75 वर्ष पहले खेली गई थी होली आज भी उड़ रहा है रंग

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में होली के बाद अनुराधा नक्षत्र में बड़ी ही धूमधाम से खेलते हैं। अंग्रेजी हुकूमत में कानपुर के हटिया बाजार में फहराए गए तिरंगे की घटना के 75 वर्ष बाद आज भी उसी दिन और नक्षत्र को यहां के निवासी बड़ी घूम-धाम से होली खेलते हैँ जो कि गंगा मेला नाम से पूरे देश और विदेश में भी प्रचलित है। कानपुर में लोग होली के त्योहार के दिन रंग खेले न खेले लेकिन अनुराधा नक्षत्र के दिन होली जरूर खेलते हैं। इसके पीछे एक तर्क है जो आजादी के पहले से चला आ रहा है।




स्वतंत्रता से पूर्व होली वाले दिन स्वतंत्रता के दीवानो ने हटिया पार्क मे तिरंगा फहराकर देश की आजादी की घोषणा कर दी थी। अंग्रेजी शासन को चुनौती देने वाले इस कार्य ने प्रशासन को बौखला दिया कानपुर के हटिया मे उस समय आजादी के दीवानो का गढ़ हुआ करता था। उस समय हटिया मे बर्तन, लोहा, कपड़ा, आदि का व्यापार होता था। व्यापारियो के यहाँ आजादी के दीवाने व क्रांतिकारी ड़ेरा जमाते व आंदोलन की रणनीति बनाते थे।

वही पर ‘झंडा ऊँचा रहे हमारा विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ के रचयिता श्यामलाल गुप्ता ने जनजीवन पुस्तकालय की स्थापना की थी। पुस्तकालय व हटिया पार्क क्रांतिकारियो के लिये अड्ड़ा बन चुका था। एक दिन अंग्रेज पुलिस ने हटिया को चारो तरफ से घेर लिया और क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर जेल मे डाल दिया गया। स्वतंत्रता के दीबानो की गिरफ्तारी से शहर के लोग भड़क उठे लोगो ने होली न मनाकर एक आंदोलन छेड़ दिया।




जिससे घबराकर अंग्रेज अधिकारियो को स्वतंत्रता सेनानियो को छोड़ना पड़ा। सेनानियो की रिहाई जिस दिन हुई थी उस दिन अनुराधा नक्षत्र था। होली के बाद अनुराधा नक्षत्र के दिन उनके लिये उत्सव का दिन हो गया। और जेल के बाहर भारी संख्या मे जुड़े लोगो ने खुशी मनाई। उसी दिन हटिया से रंग से भरा ठेला निकाला गया लोगो ने जमकर रंग खेला जाता है।

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