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कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय पाठक की याचिका पर हाईकोर्ट ने 10 नवंबर तक सुरक्षित रखा फैसला

कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक (Prof Vinay  Pathak) कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक (Prof Vinay  Pathak) के खिलाफ बीते दिनों लखनऊ के इंदिरा नगर थाने में IPC के सेक्शन 342, 386, 504 और 506 में FIR दर्ज हुई थी।

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ। कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक (Prof Vinay  Pathak) कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक (Prof Vinay  Pathak) के खिलाफ बीते दिनों लखनऊ के इंदिरा नगर थाने में IPC के सेक्शन 342, 386, 504 और 506 में FIR दर्ज हुई थी।

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AKTU के पूर्व कुलपति और वर्तमान में कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक के खिलाफ लखनऊ के इंदिरानगर थाने में निजी कंपनी के एमडी ने बिल पास कराने के नाम पर जबरन वसूली करने,धमकी और गाली गलौज करने का आरोप लगाते हुए कुलपति समेत 2 लोगों को नामजद किया गया था। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 10 नवंबर तक मामला सुरक्षित रख लिया है।

मामला प्रो. विनय पाठक (Prof Vinay  Pathak) के आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार ग्रहण करने के दौरान का है। डिजिटेक्स टेक्नाेलाजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर डेविड मारियो डेनिस ने प्रो. विनय पाठक के अलावा XLICT कंपनी के मालिक अजय मिश्रा को भी नामजद किया है। जिनकी देर रात STF ने गिरफ्तारी कर ली है। उन्हें जेल भी भेज दिया गया है।

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यह है पूरा मामला

FIR के मुताबिक डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में कुलपति रहते हुए प्रो.  विनय पाठक ने वादी से 15% कमिशन वसूले थे। निजी कंपनी का ऑफिस लखनऊ के रंजनीगंधा अपार्टमेंट गोखले मार्ग पर है। कंपनी ने साल 2014-15 से डा.भीमराव अंबेडकर आगरा विश्वविद्यालय में प्री और पोस्ट एग्जाम से जुड़ा काम कर रही थी।

इस बीच साल 2020-21 में UPLC के माध्यम से प्री-पोस्ट एग्जाम से संबंधित काम भी किया। कंपनी के बिल का भुगतान आगरा विश्वविद्यालय में लंबित था। आरोप है कि तब प्रो. विनय पाठक कुलपति थे। इस दौरान वादी ने बिल का भुगतान करने को कहा तो पाठक ने कानपुर विश्वविद्यालय स्थित आवास पर बुलाया। इसके बाद कहा कि बिलों के भुगतान में 15% कमीशन देना होगा।

जब वादी ने असमर्थता जताई तो अपशब्द कहे और आगरा यूनिवर्सिटी से कंपनी का काम हटवा देने की धमकी दी। परेशान होकर वादी ने कमीशन देने के लिए हामी भरी। इस पर पाठक ने अजय मिश्रा से फोन पर बात कराई और भुगतान होते ही कमीशन पहुंचाने को कहा। बिल पास होने पर वादी ने अजय मिश्रा से संपर्क किया और उनके खुर्रम नगर स्थित आवास पर जाकर कमीशन के 30 लाख रुपये दे दिए।

इस पर अजय ने तीन लाख रुपए कम होने की बात कही और घर में बंधक बना लिया। किसी तरह वादी वहां से निकला और तीन लाख रुपए की व्यवस्था कर अजय को दे दिए। आरोप है कि इसी तरह अलग-अलग बिलों को पास करने के नाम पर आरोपित पीड़ित से रुपए वसूलते रहे। वादी का कहना है कि अजय मिश्रा ने इंटरनेशनल बिजनेस फार्म्स अलवर राजस्थान के खाते में करीब 73 लाख रुपये ट्रांसफर भी करवाएं।

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FIR के मुताबिक, साल 2022-23 का काम देने के नाम पर वादी से कमीशन मांगा गया। पर मना करने पर प्रो.  विनय पाठक ने UPDESCO के माध्यम से अजय मिश्रा की कंपनी को काम दिलवा दिया। वादी ने कुल एक करोड़ 41 लाख रुपए कमीशन दिए जाने का आरोप लगाया है। वादी ने जान का खतरा होने और कुछ भी दुर्घटना होने पर विनय पाठक को जिम्मेदार ठहराया है।

STF को सौंपी गई विवेचना

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण की जांच STF को सौंपी गई है। प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के सेक्शन 7 के तहत FIR दर्ज हुई है। एसीपी गाजीपुर विजय राज सिंह के मुताबिक STF मामले की विवेचना कर रही है।

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