शंकराचार्य बनने के बाद हत्या के आरोप में घिरने के बाद जेल जाने वाले धर्मगुरू जयेन्द्र सरस्वती का बुधवार को निधन हो गया। शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती के बाद उनका उत्तराधिकार हत्या के मामले में सह आरोपी रहे उनके शिष्य विजयेन्द्र सरस्वती को मिलेगा। दक्षिण भारत की प्रसिद्ध कांची कामकोटि पीठ के प्रमुख शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती 83 वर्ष के थे। वह कांची पीठ के 69वें प्रमुख थे। उन्हें श्वसन तंत्र संबन्धी बीमारी के चलते कांचीपुरम के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को गुरूवार को नन्दनवनम् में महासमाधि दी जाएगी।

Kanchi Seer Shankaracharya Jayendra Saraswathi No More Cremation Will Be Held Tomorrow :

उन्होंने शंकराचार्य के रूप में धर्म के प्रसार और धर्मागत अनुशासन को विशेष महत्व दिया। दक्षिण भारत में कांची पीठ की मान्यता पूरी दुनिया में बसे भारतीयों के बीच है, और शंकराचार्य जयेन्द्र के अनुयायी भी पूरी दुनिया में मौजूद हैं।

स्वामी जयेन्द्र की बात की जाए तो वह धार्मिक रूढ़िवादिता के विरोधी थे। उन्होंने अपने अनुयायियों के बीच धार्मिक मान्यताओं को विज्ञान से जोड़कर प्रसारित किया। एक धर्मगुरू के रूप में उनकी यह सोच उन्हें अन्य धर्मगुरूओं से अलग खड़ा करती थी।

हत्या के आरोपों से बरी हुए थे जयेन्द्र सरस्वती —

11 नवंबर 2004 को तमिनाडु पुलिस द्वारा वरदराजपेरूमल मंदिर के प्रबंधक ए. शंकर रमण की हत्या के मामले में जयेन्द्र सरस्वती को गिरफ्तार किया गया था। शंकराचार्य जयेन्द्र और विजयेन्द्र समेंत 24 लोंगो पर रमण की हत्या और मंदिर के कोष में वित्तीय गड़बड़ी करने के आरोप लगे थे। इस मामले में उन्हें एक महीने तक जेल में रहना पड़ा था।एक महीने बाद मद्रास हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी और फिर यह मामला तमिलनाडु से हटाकर कर पुडुचेरी की अदालत में स्थानां​तरित किया गया था। जहां से साल 2013 में इस मामले में आरोपी बनाए गए सभी 24 आरोपियों को बरी कर दिया गया था।