हजार-पांच सौ के नोट क्या बंद हुए शौकीन लोगों ने शराब की दुकानों से मुंह ही मोड़ लिया

कानपुर: हजार-पांच सौ के नोट क्या बंद हुए शौकीन लोगों ने शराब की दुकानों से मुंह ही मोड़ लिया। सूरज ढलने के बाद शराब की दुकानों पर नशे के शौकीन लोगों की भीड़ व लाइनें दिखनी कम हो गई हैं। अब दुकानों पर इक्का दुक्का ग्राहक ही आ रहा है। जिले का आबकारी विभाग भी परेशान है, क्योंकि उसके राजस्व में भी भारी गिरावट हो रही है। जिला आबकारी अधिकारी देवराज सिंह ने सोमवार को बताया कि नौ नवम्बर से शराब की बिक्री में करीब चालीस फीसदी की कमी है। आम दिनों में कानपुर शहर में रोज करीब 21 हजार बोतल अंग्रेजी शराब, 40 हजार बोतल बियर तथा करीब 35 हजार लीटर देशी शराब की बिक्री होती थी। इस तरह हम प्रति महीने औसतन करीब सात लाख बोतल अंग्रेजी शराब, करीब 12 लाख बोतल बियर और करीब 15 लाख लीटर देशी शराब की बिक्री करते थे।




यह आंकड़े किसी महीने कम हो जाते थे तो किसी त्योहार या शादी आदि के सीजन में बढ़ जाते थे। उन्होंने बताया कि जबसे पुराने नोटों पर रोक लगी है तब से शराब की दुकानों पर सन्नाटा छाया हुआ है और शराब की बिक्री में करीब 40 प्रतिशत कमी आई है। जब शराब की बिक्री कम होगी तो सरकार को राजस्व भी कम मिलेगा, इससे आबकारी विभाग को राजस्व की काफी हानि सहनी पड़ेगी। शराब के डीलर धम्रेन्द्र जायसवाल के अनुसार आजकल शादियों का सीजन है और इस सीजन में लोग शराब ज्यादा खरीदते थे, लेकिन इस नए नोट के चक्कर में शराब का कोई बड़ा आर्डर ही नहीं मिल रहा है, जहां लोग शादी में 20 से 25 बोतल शराब ले जाते थे वहां अब दो से तीन बोतल में ही काम चला रहे हैं।



इससे शराब व्यापारियों को तो भारी नुकसान हो ही रहा है, क्योंकि उन्होंने शादियों के सीजन को ध्यान में रखते हुए भारी मात्रा में शराब का स्टाक दुकानों में लगा लिया था, लेकिन अब बिक्री बहुत ही कम हो गई है। वह कहते है कि जब बिक्री ही नहीं होगी तो सरकार को राजस्व कहां से मिलेगा। एक शराब प्रेमी के अनुसार इस समय सारा ध्यान पुराने नोटों को बदलवाने में लगा हुआ है और जो चार हजार रपए मिल रहे हैं उनसे घर का खर्च चलाना ही मुश्किल हो रहा है तो फिर अपना शौक पूरा करने के लिए शराब कहां से पिएं।