जदयू के 20 विधायक शरद यादव के समर्थन को तैयार लेकिन नहीं तोड़ेंगे पार्टी

पटना। जदयू और बीजेपी के गठबंधन से नाराज पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव के तीन दिवसीय बिहार दौरे पार्टी की अंदरूनी राजनीति को धार दे दी है। पार्टी का ​नीतीश विरोधी खेमा और आरजेडी समर्थकोंं ने शरद यादव का जबर्दस्त स्वागत किया लेकिन पार्टी का कोई भी विधायक इस मौके पर नजर नहीं आया। पटना एयरपोर्ट पर उतरते ही शरद यादव ने अपनी भावनाओं को जाहिर करते हुए खुद को महागठबंधन का समर्थक करार देते हुए ​नीतीश कुमार को बिहार की जनता के साथ धोखेबाजी करने वाला करार दिया।

शरद यादव की बयानबाजी और तेवरों के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी से बात की गई तो उन्होंने प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि शरद यादव पार्टी के सीनियर नेता है। अगर उन्हें पार्टी के किसी भी अंदरूनी मसले से नाराज है तो उन्हें पार्टी के भीतर अपनी बात कहनी चाहिए। 19 अगस्त को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक है उन्हें अपना पक्ष सार्वजनिक तौर पर न रखकर पार्टी फोरम में रखनी चाहिए।

वहीं शरद यादव के दौरे से बिहार जदयू के नेताओं के दूरी बनाए जाने पर शरद यादव समर्थक अरुण कुमार श्रीवास्तव खुलासा करते हुए कहा कि जदयू के 20 विधायक शरद यादव को समर्थन देने को तैयार हैं, लेकिन शरद यादव नहीं चाहते कि पार्टी टूटे। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से इन विधायकोें की सदस्यता भी खतरे में आ जाएगी, समय आने पर सभी को पता चल जाएगा कि कौन किसके साथ है। अरुण श्रीवास्तव वही नेता है जिन्हें हाल ही में पार्टी ने गुजरात के महाचिव पद से बर्खास्त कर दिया था।

अरुण कुमार श्रीवास्तव जदयू में शरद यादव गुट के नेता बताए जाते हैं। शरद यादव के इशारे पर ही उन्होंने गुजरात के राज्यसभा चुनाव में अपने विधायक का वोट अहमद पटेल को दिलवाने में भूमिका निभाई थी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने श्रीवास्तव को इसी वजह से अगले ही दिन गुजरात के महासचिव पद से बर्खास्त कर दिया था।

पार्टी सूत्रों की माने तो नीतीश कुमार चाहते थे कि गुजरात विधानसभा में पार्टी के विधायक छोटू भाई वासवा भाजपा प्रत्याशी को अपना वोट दें, लेकिन अरुण कुमार श्रीवास्तव ने शरद यादव के इशारे पर वासवा का वोट कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में डाल दिया।