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जवाहर लाल नेहरू: जिंदगी के 9 साल जेल में गुजारे,पहले PM के रूप में आधुनिक भारत के वास्तुकार

Jawaharlal Nehru Spent 9 Years Of His Life In Jail As The First Prime Minister Of Modern India

By बलराम सिंह 
Updated Date

लखनऊ। आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की आज जयंती है। उनके जन्मदिन यानि 14 नवंबर का दिन देश में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। जवाहरलाल नेहरू का जन्म सन् 1889 में प्रयागराज के एक कश्मीरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता मोतीलाल नेहरू देश के नामचीन अधिवक्ता थे। वह अपने जीवन में नौ बार जेल भी गए। 1922 में पहली बार जेल जाने और 1945 में आखिरी बार रिहा होने के बीच वो कुल नौ बार जेल गए। सबसे कम 12 दिनों के लिए, सबसे ज्यादा 1,041 दिनों तक।

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मोतीलाल नेहरू राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रमुख सहयोगियों में से एक थे। मोतीलाल नेहरू के चार बच्चे थे, जिनमें जवाहरलाल नेहरू सबसे बड़े थे। नेहरू ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा घर में ही 14 वर्ष की आयु में पूरी कर ली थी। जब वे 15 साल के हुए तो उन्हें इंग्लैंड के हैरो स्कूल में आगे की पढ़ाई करने के लिए भेज दिया गया।

दो साल बाद वे कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज चले गए, जहां उन्होंने प्राकृतिक विज्ञान में डिग्री हासिल की। इसके बाद नेहरू ने लंदन में अपनी बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी की। वे 1912 के आसपास भारत वापस आ गए थे, उस समय उनकी उम्र 22 साल थी। भारत वापस आने के बाद उन्होंने अपने बैरिस्टर पिता मोतीलाल नेहरू के साथ प्रेक्टिस शुरू की। 1916 में उनकी शादी कमला कौल से हुई और वह दिल्ली में बस गए। 1917 में उनके घर एक बेटी का जन्म हुआ, जिसका नाम उन्होंने इंदिरा प्रियदर्शिनी (इंदिरा गांधी) रखा।

1917 में एनी बेसेंट की गिरफ्तारी के बारे में पता चलने के बाद नेहरू के अंदर राजनीति के प्रति रुचि बढ़ी। वे ऑल इंडिया होम रूल लीग में शामिल हुए। महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन (1920-22) के दौरान जवाहरलाल नेहरू पहली बार गिरफ्तार हुए थे। उन्होंने अपनी जिंदगी के करीब 9 साल जेल में बिताए।

1920 में उन्हें इंडियन नेशनल कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। यह राजनीति में उनकी पहली नेतृत्वकारी भूमिका थी और वे अंग्रेजों को अपने मुल्क से बाहर निकालने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध थे। जब अंग्रेजों ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध में भारत की भागीदारी की घोषणा की, तो नेताओं के परामर्श के बिना नेहरू और कांग्रेस के अन्य सदस्यों ने 1942 में भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित कर डाला। इसके तुरंत बाद महात्मा गांधी और अन्य नामी नेताओं के साथ नेहरू की गिरफ्तारी हो गई थी।

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15 अगस्त, 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो जवाहरलाल नेहरू को प्रथम प्रधानमंत्री बनाया गया, लेकिन इस पद को संभालते हुए उनके सामने कई सारी चुनौतियां खड़ी थीं। सबसे बड़ा उस खूनी विभाजन के बाद देश को संभालना था, जिसने देश के दो टुकड़े कर दिए थे। जवाहर लाल नेहरू ने बहुत ही सहजता और लगन के साथ अपनी जिम्मेदारियों को संभाला और देश को विकास की तरफ बढ़ाने का कार्य किया।

वे बहुलवाद, समाजवाद, उदारवाद और लोकतंत्र में विश्वास रखते थे। उन्हें बच्चों से बहुत प्यार था और इसलिए ही उनका जन्मदिन भारत में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और भारत का पहला अंतरिक्ष कार्यक्रम आदि सहित भारत के शीर्ष स्तरीय संस्थानों की कल्पना करके भारत की शिक्षा को सपोर्ट किया। जवाहरलाल नेहरू ने डिस्कवरी आफ इंडिया नाम से एक किताब भी लिखी थी।

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