जम्मू कश्मीर पुलिस का दावा, त्राल क्षेत्र हुआ हिज्बुल आतंकियों से 31 साल बाद मुक्त

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श्रीनगर: कोरोना संकट के दौर में जम्म्-कश्मीर पुलिस ने एक बड़ा ऐलान किया कि दक्षिण कश्मीर के त्राल क्षेत्र में अब हिज्बुल मुजाहिद्दीन (एचएम) का एक भी सक्रिय आतंकवादी नहीं बचा है. पुलिस की ओर से यह ऐलान शुक्रवार सुबह त्राल क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में तीन स्थानीय आतंकियों के मारे जाने के बाद किया गया.

Jk Police Claim Tral Area Freed From Hizbul Militants After 31 Years :

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दावा किया कि यह एक बड़ी उपलब्धि है कि दशकों के बाद क्षेत्र में हिज्बुल मुजाहिद्दीन की कोई उपस्थिति नहीं रही. जम्मू-कश्मीर पुलिस में कश्मीर के आईजीपी विजय कुमार ने कहा कि शुक्रवार के सफल ऑपरेशन के बाद त्राल क्षेत्र में हिज्बुल मुजाहिद्दीन के किसी आतंकी की कोई उपस्थिति नहीं है. 1989 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है.

बुरहान वानी का घर त्राल
त्राल क्षेत्र हिज्बुल मुजाहिद्दीन के पोस्टर बॉय और कमांडर बुरहान वानी का गृह शहर भी है. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी में आतंकी गुटों के खिलाफ मुठभेड़ों की गति बढ़ा दी है. कश्मीर में जून के महीने में सुरक्षा बलों के साथ अब तक लगभग एक दर्जन से अधिक मुठभेड़ों में 35 से अधिक आतंकवादी मारे गए हैं. सुरक्षा बलों ने घाटी में आतंकी गुटों के खिलाफ लगातार अभियान चला रखा है. घाटी में लगभग हर रोज कहीं न कहीं मुठभेड़ होती ही है. पुलवामा में मंगलवार की सुबह मुठभेड़ में जहां 2 आतंकवादी मारे गए तो एक सीआरपीएफ जवान भी शहीद हो गया. रविवार को श्रीनगर में भी हथियार उठाने वाले तीन आतंकी मारे गए थे.

घाटी में रोज कहीं न कहीं मुठभेड़
घाटी में इन दिनों लगभग हर रोज कहीं न कहीं मुठभेड़ होती ही रहती है. इस साल अब तक कई मुठभेड़ों में 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे जा चुके हैं. कुछ दिन पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा था कि सफलतापूर्वक ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं. एक आतंकवादी को मार गिराना हमारे लिए कोई ख़ुशी की बात नहीं होती, लेकिन हकीकत यही है कि बंदूक वाला शख्स सभी के लिए खतरा होता है. हम इस खतरे को अनदेखा नहीं कर सकते. मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि आतंकी संगठनों में होने वाली नई भर्ती में भारी कमी आई है.

आतंकी संगठन भी सक्रिय होते दिख रहे हैं. शुक्रवार को ही कश्मीर के बिजबेहरा क्षेत्र में सीआरपीएफ पर हमला किया गया था. इस गोलीबारी में सीआरपीएफ के एक जवान और एक आम नागरिक की जान चली गई. पुलिस का मानना ​​है कि इस हमले के पीछे आतंकी संगठन जेकेआईएस के आतंकियों का हाथ हो सकता है. पिछले साल 5 अगस्त को केंद्र सरकार की ओर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के ऐतिहासिक फैसले के बाद घाटी में आतंकवाद बढ़ने की संभावनाओं को लेकर आशंकाएं जताई जा रही थी. सूत्रों का मानना ​​है कि आतंकी समूहों द्वारा सीमा पार से बड़ी संख्या में आतंकियों को भेजने के प्रयास को बढ़ा दिया गया था. इस दौरान कई घुसपैठ करने में कामयाब भी रहे.

सुरक्षा बलों को भी लगता है कि नागरिक मोर्चे पर अनुच्छेद 370 के बाद की स्थिति को अच्छी तरह से प्रबंधित किया गया था, लेकिन आतंकवाद के स्तर की जांच करना चुनौतीपूर्ण रहा था. दक्षिण कश्मीर आतंक के गढ़ के रूप में उभर रहा है.

आतंकी हमले का खतरा बरकरार
इसी बेल्ट में ज्यादातर आतंकवाद संबंधी गतिविधियां और आतंकवाद विरोधी अभियान हो रहे हैं. सुरक्षा बलों के अनुसार हमलों को लेकर गंभीर खतरा बना हुआ है. खुफिया सूत्रों ने उन्हें आईईडी हमलों या धमाकों की संभावनाओं को लेकर अलर्ट कर रखा है. कश्मीर पुलिस के आईजी विजय कुमार कहते हैं कि कार IED धमाका एक गंभीर खतरा है. जैश-ए-मोहम्मद के एक IED विशेषज्ञ को मार दिया गया है, लेकिन उसके खात्मे के बाद अभी भी कई अन्य लोग हैं.

श्रीनगर: कोरोना संकट के दौर में जम्म्-कश्मीर पुलिस ने एक बड़ा ऐलान किया कि दक्षिण कश्मीर के त्राल क्षेत्र में अब हिज्बुल मुजाहिद्दीन (एचएम) का एक भी सक्रिय आतंकवादी नहीं बचा है. पुलिस की ओर से यह ऐलान शुक्रवार सुबह त्राल क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में तीन स्थानीय आतंकियों के मारे जाने के बाद किया गया. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दावा किया कि यह एक बड़ी उपलब्धि है कि दशकों के बाद क्षेत्र में हिज्बुल मुजाहिद्दीन की कोई उपस्थिति नहीं रही. जम्मू-कश्मीर पुलिस में कश्मीर के आईजीपी विजय कुमार ने कहा कि शुक्रवार के सफल ऑपरेशन के बाद त्राल क्षेत्र में हिज्बुल मुजाहिद्दीन के किसी आतंकी की कोई उपस्थिति नहीं है. 1989 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है. बुरहान वानी का घर त्राल त्राल क्षेत्र हिज्बुल मुजाहिद्दीन के पोस्टर बॉय और कमांडर बुरहान वानी का गृह शहर भी है. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी में आतंकी गुटों के खिलाफ मुठभेड़ों की गति बढ़ा दी है. कश्मीर में जून के महीने में सुरक्षा बलों के साथ अब तक लगभग एक दर्जन से अधिक मुठभेड़ों में 35 से अधिक आतंकवादी मारे गए हैं. सुरक्षा बलों ने घाटी में आतंकी गुटों के खिलाफ लगातार अभियान चला रखा है. घाटी में लगभग हर रोज कहीं न कहीं मुठभेड़ होती ही है. पुलवामा में मंगलवार की सुबह मुठभेड़ में जहां 2 आतंकवादी मारे गए तो एक सीआरपीएफ जवान भी शहीद हो गया. रविवार को श्रीनगर में भी हथियार उठाने वाले तीन आतंकी मारे गए थे. घाटी में रोज कहीं न कहीं मुठभेड़ घाटी में इन दिनों लगभग हर रोज कहीं न कहीं मुठभेड़ होती ही रहती है. इस साल अब तक कई मुठभेड़ों में 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे जा चुके हैं. कुछ दिन पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा था कि सफलतापूर्वक ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं. एक आतंकवादी को मार गिराना हमारे लिए कोई ख़ुशी की बात नहीं होती, लेकिन हकीकत यही है कि बंदूक वाला शख्स सभी के लिए खतरा होता है. हम इस खतरे को अनदेखा नहीं कर सकते. मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि आतंकी संगठनों में होने वाली नई भर्ती में भारी कमी आई है. आतंकी संगठन भी सक्रिय होते दिख रहे हैं. शुक्रवार को ही कश्मीर के बिजबेहरा क्षेत्र में सीआरपीएफ पर हमला किया गया था. इस गोलीबारी में सीआरपीएफ के एक जवान और एक आम नागरिक की जान चली गई. पुलिस का मानना ​​है कि इस हमले के पीछे आतंकी संगठन जेकेआईएस के आतंकियों का हाथ हो सकता है. पिछले साल 5 अगस्त को केंद्र सरकार की ओर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के ऐतिहासिक फैसले के बाद घाटी में आतंकवाद बढ़ने की संभावनाओं को लेकर आशंकाएं जताई जा रही थी. सूत्रों का मानना ​​है कि आतंकी समूहों द्वारा सीमा पार से बड़ी संख्या में आतंकियों को भेजने के प्रयास को बढ़ा दिया गया था. इस दौरान कई घुसपैठ करने में कामयाब भी रहे. सुरक्षा बलों को भी लगता है कि नागरिक मोर्चे पर अनुच्छेद 370 के बाद की स्थिति को अच्छी तरह से प्रबंधित किया गया था, लेकिन आतंकवाद के स्तर की जांच करना चुनौतीपूर्ण रहा था. दक्षिण कश्मीर आतंक के गढ़ के रूप में उभर रहा है. आतंकी हमले का खतरा बरकरार इसी बेल्ट में ज्यादातर आतंकवाद संबंधी गतिविधियां और आतंकवाद विरोधी अभियान हो रहे हैं. सुरक्षा बलों के अनुसार हमलों को लेकर गंभीर खतरा बना हुआ है. खुफिया सूत्रों ने उन्हें आईईडी हमलों या धमाकों की संभावनाओं को लेकर अलर्ट कर रखा है. कश्मीर पुलिस के आईजी विजय कुमार कहते हैं कि कार IED धमाका एक गंभीर खतरा है. जैश-ए-मोहम्मद के एक IED विशेषज्ञ को मार दिया गया है, लेकिन उसके खात्मे के बाद अभी भी कई अन्य लोग हैं.