाली होली से एक दिन पहले चौराहों पर होलिका दहन किया जाता है। इसे छोटी होली और होलिका भी कहते हैं। इस दिन बड़ी संख्याओं में महिलाएं होली की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस पूजा से घर में सुख और शांति आती है।

दरअसल पूजा के लिए होलिका दहन किया जाता है जिसमें होली जलाई जाती है, ये होली माघ महीने की पूर्णिमा के दिन से शुरू हो जाती है। इस दिन से ही महिलाएं गुलर के पेड़ की टहनी को चौराहों पर गाड़ देती हैं। इसके बाद होली की पूजा के दिन तक धीरे-धीरे लड़कियां बढ़ाई जाती हैं। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन इसी होली को जलाकर गांव की महिलाएं होली का पूजन करती हैं। 

होलिका दहन की सामाग्री

गोबर के कंडें, गोबर, एक लोटा जल, फूलों की मालाएं, कच्चा धागा, पांच प्रकार के अनाज जैसे नए गेहूं और अन्य फसलों की बालियां, रोली, अक्षत, साबुत हल्दी, बताशे, गुलाल, बड़ी-फुलौरी, मीठे पकवान या मिठाइयां और फल।

होलिका दहन के लिए पुजा की विधि

सबसे पहले होलिका पूजन के लिए पूर्व या उत्तर की ओर अपना मुख करके बैठें।

अब अपने आस-पास पानी की बूंदे छिड़कें।

गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बनाएं।

थाली में रोली, कच्चा सूत, चावल, फूल, साबुत हल्दी, बताशे, फल और एक लोटा पानी रखें।

नरसिंह भगवान का स्मरण करते हुए प्रतिमाओं पर रोली, मौली, चावल, बताशे और फूल अर्पित करें।

अब सभी सामान लेकर होलिका दहन वाले स्थान पर ले जाएं।

अग्नि जलाने से पहले अपना नाम, पिता का नाम और गोत्र का नाम लेते हुए अक्षत (चावल) में उठाएं और भगवान गणेश का स्मरण कर होलिका पर अक्षत अर्पण करें।

इसके बाद प्रहलाद का नाम लें और फूल चढ़ाएं।

भगवान नरसिंह का नाम लेते हुए पांचों अनाज चढ़ाएं।

अब दोनों हाथ जोड़कर अक्षत, हल्दी और फूल चढ़ाएं।

कच्चा सूत हाथ में लेकर होलिका पर लपेटते हुए परिक्रमा करें।

गोबर के कंडें को होली में डालें।

मीठा अर्पित करें

आखिर में गुलाल डालकर लोटे से जल चढ़ाएं।

पूजन का समय

शुभ मुहूर्त शुरू - रात 08:58 से
शुभ मुहूर्त खत्म - 11:34 तक