जयललिता की पहली पुण्यतिथि: जानिये बड़े पर्दे से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर

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नई दिल्ली। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री स्व. जयललिता की आज प्रथम पुण्यतिथि है। पिछले साल 5 दिसंबर को जयललिता को दिल का दौरा पड़ने से अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था। सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद उन्हें 22 सितंबर को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आज हम आपको उनकी पुण्यतिथि पर जयललिता से जुड़ी कुछ खास बाते बताने जा रहे हैं। जयललिता का अभिनेत्री से…

नई दिल्ली। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री स्व. जयललिता की आज प्रथम पुण्यतिथि है। पिछले साल 5 दिसंबर को जयललिता को दिल का दौरा पड़ने से अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था। सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद उन्हें 22 सितंबर को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आज हम आपको उनकी पुण्यतिथि पर जयललिता से जुड़ी कुछ खास बाते बताने जा रहे हैं।

जयललिता का अभिनेत्री से मुख्यमंत्री बनने तक के सफर में कई उतार चढ़ाव आए। महज 15 वर्ष की उम्र से फिल्मी करियर की शुरूआत करने वाली जयललिता एक सुप्रसिद्ध तमिल एक्ट्रेस बनीं। जयललिता अन्नाद्रमुक के संस्थापक एमजी रामचंद्रन उर्फ एमजीआर के काफी करीब थीॆ। बता दें कि जयललिता ने एमजीआर के साथ 28 फिल्मों में काम भी किया। एमजीआर तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थे साथ ही भारतीय राजनीति के सम्मानित नेताओं में से एक थे।

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जयललिता ने फिल्मी दुनिया को अलविदा कर एमजीआर के साथ राजनीति में आने का फैसला लिया। साल 1983 में एमजीआर ने जयललिता को पार्टी का सचिव नियुक्त किया और राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। इन सब के बीच जयललिता और एमजीआर के बीच मतभेद की खबरें भी आईं एमजीआर की अंतिम यात्रा के दौरान एमजीआर की पत्नी और समर्थकों ने जयललिता के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया जिसकी वजह से पार्टी में बिखराव की स्थिति भी उत्पन्न हो गई।

एमजीआर के बाद जयलल‍िता का नाम तेलुगु सिनेमा के सुपर स्टार शोभन बाबू के साथ जुड़ा। हालांकि शोभन पहले से ही शादीशुदा थे लेकिन जयललि‍ता को बेहद यार करते थे। खबरों की मानें तो जयलल‍िता शोभन से शादी भी करना चाहती थीं लेक‍िन वह इसके ल‍िए तैयार नहीं हुए।

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राजनीतिक सफर

जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद जयललिता पहली बार साल 1991 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। हालांकि साल 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में वो हार गईं। इतने समय के कार्यकाल में जयललिता एक मजबूत राजनीतिक हस्ती बन चुकी थीं। आय से अधिक संपत्ति रखने के लिए जयललिता पर केस चला जिसमें वो दोषी भी पाई गईं। आखिरकार 27 सितंबर 2014 को बेंगलुरु की एक अदालत ने जयललिता को चार साल कैद की सजा सुनाई।

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