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CBI विवाद पर बोले जस्टिस सीकरी- ‘चाहता हूं मामला खत्म हो जाए’

Justice Ak Sikri Wants Controversy To Die On His Post Retirement Proposal

By रवि तिवारी 
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से रिटायरमेंट के बाद कॉमनवेल्थ सेक्रटरिएट ट्राइब्यूनल के सदस्य बनने के प्रस्ताव को ठुकराने वाले जस्टिस एके सीकरी ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा है। देश पूर्व प्रधान न्यायाधीश वाई के सभरवाल के जीवन आधारित पुस्तक के विमोचन समारोह के बाद जस्टिस सीकरी ने कहा, ‘मैं किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहता। मैं चाहता हूं कि यह विवाद यहीं खत्म हो जाए।’ इसके अलावा उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

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पूर्व चीफ जस्टिस वाईके सभरवाल के जीवन पर लिखी गई पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम से इतर सीकरी ने कहा, ‘देखिए मैं किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहता। मैं चाहता हूं कि यह खत्म होना चाहिए।’ इस पूरे मामले पर उन्होंने कोई और टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

गौरतलब है कि लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सेक्रेटेरिएट एट्रीब्यूशन ट्राइब्यूनल (सीएसएटी) में नियुक्ति को लेकर पिछले साल सरकार की ओर से पेशकश किए जाने पर रविवार को विवाद शुरू हो गया था। इसके तीन दिन पहले ही प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एक समिति ने आलोक वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटाने का फैसला किया था। उस समिति में जस्टिस सीकरी प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल थे।

जस्टिस सीकरी के वोट से वर्मा को पद से हटाने के फैसले में मदद मिली। जाहिरा तौर पर इस विवाद से आहत जस्टिस सीकरी ने सरकारी पेशकश पर अपनी सहमति वापस ले ली। गौरतलब है कि जस्टिस सीकरी, पीएम मोदी और मल्लिकर्जुन खड़गे के साथ उस तीन सदस्यीय पैनल में शामिल थे, जिसने सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को हटाने की मंजूरी दी थी। यह फैसला 2-1 से हुआ था और कांग्रेस लीडर मल्लिकार्जुन खड़गे इसके विरोध में थे।

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