आटो चालक ने कैसे बेटे को बनाया सीए, पढि़ए संघर्ष का पूरा सफर

g

जोधपुर। हाल ही में सीए का परिणाम घोषित किया गया है। हर बार की तरह इस बार भी जोधपुर के युवाओं ने इसके परिणामों में अपनी श्रेष्ठता साबित की। सफलता हासिल करने वालों ने एक आटो चालक का बेटा नीलेश भी शामिल है जो अब सीए बन गया है।

Jodhpur Auto Drivers Son Become Ca :

नीलेश ने बताया कि एक दिन जब मैं स्कूल से आया तो पापा ने कहा मैं तुम्हें सीए बनाना चाहता हूं उस दिन वह पहली बार किसी चार्टर्ड एकाउंटेंट से मिले थे। पापा के कहने के बाद से ही मैंने सीए बनने की ठान ली। जब मैंने इस कोर्स में एडमिशन लिया तो लोगों ने पापा से कहा कि इसको भी ऑटो चलाना सिखा दो, सीए बहुत कठिन कोर्स है। इससे नही हो पाएगा, ना ही आप इसकी पढ़ाई का खर्चा उठा पाओगे।

ये बातें बहुत चुभती थीं लेकिन इस चुभन ने मेरे इरादों को और भी मजबूत कर दिया था। पिता चाहे आटो ड्राइवर हों एक बेटे का वो अभिमान होते हैं। मैंने मेहनत की और सीपीटी में जोधपुर में चौथे स्थान पर रहा। इस रिजल्ट के बाद निजी कोचिंग संचालक बी एम बियानी सर ने मदद की जिसकी मदद से वह आज इस मुकाम तक पहुंचा है।

वहीं पढ़ाई के लिए मदद करने वाले निजी कोचिंग संचालक बीएम बीयानी ने बताया कि नीलेश काफी इंटेलिजेंट था लेकिन आर्थिक परिस्थितियां सही नहीं थी लेकिन उसकी लगन को देखकर उन्होंने उसकी मदद की और आज वह इस मुकाम पर पहुंचा है जिसका उन्हें भी गर्व है। नीलेश ने बताया कि दो बार एग्जाम क्लियर नहीं कर पाने से उसका हौसला डगमगाया लेकिन मम्मी-पापा की आंखों में खुशी देखने के लिए मैंने पूरे जोश के साथ फिर मेहनत शुरू की।

दिन में 16-18 घंटे पढ़ाई करता आज मेरा सीए बनने का सपना सच हो गया। मुझे वो दिन भी याद है जब बस के पैसे बचाने के लिए मैं 10 किलोमीटर तक साइकिल से स्कूल जाया करता था। संघर्ष के इन दिनों ने ही मुझे पढऩे और आगे बढऩे की प्रेरणा दी।

नीलेश के पिता इंद्रजीत साहनी ने बताया कि वह करीब 36 वर्ष पहले बिहार के सिवान जिले से जोधपुर रोजगार की तलाश में आया था और नीलेश का जन्म भी जोधपुर में ही हुआ है मैंने यहां पर एक फैक्ट्री में 4 साल काम किया जिसके बाद ऑटो चलाने लगा और अभी मैं एम्स रोड पर लोडिंग ऑटो चलाता हूं। वहां आसपास के लोगों को पढ़ा लिखा देखकर मेरे मन में भी आता कि मैं भी मेरे बेटे को पढ़ाऊं ताकि वो भी अच्छे ऑफिस में बैठ कर सम्मान से कमाए।

300-500 रुपये रोज की कमाई के बीच बेटे को सीए बनाने की सोचना भी दिन में सपने देखने जैसा था। बेटे के जुनून ने मुझमें उम्मीदें जिंदा रखींण्। हमारे किराए के घर में सिर्फ एक कमरा है। बेटा देर रात तक पढ़ता था। हमारी नींद खराब ना हो इसलिए वो छत के ऊपर चला जाता था।

वहां वह स्ट्रीट लाइट की रोशनी में स्टडी करता। आज उसे सीए बना देखकर मेरी जिंदगी की साधाना सफल हो गई है। वहीं नीलेश ने भी कहा कि भविष्य में वो अपने पिता के सारे अरमानों को पूरा करने का प्रयास करेगा और कोई मेरे जैसे गरीब लड़का अगर पढऩा चाहेगा तो उसकी भी हो मदद करेगा।

जोधपुर। हाल ही में सीए का परिणाम घोषित किया गया है। हर बार की तरह इस बार भी जोधपुर के युवाओं ने इसके परिणामों में अपनी श्रेष्ठता साबित की। सफलता हासिल करने वालों ने एक आटो चालक का बेटा नीलेश भी शामिल है जो अब सीए बन गया है। नीलेश ने बताया कि एक दिन जब मैं स्कूल से आया तो पापा ने कहा मैं तुम्हें सीए बनाना चाहता हूं उस दिन वह पहली बार किसी चार्टर्ड एकाउंटेंट से मिले थे। पापा के कहने के बाद से ही मैंने सीए बनने की ठान ली। जब मैंने इस कोर्स में एडमिशन लिया तो लोगों ने पापा से कहा कि इसको भी ऑटो चलाना सिखा दो, सीए बहुत कठिन कोर्स है। इससे नही हो पाएगा, ना ही आप इसकी पढ़ाई का खर्चा उठा पाओगे। ये बातें बहुत चुभती थीं लेकिन इस चुभन ने मेरे इरादों को और भी मजबूत कर दिया था। पिता चाहे आटो ड्राइवर हों एक बेटे का वो अभिमान होते हैं। मैंने मेहनत की और सीपीटी में जोधपुर में चौथे स्थान पर रहा। इस रिजल्ट के बाद निजी कोचिंग संचालक बी एम बियानी सर ने मदद की जिसकी मदद से वह आज इस मुकाम तक पहुंचा है। वहीं पढ़ाई के लिए मदद करने वाले निजी कोचिंग संचालक बीएम बीयानी ने बताया कि नीलेश काफी इंटेलिजेंट था लेकिन आर्थिक परिस्थितियां सही नहीं थी लेकिन उसकी लगन को देखकर उन्होंने उसकी मदद की और आज वह इस मुकाम पर पहुंचा है जिसका उन्हें भी गर्व है। नीलेश ने बताया कि दो बार एग्जाम क्लियर नहीं कर पाने से उसका हौसला डगमगाया लेकिन मम्मी-पापा की आंखों में खुशी देखने के लिए मैंने पूरे जोश के साथ फिर मेहनत शुरू की। दिन में 16-18 घंटे पढ़ाई करता आज मेरा सीए बनने का सपना सच हो गया। मुझे वो दिन भी याद है जब बस के पैसे बचाने के लिए मैं 10 किलोमीटर तक साइकिल से स्कूल जाया करता था। संघर्ष के इन दिनों ने ही मुझे पढऩे और आगे बढऩे की प्रेरणा दी। नीलेश के पिता इंद्रजीत साहनी ने बताया कि वह करीब 36 वर्ष पहले बिहार के सिवान जिले से जोधपुर रोजगार की तलाश में आया था और नीलेश का जन्म भी जोधपुर में ही हुआ है मैंने यहां पर एक फैक्ट्री में 4 साल काम किया जिसके बाद ऑटो चलाने लगा और अभी मैं एम्स रोड पर लोडिंग ऑटो चलाता हूं। वहां आसपास के लोगों को पढ़ा लिखा देखकर मेरे मन में भी आता कि मैं भी मेरे बेटे को पढ़ाऊं ताकि वो भी अच्छे ऑफिस में बैठ कर सम्मान से कमाए। 300-500 रुपये रोज की कमाई के बीच बेटे को सीए बनाने की सोचना भी दिन में सपने देखने जैसा था। बेटे के जुनून ने मुझमें उम्मीदें जिंदा रखींण्। हमारे किराए के घर में सिर्फ एक कमरा है। बेटा देर रात तक पढ़ता था। हमारी नींद खराब ना हो इसलिए वो छत के ऊपर चला जाता था। वहां वह स्ट्रीट लाइट की रोशनी में स्टडी करता। आज उसे सीए बना देखकर मेरी जिंदगी की साधाना सफल हो गई है। वहीं नीलेश ने भी कहा कि भविष्य में वो अपने पिता के सारे अरमानों को पूरा करने का प्रयास करेगा और कोई मेरे जैसे गरीब लड़का अगर पढऩा चाहेगा तो उसकी भी हो मदद करेगा।