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महिला सशक्तिकरण का जीता जागता उदाहरण बनी जुजाना केप्‍यूटोवा

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली। महिला सशक्तिकरण का जीता जागता उदाहरण जुजाना केप्‍यूटोवा है, पिछले दो दिनों से हर जगह सुर्खियों में हैं। इसके पीछे वजह बेहद खास है। दरअसल, जुजाना स्‍लोवाकिया की पहली महिला राष्‍ट्रपति या यूं कहिए कि पहली हैड ऑफ द स्‍टेट हैं। इसके साथ ही वह दुनिया भर की उन पहली महिला प्रधानमंत्री या राष्‍ट्रपतियों की सूची में शामिल हो गई हैं जिनमें इससे पहले भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पाकिस्‍तान की बेनेजीर भुट्टो, ब्रिटेन की मार्गरेट थैचर, श्रीलंका की सिरिमावो भंडारनायके, बांग्‍लादेश की खालिदा जिया समेत कई अन्‍य नाम शामिल हैं। आपको यहां पर ये भी बता दें कि इसाबेल पेरोन पहली ऐसी महिला थीं जो किसी देश की राष्‍ट्रपति बनीं थीं। 1974-76 तक वह अर्जेंटीना की 43वीं राष्‍ट्रपति थीं। इसी तरह से एशिया की बात करें तो पहली बार मारिया कोरिजोन फिलीपींस की 11वीं राष्‍ट्रपति बनीं थी।

आपको बता दें, जुजाना ने अपनी जीत के लिए अपने देशवासियों के साथ हंगरी, चेक, रोमा और रुथियान के लोगों को भी बधाई दी है। 45 साल की एरिन ब्रोकोविच (जुजाना) एक लिबरल लॉयर भी हैं। चुनाव के परिणाम आने के बाद जुजाना ने अपनी पहली स्‍पीच में कहा कि वह इस जीत से काफी खुश हैं और यहां तक का सफर काफी मुश्किलों भरा था। हाल के चुनाव में उन्‍हें करीब 59 फीसद मत हासिल हुए हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंदी सेफकोविक को करीब 52 फीसद मत हासिल हुए। उन्‍होंने अपनी हार स्‍वीकार करते हुए केप्‍यूटोवा को जीत की बधाई दी है।

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वहीं जुजाना एक भ्रष्टाचार-निरोध कैंपेनर के तौर पर जानी जाती हैं। उन्‍होंने ये कैंपेन अपने ही देश के एक पत्रकार की हत्‍या के बाद चलाया था। बता दें, पत्रकार जेन कुसियाक और उसकी महिला मित्र की हत्‍या 2018 के जनवरी में हुई थी। जुजाना ने इस हत्‍या के दोषियों को सजा दिलाने के लिए देशभर में ये कैंपेन शुरू किया था।

साथ ही उन्‍हें इसमें कामयाबी भी मिली और इस हत्‍या के अपराधी और वहां के स्‍थानीय बिजनेसमैन को न सिर्फ गिरफ्तार किया गया, बल्कि दोषी भी करार दिया गया। इस पूरे मामले और जुजाना के कैंपेन की बदौलत वहां के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको को अपने पद से इस्‍तीफा तक देना पड़ा था। यदि बात करें जुजाना के राजनीतिक सफर की तो वह पुराना नहीं है।

वहीं पत्रकार की हत्‍या के अपराधी को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए चलाई गई इस कैंपेन के दौरान ही जुजाना ने राजनीति में आने का मन बना लिया और सर्वोच्‍च पद पर पहुंचने का भी। वहीं, इस पूरी लड़ाई में उनके देश के लोगों ने भी उनका पूरा साथ दिया। एक इंटरव्‍यू में उन्‍होंने कहा था कि देशवासी भ्रष्‍टाचार से दुखी हैं और वह बदलाव चाहते हैं।

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