करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी कूड़ा उठाने में नाकाम कंपनी पर इनकम टैक्स का छापा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की दस साल पुरानी कूड़ा निस्तारण योजना को राजधानी की वेंडर कंपनी ज्योति इन्वायरोटेक कम्पनी लिमिटेड पहले ही पलीता लगा चुकी है लेकिन सरकारी महकमे हैं जिनका इस कंपनी से मोहभंग नहीं हो रहा। फिलहाल एक बार फिर ज्योति इन्वायरोटेक कम्पनी लिमिटेड सुर्खियों में आ गई है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी नगर निगम के शिवरी स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट का संचालन कर पाने में विफल रही ज्योति इन्वायरोटेक कम्पनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक चरणजीत सिंह के चौक स्थित आवास पर आयकर विभाग की गाजियाबाद की टीम ने छापा मारा। गुरुवार को आयकर विभाग की टीम के सदस्यों ने न केवल कम्पनी के कागजात खंगाले बल्कि काफी देर पूछताछ भी की। इस टीम ने लखनऊ में अन्य कई कम्पनियों के मालिकान के यहां छापेमारी की।




इनकम टैक्स विभाग की टीम सुबह करीब 11 बजे चरणजीत सिंह के नींबू पार्क के सामने बने मकान पर पहुंची। उस वक्त चरणजीत इसी मकान में बने ऑफिस में कुछ साथियों के साथ हिसाब-किताब कर रहे थे। टीम ने पहुंचते ही मकान के आस-पास पुलिस तैनात करवा दी। ऑफिस में मौजूद लोगों के अलावा घर से किसी के जाने या निकलने पर रोक लगा दी गई। टीम ने यहां कई दस्तावेज अपनी कस्टडी में ले लिए। इसके साथ एमडी से पूछताछ शुरू कर दी गई। चरणजीत ने छापे पड़ने और टीम द्वारा दस्तावेज साथ ले जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।

ज्योती इंवायरोटेक अपने रसूख के बल पर कई वर्षों से नगर निगम के क्षेत्र के लगभग 50 वार्डों में कूड़ा उठाने का काम करती आ रही है। अनुबंध के अनुसार कूड़ा उठाने और मौजूदा वक़्त में कूड़ा उठाने में बड़ा फर्क देखने को मिला। जिसके चलते विभाग ने ज्योति को नोटिस भी जारी किया, लेकिन नोटिस को दरकिनार करते हुए संस्थान की ओर से आजतक कोई जवाब नहीं आया। बताते चलें कि नगर निगम के 11० वार्डों में से लगभग 5० वार्डों से ही ज्योति इन्वायरोटेक के द्बारा कूड़ा उठाया जा रहा हैं। जबकि इसे सभी वार्डों से यह कार्य करना था। प्रत्येक वार्ड से लगातार संस्थान के खिलाफ लगातार कार्य में कमियों को लेकर शिकायती पत्र मिल रहे हैं। लेकिन अधिकारी ज्योति के प्यार में बिलकुल अंधे बन कर बैठे हैं।




दरअसल नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की ओर से वार्डों में सफाई की जाती है लेकिन कर्मचारियों के वार्डों में न पहुंचने तथा अन्य कारणों से विभाग को प्राइवेट संस्थान को इसका जिम्मा देना पड़ा। कंपनी की ओर से टेण्डर के माध्यम से पिछले कई वर्षों पहले दुबग्गा में कूड़ा डंप करने के लिए डंपिंग स्टेशन बनाया गया, जिसकी देख-रेख उक्त कंपनी को करनी थी लेकिन हैरानी की बात यह है कि डंपिंग स्टेशन खुलने के बाद कई वर्षों तक चालू ही नहीं हो सका। शिवरी प्लांट न चलने की वजह संसाधनों की कमी बताई गई, जिसके बाद विभाग की ओर से कंपनी को टिपिंग फीस भी सैंक्शन की गई, लेकिन शहर में सभी निर्धारित जोनों में कूड़े की स्थिति जस की तस बनी रही। घरों से कूड़ा बटोरने का कार्य भी उक्त कंपनी के माध्यम से ही किया जाता है, लेकिन घरों से कूड़ा उठाने का कार्य आठ जोनों में नहीं हो पाया। ढेरों शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाई नहीं हुई।




जानकारों की मानें तो कूड़ा निस्तारण प्लांट चलाने के लिए प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से एनओसी लेनी पड़ती है। ज्योति इन्वायरोटेक का रवैया कुछ ऐसा है कि अभी तक कंपनी ने कोर्ई एनओसी नहीं ली है। प्लांट का कार्य 2012 से ऐसे ही चल रहा है। यह हाल तब है जब कंपनी लगभग 100 करोड़ रुपए प्लांट के संचालन के लिए ले चुकी है। इस योजना की सरकारी निगरानी कर रही एजेंसी सीएंडडीएस भी इस योजना को लेकर अब तक विवादों में ही घिरी रही है। उत्तर प्रदेश में इस योजना को लागू करने के लिए करीब 500 करोड़ का राजस्व खर्च किया जा चुका है, लेकिन पूरे उत्तर प्रदेश में एक भी कूडा निस्तारण परियोजना ऐसी नहीं खड़ी हो सकी जिसे माॅडल मानकर नई परियोजनाओं को सफल बनाया जा सकता।