कानपुर पुलिस की नई रिक्शा एम्बुलेंस सेवा, देखें वीडियो

कानपुर: बीते दिनों कानपुर के हैलट अस्पताल में पिता को स्ट्रेचर नहीं मिलने के कारण अपने बेटे को कन्धे पर लादकर ले जाने वाली तस्वीरे शायद आप भूल नहीं पाए होंगे जिसपर जिलाधिकारी ने जांच भी बैठाई थी और कई कर्मचारी और डॉक्टर निलंबित भी हुए थे लेकिन उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा सुधरने का नाम नहीं ले रहा। स्वास्थ्य विभाग के नियम क़ानून की धज्जियाँ उड़ाती तस्वीरे एक बार फिर कानपुर में देखने को मिली। जहाँ एक लावारिस महिला के शव को जिला अस्पताल से पोस्टमार्टम हाउस तक जाने के लिए गाडी तक नहीं मिली जबकि ये नियम में है। लावारिस महिला के शव को जिला अस्पताल के डॉक्टर्स ने होमगार्ड के साथ रिक्शे से पोस्टमार्टम भेज दिया।





कानपुर में चिकित्सा विभाग अच्छी और बेहतर सुविधाओ के भले लाख दावे करता हो लेकिन हकीकत का अंदाजा तो यह तस्वीरें देख कर आप खुद लगा सकते है। इन तस्वीरो में आप देख सकते है कि रिक्शा ठेले से शव को कानपुर के सरकारी जिला अस्पताल उर्सला से पोस्टमार्टम हॉउस ले जाया जा रहा है। दरसल इस अज्ञात महिला को किसी ने बीती 13 तारिख को उर्सला में भर्ती कराया था। कल उसकी मौत के बाद उसके शव को पोस्टमार्टम भेजना था लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उसके लिए न तो एबुलेंस का इन्तजाम किया न ही शव वाहन का। जो होमगार्ड महिला के शव को पोस्टमार्टम ले गया था उसका कहना है की डॉक्टर ने उससे खुद कहा की अस्पताल के बाहर संतोष नाम का रिक्शे वाला है वो शव को पोस्टमार्टम ले जायगा ।

वहीँ जब इस सम्बन्ध में कानपुर के सीएमओ आरपी यादव से बात की गयी तो उन्होंने कहा की शासनादेश आया हुआ है और सरकार ने व्यवस्था भी की है कि जिनकी भी मृत्यु अस्पताल में होगी तो उनका शव शववाहन से जायेगा। इसके लिए जिला अस्पताल को एक शव वाहन मिल भी चुका है। इसके अतिरिक्त शहर में जितने भी शव वाहन है चाहे वो निजी हो या किसी एनजीओ के द्वारा संचालित है उन सभी के गाड़ी नम्बर और मोबाइल नम्बर संकलित करके जिला अस्पताल की दीवार पर पेंट करा दिया है। कल के मामले पर उन्होंने कहा कि इन्ही सब मामलो को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। यह बहुत सेंसिटिव मैटर है। लोगो को अभी इस बारे में ज्यादा जानकारी नही हुई है इसके प्रचार के लिए हम जन सुचना विभाग का भी सहारा लेंगे । और पुलिस को भी इस बात की जानकारी हो जाये की शव वाहन उलब्ध है उसको किसी भी रूप में किसी अन्य वाहन से या ऐसे अशोभनीय तरीके से न ले जाया जाए जिससे की किसी व्यक्ति का अपमान हो।




रिक्शा चालक संतोष जब जिला अस्पताल उर्शला से महिला के शव को ले जा रहा था तो रास्ते में परेड चौकी, थाना बजरिया,कोहना चौकी, थाना स्वरुप नगर पड़े लेकिन किसी अधिकारी ने देखने वा पूछने की जहमत नहीं उठाई अगर देखा भी होगा तो उन्होंने मुह फेर लिया होगा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि प्रदेश सरकार डंका पिटती है कि जिला अस्पतालों में सुविधाये मुहैय्या है लेकिन इन तस्वीरो को देखकर लगता है कि सब कुछ कागजों पर है आम जनता के लिए कुछ नहीं ?