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जवाहर बाग कांड: न्याय की आस में भटक रहे शहीदों के परिजन, ठंडे बस्ते में गयी CBI जांच

Jawaharbagh Murder Family Of Martyred Mukul Dwivedi And Santosh Yadav Are Waiting For Justice

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर जवाहर बाग कांड एक बार फिर चर्चा में है। 2 जून साल 2016 की शाम को हुई हिंसा में शहीद हुए दो पुलिसकर्मी एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और इंस्पेक्टर संतोष यादव के परिजन न्याय की आस में आज भी दर-दर भटक रहे हैं। विभागीय उदासीनता के चलते आज भी इस मामले की जांच पूरी नहीं हो सकी है। जबकि एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया था कि दो टीमें बनाकर मामले की जांच की जाए।

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हाईकोर्ट ने कहा था कि एक टीम को जवाहर बाग में हुए अवैध कब्जे के लिए जिम्मेदारों का पता लगाना था। दूसरी टीम को एएसपी मुकुल द्विवेदी और इंस्पेक्टर संतोष यादव की मौत की वजह और दोषियों को तलाशना था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा था कि पूरे मामले की जांच कर दो महीने के अंदर रिपोर्ट सौंपी जाये, लेकिन दो साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद सीबीआई मामले की जांच पूरी नहीं कर सकी है। एक साल से तारीख लगती है लेकिन बहस नहीं हो पा रही है। सीबीआई दो साल बाद भी जांच के लिए समय ही मांग रही है।
शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और इंस्पेक्टर संतोष यादव

जांच में कई बड़े नाम हो सकते हैं बेनकाब

दरअसल, इस मामले के याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय कहते हैं अगर जवाहरबाग कांड की जांच सही तरीके से की जाये तो कई बड़े नेता और अफसरों की गर्दन फंस सकती है। इसी के चलते सीबीआई ने मामले की जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। हालांकि इस कांड के बाद ये बात उजागर हुई थी कि जवाहर बाग पर अवैध कब्जा करने वालों को राजनैतिक संरक्षण था। जो अफसर जांच के दायरे में हैं वह एक-एक करके रिटायर हो रहे हैं। जांच इतनी लंबी चलेगी तो साक्ष्य ही नहीं बचेंगे।

इस हिंसा में जान गंवाने वाले एएसपी मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना का कहना है कि शहीद पति को वीरता पदक दिलाने के लिए उन्होंने एक माह पहले डीजीपी को पत्र लिखा था, जिसका आज तक जवाब नहीं मिल सका। वहीं जवाहर बाग का नाम शहीद इंस्पेक्टर संतोष यादव के नाम पर करने के लिए भी कुछ माह पहले उनके परिजनों ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। लेकिन कुछ नहीं हुआ।

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