जानिये Good Friday और ईसा मसीह से जुड़ी कुछ खास बातें

लखनऊ। Good Friday वो दिन है जिस दिन ईसा मसीह ने धरती पर बढ़ रहे पापों को रोकने के लिए बलिदान दे दिया था। ईसाई धर्म में ईसा मसीह का बहुत महत्व है। ईसा मसीह ने बिना किसी स्वार्थ के अपने भक्तों के लिए अपनी जान गंवा दी। जिस दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया वो दिन शुक्रवार का था और तभी से इस दिन को गुड फ्राइडे के रूप में मनाया जाने लगा।




बताया जाता है, जिस दिन ईसा मसीह की मौत हुई उसके तीन दिन बाद वो दोबारा से जीवित हो गए और वो रविवार का दिन था इसलिए इस दिन को ईस्टर संडे कहा जाता है। इस दिन को गुड फ्राइडे के साथ-साथ होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे भी कहा जाता है।




क्या है गुड फ्राइडे का महत्व

Janiye Good Friday Se Judi Kuch Khas Baat :

ईसाई धर्म के लिए गुड फ्राइडे का खास महत्व होता है। बहुत से लोग ईसा के इस बलिदान की वजह से गुड फ्राइडे के 40 दिन पहले से ही उपवास भी रखते हैं। जिसे लेंट कहा जाता है बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो 40 दिन का व्रत न रखकर केवल शुक्रवार का व्रत रख लेते हैं और प्रार्थना करते हैं। इस दिन लोग भगवान ईसा के वचनों को और उपदेशों को याद करते है, साथ ही उन पर अमल कर प्रेरित भी होते हैं। सलीब पर लटकते हुए भगवान ईसा ने जो आखिरी बात कही वो थी, ‘हे ईश्वर इन्हे माफ करें क्योंकि इन्हे खुद इस बात की समझ नहीं कि ये क्या कर रहे हैं।’




ईसू ने जब त्यागे प्राण तब हुई यह घटना

बाइबल के मुताबिक ईसा मसीह करीब छह घंटे तक सलीब पर लटके रहे तकलीफ़ों को झेलते रहे। उन्हे सलीब पर चढ़ाये जाने के लगभग तीन घंटे बाद ईसा मसीह ने अपने प्राण त्यागे और जैसे उनके शरीर से प्राण निकले उसी समय खतरनाक भूकंप आया था और कब्रें खुल गईं। बताया जाता है कि पवित्र मंदिर का पर्दा ऊपर से नीचे तक फट गया था। जब ईसा मसीह के प्राण निकले उस वक्त दोपहर के 3 बज रहे थे और पूरे देश में अंधेरा छा गया और आखिरी में उनकी एक चीख निकली और उसके बाद ईसा ने अपने प्राण त्याग दिये।

क्यों की गयी ईसा मसीह की हत्या

ईसा मसीह ने दो हज़ार साल पहले अन्याय, अपराध और अज्ञानता का अंधकार दूर करने के लिए लोगों को शिक्षित करने का जुर्म किया था। ये सब देख यहूदियों के धर्म गुरु रब्बियों ने ईसा का जमकर विरोध किया था। उन लोगों का मानना था कि ईसा में मसीहा जैसा कुछ भी नहीं है फिर भी लोग ईसा को ज्यादा मान रहे हैं।

यहूदियों को अपने कर्मों से प्रेम था और लोग ईसू को ईश्वर समझते थे जोकि उन्हे पाप लगता था। इसीलिए यहूदियों ने उस समय के रोमन गवर्नर को शिकायत कर दी थी। सोमनों को यहूदियों की कट्टरपंथियों से डर लगता था जिसकी वजह से उन्होने ईसू को क्रूस पर लटकाने की सजा सुना दी। जिसके बाद ईसू पर काफी अत्याचार किया गया उनके हाथों में कील ठोंककर उन्हे सूली पर चढ़ा दिया गया।

लखनऊ। Good Friday वो दिन है जिस दिन ईसा मसीह ने धरती पर बढ़ रहे पापों को रोकने के लिए बलिदान दे दिया था। ईसाई धर्म में ईसा मसीह का बहुत महत्व है। ईसा मसीह ने बिना किसी स्वार्थ के अपने भक्तों के लिए अपनी जान गंवा दी। जिस दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया वो दिन शुक्रवार का था और तभी से इस दिन को गुड फ्राइडे के रूप में मनाया जाने लगा। बताया जाता है, जिस दिन ईसा मसीह की मौत हुई उसके तीन दिन बाद वो दोबारा से जीवित हो गए और वो रविवार का दिन था इसलिए इस दिन को ईस्टर संडे कहा जाता है। इस दिन को गुड फ्राइडे के साथ-साथ होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे भी कहा जाता है। क्या है गुड फ्राइडे का महत्वईसाई धर्म के लिए गुड फ्राइडे का खास महत्व होता है। बहुत से लोग ईसा के इस बलिदान की वजह से गुड फ्राइडे के 40 दिन पहले से ही उपवास भी रखते हैं। जिसे लेंट कहा जाता है बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो 40 दिन का व्रत न रखकर केवल शुक्रवार का व्रत रख लेते हैं और प्रार्थना करते हैं। इस दिन लोग भगवान ईसा के वचनों को और उपदेशों को याद करते है, साथ ही उन पर अमल कर प्रेरित भी होते हैं। सलीब पर लटकते हुए भगवान ईसा ने जो आखिरी बात कही वो थी, 'हे ईश्वर इन्हे माफ करें क्योंकि इन्हे खुद इस बात की समझ नहीं कि ये क्या कर रहे हैं।' ईसू ने जब त्यागे प्राण तब हुई यह घटनाबाइबल के मुताबिक ईसा मसीह करीब छह घंटे तक सलीब पर लटके रहे तकलीफ़ों को झेलते रहे। उन्हे सलीब पर चढ़ाये जाने के लगभग तीन घंटे बाद ईसा मसीह ने अपने प्राण त्यागे और जैसे उनके शरीर से प्राण निकले उसी समय खतरनाक भूकंप आया था और कब्रें खुल गईं। बताया जाता है कि पवित्र मंदिर का पर्दा ऊपर से नीचे तक फट गया था। जब ईसा मसीह के प्राण निकले उस वक्त दोपहर के 3 बज रहे थे और पूरे देश में अंधेरा छा गया और आखिरी में उनकी एक चीख निकली और उसके बाद ईसा ने अपने प्राण त्याग दिये।क्यों की गयी ईसा मसीह की हत्याईसा मसीह ने दो हज़ार साल पहले अन्याय, अपराध और अज्ञानता का अंधकार दूर करने के लिए लोगों को शिक्षित करने का जुर्म किया था। ये सब देख यहूदियों के धर्म गुरु रब्बियों ने ईसा का जमकर विरोध किया था। उन लोगों का मानना था कि ईसा में मसीहा जैसा कुछ भी नहीं है फिर भी लोग ईसा को ज्यादा मान रहे हैं।यहूदियों को अपने कर्मों से प्रेम था और लोग ईसू को ईश्वर समझते थे जोकि उन्हे पाप लगता था। इसीलिए यहूदियों ने उस समय के रोमन गवर्नर को शिकायत कर दी थी। सोमनों को यहूदियों की कट्टरपंथियों से डर लगता था जिसकी वजह से उन्होने ईसू को क्रूस पर लटकाने की सजा सुना दी। जिसके बाद ईसू पर काफी अत्याचार किया गया उनके हाथों में कील ठोंककर उन्हे सूली पर चढ़ा दिया गया।