पीड़ित ने रिश्वतखोर दरोगा की जेब से निकाले 40 हजार, मचा हड़कंप

कानपुर: कानपुर के एक वाकये के बाद यूपी पुलिस के उन रिश्वतखोर अधिकारियों को अब सतर्क हो जाना होगा जो रिश्वत खाकर भी काम नहीं करते हैं। कानपुर में एक पीड़ित ने पुलिस थाने में घुसकर रिश्वतखोर दरोगा की जेब से अपने चालीस हजार रूपये निकाल लिये और मोबाईल कैमरे से इसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। अब पुलिस महकमा अपनी छवि बचाने के लिये डैमेज कंट्रोल में जुटा है।

यूपी के डीजीपी जावीद अहमद जनता का भरोसा जीतने के लिये अपने उपर टेस्ट बुलेट चलवा रहे हैं तो उनके मातहत पुलिसकर्मी इमेज की छीछालेदर करने में जुटे हैं। एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक पीड़ित व्यक्ति कानपुर के कल्याणपुर थाने में घुसकर एक दरोगा पर हजारों की रिश्वत लेकर भी काम करने का आरोप लगा रहा है। जब दरोगा सूर्य प्रताप सिंह ने आरोप से इनकार किया तो पीड़ित कमल कुमार ने थाने के तमाम पुलिसकर्मियों के सामने दरोगा की जेब में हाथा डालकर रूपयों की मोटी गड्डी बाहर खींच ली। इस आपाधापी में हजारों के नोट हवा में उड़ते हुए फर्श पर बिखर गये।

रिश्वत की यॅू रिकवरी का लाईव वीडियो थाने पर मौजूद जनता ने अपने मोबाईल कैम पर शूट कर लिया। कमल कुमार चिल्ला चिल्ला कर पुलिस पर घूस का पैसा खाने के बावजूद काम न करने का आरोप लगाता रहा और सारी पुलिस बेशर्मी से इस नाटकीय घटनाक्रम को देखती रही। चॅूकि रिश्वत कर रकम थाने में सबके सामने दरोगा की जेब से बरामद हुई थी। तमाम क्षेत्रीय नागरिक इस वाकये को अपने मोबाईल कैमरे में कैद कर रहे थे इसलिये खाकी वर्दी वाले चाहकर भी कमल को रोक नहीं सके। अगर वहां कैमरे न होते- जनता जनार्दन न होती तो शायद कमल कुमार को यॅू दरोगा की जेब मे हाथ डालने की जुर्रत की वो सजा मिलता जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

अब जरा पूरा मामला समझते हैं। इन्द्रा नगर के रहने वाले कमल कुमार के मकान पर एक दबंग ने कब्जा कर रखा था। पिछली मई माह में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कानपुर पुलिस को आदेश दिया कि वो मकान का कब्जा वापस कमल कुमार को दिलाये। पुलिस ने अदालत के आदेश का अनुपालन करने के लिये चालीस हजार की रिश्वत माॅगी जो उसने कल दरोगा सूर्य प्रताप सिंह को दे दी। इसके बावजूद आज जब दरोगा ने उन्हें कब्जा दिलाने में अनाकानी की तो पीड़ित कमल ने थाने में हंगामा खड़ा कर दिया और सबके सामने दरोगा की जेब से अपने चालीस हजार बरामद करके पुलिस की कार्यशैली को बेनकाब कर दिया।

हंगामे के दौरान कल्याणपुर थाने के एसएचओ भी वहां पहुंचे और उन्होने कमल को बन्द कमरे में बातचीत का न्यौता दिया लेकिन कमल ने मीडिया के सामने वार्ता करने की शर्त रखी जिसे एसएचओ ने ठुकरा दिया। कमल की दिलेरी ने जहां एक ओर रिश्वतखोर दरोगा को बेनकाब कर दिया है वहीं यह भी साबित कर दिया है कि हाई कोर्ट के आदेशों का अनुपालन भी पुलिस मुफ्त में नहीं करती है।