झारखंड और महाराष्ट्र में नहीं चलेगा नीतीश का ‘तीर’, EC ने फ्रीज किया JDU का सिंबल

nitish kumar
झारखंड और महाराष्ट्र में नहीं चलेगा नीतीश का 'तीर', EC ने फ्रीज किया JDU का सिंबल

नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार को चुनाव आयोग से झटका लगा है। चुनाव आयोग ने जनता दल (यूनाइटेड) को अपने चुनाव चिह्न ‘तीर’ का इस्तेमाल झारखंड और महाराष्ट्र में चुनाव में करने से रोक लगा दी है क्योंकि यह चिह्न झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और शिव सेना के चुनाव चिह्न ‘धनुष और तीर’ से मिलता-जुलता है। बता दें इस मामले में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने 24 जून, 2019 को चुनाव आयोग से शिकायत की थी।

Jdu Not Be Granted Concession To Use Symbol Arrow Of Elections In Jharkhand And Maharashtra Says Ec :

जदयू, झामुमो और शिवसेना क्रमश: बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र की क्षेत्रीय पार्टियां हैं। चुनाव आयोग ने 16 अगस्त को जारी अपने आदेश में कहा था, ‘इस मामले में सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद आयोग ने जदयू को निर्देश दिया है उसे चुनाव चिह्न आदेश के पैरा 10 के तहत झारखंड और महाराष्ट्र में अब से चुनाव लड़ने की छूट नहीं दी जाएगी।’

इस साल मार्च में आयोग ने आदेश दिया था कि झामुमो और शिवसेना बिहार में अपने चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। आठ मार्च, 2019 के आदेश में जो कहा गया था वह अब भी लागू होगा। और यही चीज महाराष्ट्र में भी लागू होगी।

फैसले के खिलाफ अपील करेगी जेडीयू

झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी में जुटी जेडीयू के लिए आयोग का यह फैसला बड़ा झटका है। जेडीयू अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद झारखंड में चुनाव अभियान की शुरुआत करने वाले हैं, लेकिन उसके ठीक पहले आयोग का फैसला उनकी परेशानी बढ़ा सकता है। वहीं इस मामले पर जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ अपील की बात कही है।

नीतीश कुमार की लोकप्रियता से घबराया हुआ है विपक्ष

केसी त्यागी ने कहा है कि वह चुनाव में इस फैसले के खिलाफ अपील करने के साथ-साथ न्यायपालिका का भी रुख करेंगे। नीतीश कुमार की लोकप्रियता से विपक्ष घबराया हुआ है, जेडीयू के बढ़ते जनाधार से घबराकर सभी विपक्षी पार्टियां षडयन्त्र कर रही हैं। उनकी पार्टी का स्पष्ट मानना है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा बिहार में अपने सिंबल के साथ चुनाव लड़ती रही है। लिहाजा जेडीयू को भी उसके चुनाव चिन्ह के साथ झारखंड विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारने की इजाजत मिलनी चाहिए।

नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार को चुनाव आयोग से झटका लगा है। चुनाव आयोग ने जनता दल (यूनाइटेड) को अपने चुनाव चिह्न ‘तीर' का इस्तेमाल झारखंड और महाराष्ट्र में चुनाव में करने से रोक लगा दी है क्योंकि यह चिह्न झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और शिव सेना के चुनाव चिह्न ‘धनुष और तीर' से मिलता-जुलता है। बता दें इस मामले में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने 24 जून, 2019 को चुनाव आयोग से शिकायत की थी। जदयू, झामुमो और शिवसेना क्रमश: बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र की क्षेत्रीय पार्टियां हैं। चुनाव आयोग ने 16 अगस्त को जारी अपने आदेश में कहा था, 'इस मामले में सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद आयोग ने जदयू को निर्देश दिया है उसे चुनाव चिह्न आदेश के पैरा 10 के तहत झारखंड और महाराष्ट्र में अब से चुनाव लड़ने की छूट नहीं दी जाएगी।' इस साल मार्च में आयोग ने आदेश दिया था कि झामुमो और शिवसेना बिहार में अपने चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। आठ मार्च, 2019 के आदेश में जो कहा गया था वह अब भी लागू होगा। और यही चीज महाराष्ट्र में भी लागू होगी। फैसले के खिलाफ अपील करेगी जेडीयू झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी में जुटी जेडीयू के लिए आयोग का यह फैसला बड़ा झटका है। जेडीयू अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद झारखंड में चुनाव अभियान की शुरुआत करने वाले हैं, लेकिन उसके ठीक पहले आयोग का फैसला उनकी परेशानी बढ़ा सकता है। वहीं इस मामले पर जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ अपील की बात कही है। नीतीश कुमार की लोकप्रियता से घबराया हुआ है विपक्ष केसी त्यागी ने कहा है कि वह चुनाव में इस फैसले के खिलाफ अपील करने के साथ-साथ न्यायपालिका का भी रुख करेंगे। नीतीश कुमार की लोकप्रियता से विपक्ष घबराया हुआ है, जेडीयू के बढ़ते जनाधार से घबराकर सभी विपक्षी पार्टियां षडयन्त्र कर रही हैं। उनकी पार्टी का स्पष्ट मानना है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा बिहार में अपने सिंबल के साथ चुनाव लड़ती रही है। लिहाजा जेडीयू को भी उसके चुनाव चिन्ह के साथ झारखंड विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारने की इजाजत मिलनी चाहिए।