कैराना उपचुनाव: मैदान में 13 महारथी, लेकिन BJP-महागठबंधन में रोमांचक मुकाबला

लखनऊ। कैराना लोकसभा सीट को लेकर प्रदेश ही नहीं, ब्लकि पूरे देश की निगाहें टिकी हुई है। कल यहां पर सुबह सात बजे से मतदान होगा। इसमें मुख्य रूप से भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह व राष्ट्रीय लोकदल की तबस्सुम हसन समेत कुल 13 प्रत्याशी ही चुनाव मैदान में रह गए हैं। दरअसल, नामांकन पत्र की जांच व वापसी के बाद कुल 14 उम्मीदवार मैदान में थे। हाल में हसन परिवार में समझौता होने के बाद लोकदल से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी कंवर हसन पार्टी से बागी होकर रालोद के खेमे में चले गए।

Kairana Byelection 2018 Combating Collision Between Mriganka Singh And Tabassum Hasan :

जातीय समीकरण साधने की कोशिश हो रही है। मुस्लिम गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में लामबंद हो रहा है तो जाट बहुल गांवों में गठबंधन और भाजपा में होड़ लगी है। भाजपा दलितों मतों में सेंध लगाने की कोशिश जरूर कर रही है, लेकिन दलित खामोश है। बसपा गठबंधन का हिस्सा है, अब भीम आर्मी का समर्थन गठबंधन प्रत्याशी को है। ऐसे में भाजपा की मुश्किलें जरूर बढ़ी हैं।  जिस पक्ष का मतदाता अधिक बूथ तक पहुंचेगा उसी सिर जीत का ताज सजेगा…

कैराना उपचुनाव: मैदान में 13 महारथी, लेकिन BJP-महागठबंधन में रोमांचक मुकाबला
कैराना उपचुनाव: मैदान में 13 महारथी, लेकिन BJP-महागठबंधन में रोमांचक मुकाबला

बीजेपी ने दिवंगत सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को बनाया है उम्मीदवार

कंवर हसन के चुनाव से हटने से बीजेपी उम्मीदवार मृगांका सिंह के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। कंवर हसन के चुनाव लड़ने से मुस्लिम वोटों के बंटने के चांस थे। लेकिन अब उनके बैठ जाने से बीजेपी उम्मीदवार की राह थोड़ी मुश्किल हो गई है। आपको बता दें कि कैराना सीट बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के निधन से खाली हुई है। साल 2014 में हुकुम सिंह करीब ढाई लाख वोटों से जीते थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में कैराना की 5 सीटों पर बीजेपी का वोट करीब 24 प्रतिशत कम हो गया। 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कैराना में जीत हासिल की थी।

कैराना उपचुनाव: मैदान में 13 महारथी, लेकिन BJP-महागठबंधन में रोमांचक मुकाबला
कैराना उपचुनाव: मैदान में 13 महारथी, लेकिन BJP-महागठबंधन में रोमांचक मुकाबला

तबस्सुम हसन के खिलाफ सपा, बसपा और कांग्रेस का कोई उम्मीदवार नहीं

आरएलडी उम्मीदवार तबस्सुम हसन के खिलाफ सपा, बसपा और कांग्रेस ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है, लेकिन उनकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा उनके ही देवर कंवर हसन बने हुए थे। लेकिन अब परिवार में समझौता होने के बाद कंवर हसन ने उन्हें समर्थन देने का फैसला किया है। तबस्सुम हसन और कंवर हसन के बीच समझौता कराने में सबसे बड़ी भूमिका कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने अदा की है। हालांकि तबस्सुम हसन के परिवार और इमरान मसूद की बीच रिश्ते अच्छे नहीं थे, लेकिन तीन दिन पहले सपा नेता बलराम यादव की मौजूदगी में दोनों परिवारों के बीच सुलह समझौता हुआ। इसके बाद से ही इमरान कंवर हसन को मैदान से हटाने में लगे थे।

लखनऊ। कैराना लोकसभा सीट को लेकर प्रदेश ही नहीं, ब्लकि पूरे देश की निगाहें टिकी हुई है। कल यहां पर सुबह सात बजे से मतदान होगा। इसमें मुख्य रूप से भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह व राष्ट्रीय लोकदल की तबस्सुम हसन समेत कुल 13 प्रत्याशी ही चुनाव मैदान में रह गए हैं। दरअसल, नामांकन पत्र की जांच व वापसी के बाद कुल 14 उम्मीदवार मैदान में थे। हाल में हसन परिवार में समझौता होने के बाद लोकदल से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी कंवर हसन पार्टी से बागी होकर रालोद के खेमे में चले गए। जातीय समीकरण साधने की कोशिश हो रही है। मुस्लिम गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में लामबंद हो रहा है तो जाट बहुल गांवों में गठबंधन और भाजपा में होड़ लगी है। भाजपा दलितों मतों में सेंध लगाने की कोशिश जरूर कर रही है, लेकिन दलित खामोश है। बसपा गठबंधन का हिस्सा है, अब भीम आर्मी का समर्थन गठबंधन प्रत्याशी को है। ऐसे में भाजपा की मुश्किलें जरूर बढ़ी हैं।  जिस पक्ष का मतदाता अधिक बूथ तक पहुंचेगा उसी सिर जीत का ताज सजेगा... [caption id="attachment_291974" align="aligncenter" width="704"]कैराना उपचुनाव: मैदान में 13 महारथी, लेकिन BJP-महागठबंधन में रोमांचक मुकाबला कैराना उपचुनाव: मैदान में 13 महारथी, लेकिन BJP-महागठबंधन में रोमांचक मुकाबला[/caption]

बीजेपी ने दिवंगत सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को बनाया है उम्मीदवार

कंवर हसन के चुनाव से हटने से बीजेपी उम्मीदवार मृगांका सिंह के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। कंवर हसन के चुनाव लड़ने से मुस्लिम वोटों के बंटने के चांस थे। लेकिन अब उनके बैठ जाने से बीजेपी उम्मीदवार की राह थोड़ी मुश्किल हो गई है। आपको बता दें कि कैराना सीट बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के निधन से खाली हुई है। साल 2014 में हुकुम सिंह करीब ढाई लाख वोटों से जीते थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में कैराना की 5 सीटों पर बीजेपी का वोट करीब 24 प्रतिशत कम हो गया। 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कैराना में जीत हासिल की थी। [caption id="attachment_291975" align="aligncenter" width="710"]कैराना उपचुनाव: मैदान में 13 महारथी, लेकिन BJP-महागठबंधन में रोमांचक मुकाबला कैराना उपचुनाव: मैदान में 13 महारथी, लेकिन BJP-महागठबंधन में रोमांचक मुकाबला[/caption]

तबस्सुम हसन के खिलाफ सपा, बसपा और कांग्रेस का कोई उम्मीदवार नहीं

आरएलडी उम्मीदवार तबस्सुम हसन के खिलाफ सपा, बसपा और कांग्रेस ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है, लेकिन उनकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा उनके ही देवर कंवर हसन बने हुए थे। लेकिन अब परिवार में समझौता होने के बाद कंवर हसन ने उन्हें समर्थन देने का फैसला किया है। तबस्सुम हसन और कंवर हसन के बीच समझौता कराने में सबसे बड़ी भूमिका कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने अदा की है। हालांकि तबस्सुम हसन के परिवार और इमरान मसूद की बीच रिश्ते अच्छे नहीं थे, लेकिन तीन दिन पहले सपा नेता बलराम यादव की मौजूदगी में दोनों परिवारों के बीच सुलह समझौता हुआ। इसके बाद से ही इमरान कंवर हसन को मैदान से हटाने में लगे थे।