महाबली भीम आज भी करते है यहां के लोगों की रक्षा

नई दिल्ली: महाभारत के महाबली योद्धा भीम आज भी जोधपुर के लोगों की रक्षा करते हैं। पांडवों के वनवास से जुड़े कुछ तथ्य इसकी पुष्टि करते नजर आते हैं। बताया जाता है कि जोधपुर की पहाड़ियों में पांडवों ने अपना समय बिताया था। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध से पहले पांडवों ने चिड़ियानाथ की टूक में अपना समय बिताया था। यहाँ जनमानस में यह बात बरसों पहले से कही सुनी जा रही है। जोधपुर की स्थापना से पूर्व यहां संत चिड़ियानाथ का धूणा था।





जब जोधपुर का गढ़ बना और इस शहर की स्थापना हुई तो यहाँ बाहुबली भीम की बहुत विशालकाय और आकर्षक प्रतिमा स्थापित की गयी। जोधपुर की स्थापना के पूर्व यहा संतनाथ का धूड़ा था और पूर्वजों का कहना है कि इस पहाड़ी में वनवास के पहले पांडव रुके थे। भीम की उस विशाल प्रतिमा को देख कर ऐसा लगता है कि आज भी भीम उसी उत्साह के साथ शहर के रक्षक बन कर खड़े हैं। प्रतिमा में भीम पुराने शहर की तरफ मुंह किए खड़े है।

एक वैज्ञानिक शोध में यह भी पता चला है कि पहाड़ी रामायण कालखंड के समकालीन समय की है और ऐसे में कुछ ऐसे धारणाओं की पुष्टि भी हो जा रही है जिसे नकारा नहीं जा साकता। इन्हीं मान्यताओं के आधार पर ही इस पहाड़ी पर स्थित देवी के मंदिर के पास भीम की विशाल प्रतिमा स्थापित है। देवी के मंदिर के पुजारी बताते है कि यहां अक्सर विदेशी इस बात को जानने की जिज्ञासा लिए हुए आते भी हैं।

इस शहर स्थापना के समय से ही भीम को यहां शहर के रक्षक के रूप में देखा जाता है। रामायणकाल के समकालीन पहाड़ी के पत्थर से बनी एक विशाल पत्थर की लाठी यहां पड़ी है। मान्यता है कि यह भीम की लाठी है। इस पत्थर से बनी लाठी को उठाना किसी के वश की बात नहीं है।

आस्था सिंह की रिपोर्ट