जनेऊ ने टाला राहुल गांधी का धर्मसंकट

जनेऊ ने टला राहुल गांधी का धर्मसंकट

नई दिल्ली। भारत में जनेऊ जोड़ने की पुरानी और कथित तौर पर गलत परंपरा रही है, खासकर कुलीन वर्ग में जिसे आजकल सरकारी भाषा में सवर्ण समाज का जाता है। यही जनेऊ पिछले कुछ दशकों से इस सवर्ण समाज के लिए अभिषाप भी बना हुआ है। जो जनेऊ चंद घंटों पहले तक पिछड़ेपन और जातिवाद का दबाव महसूस कर रहा था, उसे एकाएक गौरान्वित होने का सौभाग्य प्राप्त हो गया। जनेऊ को यह सौभाग्य दिया है देश के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार ने जिसके उत्तराधिकारी का धर्म सुबह सुबह संकट में आ गया था।

गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रचार अभियान के तहत बुधवार को सोमनाथ मंदिर पहुंचे   के जाते ही एक विवाद ने सिर उठा लिया। यह विवाद उठा मंदिर के भीतर उनके गैर हिन्दू श्रद्धालु के रूप में हुए प्रवेश के साथ। राहुल गांधी के धर्म को लेकर अपने सामने खड़े हुए संकट को देखते हुए कांग्रेस को ऐसी तस्वीर जारी करनी पड़ी जिसमें वह न सिर्फ जनेऊ धारण किए हुए हैं बल्कि एक पुरोहित उनसे कुछ पूजा पाठ भी करवा रहा है। इस तस्वीर के बाद कांग्रेस की ओर से ऐसे कई फोटोज जारी किए गए, जिनमें राहुल गांधी को परिवार के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेते हुए देखा जा सकता है।

{ यह भी पढ़ें:- #CongressPresidentRahulGandhi: राहुल के लिए चुनौतियों की फेहरिस्त है लंबी }

दरअसल मंदिर के नियमानुसार सोमनाथ मंदिर में ज्यार्तिलिंग के दर्शन के लिए आने वाले गैर हिन्दू श्रद्धालुओं को एक रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करवाना होता है। राहुल गांधी के इस कार्यक्रम की सूचना मिलने के बाद गुजरात के मीडिया प्रभारी ने राहुल गांधी के साथ मंदिर जाने वाले अहमद पटेल के साथ राहुल गांधी के नाम की एंट्री भी रजिस्टर में करवा दी। जब यह खबर सुर्खी में आई तो विरोधियों ने इस खबर को चुनावी राजनीति का हिस्सा बनाते देर नहीं लगाई। कुछ ही घंटों में राहुल गांधी के धर्म पर ​स्पष्टीकरण की मांग उठने लगी।

राहुल गांधी के धर्म को लेकर उठे सवालों के बीच कांग्रेस कुछ घंटों तक बैकफुट पर रही। पार्टी के प्रवक्ताओं के पास इस बात का कोई जवाब नहीं थी क्योंकि यह गलती खुद पार्टी के ही एक जिम्मेदार पदाधिकारी की ओर से की गई थी।

{ यह भी पढ़ें:- पीएम मोदी का सवाल- गुजरात चुनाव में पाकिस्तान क्यों कर रहा है हस्तक्षेप ? }

हालांकि दिन गुजरने के साथ कांग्रेस के किसी रणनीतिकार ने गांधी परिवार की फोटो एल्बम को पलटते हुए इस समस्या का समाधान निकाल ही दिया। आनन फानन में कांग्रेस की ओर से एक प्रेस कांफ्रेन्स बुलाई गई और राहुल गांधी की जनेऊ के साथ पूजा पाठ करते समय ली गई तस्वीर को सार्वजनिक रूप से पेश किया गया। कांग्रेस ने राहुल गांधी के बचपन की तस्वीर को दिखाते हुए कहा कि जो लोग आज राहुल गांधी के धर्म पर सवाल खड़ा कर रहे हैं उन्हें कांग्रेस बताना चाहती है कि राहुल गांधी एक जनेऊधारी हिन्दू हैं।

क्यों संकट में आया राहुल गांधी का धर्म—

धर्म भारतीय राजनीति में हमेशा अहम भूमिका निभाता आया है। आजाद भारत के 70 सालों के इतिहास में प्रधानमंत्री पद पर हिन्दू और सिख नेताओं को छोड़कर किसी अन्य धर्म के नेताओं की ताजपोशी नहीं हो सकी है। इसके कारण जो भी रहे हों लेकिन यह सर्वविदित है कि भारत राष्ट्रपति के रूप में तो किसी अन्य धर्म के व्यक्ति को स्वीकार कर सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री पद के लिए ऐसा होना संभव नहीं है।

{ यह भी पढ़ें:- गुजरात चुनाव: पहले चरण की वोटिंग खत्म, 4 बजे तक 60% पड़े वोट }

अगर सोनिया गांधी की बात की जाए तो वह भी विदेशी होने की वजह से ही 2004 में प्रधानमंत्री नहीं बन पाईं थी। जिस वजह से सोनिया गांधी ने अपने बेटे राहुल गांधी को देश की राजनीति की सबसे ताकतवर कुर्सी पर पहुंचाने के लिए पहले उन्हें भारतीय का दर्ज दिलवाने की जी तोड़ कोशिशें की हैं। वह नहीं चाहतीं थी कि जिस वजह से उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी से दूर रहना पड़ा वही वजह राहुल गांधी के रास्ते का रोड़ा बने। लेकिन इस बीच धर्म को लेकर उठे सवाल ने एकाएक राहुल गांधी के मुद्दे पर पूरी पार्टी को चंद घंटों के लिए बैकफुट पर धकेल दिया था।

 

 

{ यह भी पढ़ें:- बीजेपी के इस दिग्गज सांसद ने दिया पार्टी से इस्तीफा, बोले- पीएम की नीतियों से खुश नहीं हूं }

Loading...