ये है भारत का ‘मंकी मैन’, बिना सहारे दीवारों और चट्टानों पर चढ़ना है इसका शौक

ये है भारत का 'मंकी मैन', बिना सहारे दीवारों और चट्टानों पर चढ़ना है इसका शौक

मंकी यानी बंदर हमारे पूर्वज हैं, यह बात को वैज्ञानिकों ने अपनी सालों की शोध के बात साबित किया। लेकिन भारत में एक इंसान ऐसा है जिसके कारनामों को देखने के बाद वैज्ञानिक शोध के अध्ययन के बिना ही आपको विश्वास हो जाएगा कि इंसान के डीएनए में बंदरों के गुण अभी तक छिपे हुए हैं। जिन्हें कोशिश करके बाहर लाया जा सकता है।

हम बात कर रहे हैं कर्नाटक के चित्रदुर्ग में रहने वाले ज्योति राज की जिन्हें ‘मंकी मैन’ और ‘मंकी ज्योती’ जैसे नामों से पहचाना जाता है। चित्रदुर्ग में घूमने आने वाले लोग ज्योति राज के कारनामों को अपने कैमरों में कैद करके ले जाते हैं। ज्योति राज जिस तरह से बिना किसी सहारे के चित्रदुर्ग किले की दीवारों पर बिना किसी सहारे के चढ़तें हैं, उसे देखकर सैलानियों के मुंह खुले के खुले रह जाते हैं।

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दीवार पर उल्टे लटकते ज्योति राज

ज्योति राज को देसी स्पाइडर मैन भी कहा जाता है। वह चित्रदुर्ग के अलावा भी अलग-अलग एतिहासिक इमारतों की दीवारों पर चढ़ने का कारनामा कर चुके हैं। वह मूरसावीर मठ में बने एति​हासिक घंटाघर पर भी चढ़ाई कर चुके हैं। इसके अलावा ज्योति कर्नाटक के सबसे ऊंचे वॉटर फॉल ‘जोग फॉल’ पर भी बहाव के विरुद्ध चढ़ाई कर चुके हैं।

जोग फॉल दुनिया में 131वां स्थान रखता है। जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 830 फीट मापी गई है। ज्योति राज इस वॉटर फॉल की फिसलन वाली चट्टानों पर बिना किसी सुरक्षा और सहारे के चढ़ाई कर चुके हैं। इसी शब्दों में कहा जाए तो ज्योति राज सीधे तौर पर मौत से पंजा लड़ा चुके हैं। अपने इस हुनर के बल पर ज्योति राज कर्नाटक में मशहूर हो चुके हैं। अब वह कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री में अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी कर रहे हैं।

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ज्योति की एक बात और उन्हें खास बनाती है वह है उनका दीवार पर चढ़ने के बाद उतरने का अंदाज। ज्योति किसी बंदर की तरह ही चट्टानों और दीवारों से उतरते भी हैं। इस दौरान वह दर्शकों को रोमांचित करने के लिए अलग अलग तरह से कलाबाजियां भी करते हैं। कभी वह अपने पैरों के सहारे लटक जाते हैं तो कभी एक हाथ के सहारे 360 डिग्री पर एक ही जगह घूम जाते हैं।

ज्योति जिस अंदाज में दीवारों की ऊंचाई नापते हैं, उसे देखकर कोई भी उन्हें बंदर कह सकता है। वह कई फीट की ऊंचाई पर किसी बंदर की तरह ही खुद को एक हाथ के सहारे हवा में लटका लेते हैं तो अगले पल ही दीवार के एक किनारे से दूसरे किनारे पर पहुंच जाते हैं। सबसे मजेदार बात तो यह है कि उन्हें ऐसा करते समय बिलकुल भी डर नहीं लगता। वह चित्रदुर्ग किले के आस पास रहने वाले बंदरों को ही अपना मार्गदर्शक भी मानते हैं। जिन्हें बचपन से देखते रहने के बाद उन्होंने दीवारों पर चढ़ना सीखा। हालांकि अपने इस हुनर को पाने के बाद ज्योति राज कई बार गंभीर रूप से चोटिल हुए हैं। अपने ऊपर बनी एक शार्ट फिल्म में ज्योति राज बताते हैं कि उनके शरीर में चार रॉड पड़ चुके हैं, लेकिन वह इन चोटों से अपने जोश को कम नहीं होने देते।

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