जदयू हाईकमान की दो टूक- नी​तीश का निर्णय सर्वोच्च, PK के बगावती सुर

Prashant kishor
जदयू हाईकमान की दो टूक- नी​तीश का निर्णय सर्वोच्च, प्रशांत किशोर के बगावती सुर

पटना। नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर एनडीए में भाजपा की सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड के अंदर दो फाड़ हो गए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने इस पर सवाल खड़े किए। इसके बाद नेता पवन वर्मा ने भी विरोध स्वर मुखर किए। जदयू आलाकमान ने दोनों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि पार्टी लाइन से हटकर बोलने वालों के विचार उनके निजी हो सकते हैं। ऐसे लोगों को इधर-उधर बोलने की बजाए पार्टी फोरम में अपनी बात रखनी चाहिए। हालांकि गुरुवार को फिर प्रशांत किशोर ने विधेयक के विरोध में ट्वीट किया है। पीके ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक धर्म के आधार पर प्रताड़ित करने का आधार बनेगा।

Jdu High Command Bluntly Ni Teishs Decision Supreme Prashant Kishores Rebellious Tone :

प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर कहा कि हमें बताया गया था कि नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 नागरिकता प्रदान करने के लिए है। यह किसी से भी उसकी नागरिकता को वापस नहीं लेगा। लेकिन सच्चाई यह है कि यह नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस के साथ मिलकर सरकार के हाथ में एक हथियार दे देगा। जिससे वह धर्म के धार पर लोगों के साथ भेदभाव कर और यहां तक कि उनपर मुकदमा चला सकती है।

बुधवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि जो भी नेता अनावश्यक बयान दे रहे हैं उससे पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। चाहे कोई भी हो उसे नीतीश कुमार के व्यवक्तित्व, नेतृत्व और फैसले पर सवाल उठाने की किसी को इजाजत नहीं है।

जदयू ने जब नागरिकता संशोधन विधेयक के समर्थन करने का फैसला लिया उसके बाद प्रशांत किशोर ने 2015 में मिले जनसमर्थन की याद दिलाई। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने से पहले जदयू नेतृत्व को उन लोगों के बारे में एक बार जरूर सोचना चाहिए जिन्होंने साल 2015 में उन पर विश्वास जताया था।

पटना। नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर एनडीए में भाजपा की सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड के अंदर दो फाड़ हो गए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने इस पर सवाल खड़े किए। इसके बाद नेता पवन वर्मा ने भी विरोध स्वर मुखर किए। जदयू आलाकमान ने दोनों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि पार्टी लाइन से हटकर बोलने वालों के विचार उनके निजी हो सकते हैं। ऐसे लोगों को इधर-उधर बोलने की बजाए पार्टी फोरम में अपनी बात रखनी चाहिए। हालांकि गुरुवार को फिर प्रशांत किशोर ने विधेयक के विरोध में ट्वीट किया है। पीके ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक धर्म के आधार पर प्रताड़ित करने का आधार बनेगा। प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर कहा कि हमें बताया गया था कि नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 नागरिकता प्रदान करने के लिए है। यह किसी से भी उसकी नागरिकता को वापस नहीं लेगा। लेकिन सच्चाई यह है कि यह नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस के साथ मिलकर सरकार के हाथ में एक हथियार दे देगा। जिससे वह धर्म के धार पर लोगों के साथ भेदभाव कर और यहां तक कि उनपर मुकदमा चला सकती है। बुधवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि जो भी नेता अनावश्यक बयान दे रहे हैं उससे पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। चाहे कोई भी हो उसे नीतीश कुमार के व्यवक्तित्व, नेतृत्व और फैसले पर सवाल उठाने की किसी को इजाजत नहीं है। जदयू ने जब नागरिकता संशोधन विधेयक के समर्थन करने का फैसला लिया उसके बाद प्रशांत किशोर ने 2015 में मिले जनसमर्थन की याद दिलाई। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने से पहले जदयू नेतृत्व को उन लोगों के बारे में एक बार जरूर सोचना चाहिए जिन्होंने साल 2015 में उन पर विश्वास जताया था।