केदारनाथ आपदा: छह साल पुरानी भीषण त्रासदी को याद कर सिहर उठते हैं लोग

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केदारनाथ आपदा: छह साल पुरानी भीषण त्रासदी को याद कर सिहर उठते हैं लोग

नई दिल्ली। आज के छह साल पहले उत्तराखंड के केदारनाथ में आई प्राकृतिक आपदा ने करीब 5000 जानें ले ली थीं। आज इस आपदा को पूरे छह साल पूरे हो चुके हैं। इस प्रलयकारी आपदा को याद कर आज भी स्थानीय लोग सिहर उठते हैं। इस आपदा के बाद तत्कालीन केंद्र की कांग्रेस सरकार और राज्य सरकार ने युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य का अभियान चलाया था। इस आपदा के बाद हजारों लोगों के रोजगार और आशियाने छिन गए थे। केंद्र और राज्य सरकार के अथक प्रयास के बाद एक बार फिर केदारनाथ धाम की रौनक लौट आई है।

Kedarnath Tragedy Sixth Death Day Uttarakhand :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के फिर से निर्माण और वहां चल रहे कामकाज में बहुत रुचि ली। इस वजह से भी वहां काम तेजी से हो सका। रामबाड़ा से नया पैदल मार्ग तैयार किया गया। जिससे धाम की दूरी दो किमी बढ़ गई। इसके अलावा एमआई 17 हेलीपैड का निर्माणए हेलीपैड से मंदिर तक रास्ते का निर्माण के साथ ही मंदिर के चारों ओर थ्री डी सुरक्षा दीवार का निर्माण किया गया।

इस भीषण आपदा के अगले साल तो वहां कोई नहीं जा सका। दूसरे साल सांकेत‍िक रूप से यात्रा शुरू की गई। साल 2016 में केदारनाथ यात्रा पूरी तरह से शुरू हुई थी। आपदा के तीन साल बाद 2016 में केदारनाथ में कई ऐसे घर थे जो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त पड़े थे। केदारनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले हैं और त्रासदी की बरसी के दिन भी हजारों लोग दर्शन के लिए पहुंचे थे।

कुछ ऐसा था मंजर

16 जून 2013 का वो दिन जब इस त्रासदी ने हजारों लोगों को निगल लिया और सैकड़ों लोग लापता हो गए। वहीं भीषण बाढ़ में 11,091 से ज्यादा मवेशी बह गए। ग्रामीणों की 1,309 हेक्टेयर भूमि बाढ़ में बह गई। 2,141 भवनों का नामों-निशान मिट गया। यात्रा मार्ग में फंसे 90 हजार यात्रियों को सेना ने और 30 हजार लोगों को पुलिस ने बाहर निकाला। आपदा में नौ नेशनल हाई-वे, 35 स्टेट हाई-वे और 2385 सड़कें 86 मोटर पुल, 172 बड़े और छोटे पुल बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए थे।

आपदा के बाद से लेकर अब तक इन छह सालों में धाम की तस्वीर बदलने की पूरी कोशिश की गई है। जिसका परिणाम ये है कि आज धाम में एक माह और सात दिन के भीतर यात्रा का आंकड़ा छह लाख पचास हजार पहुंच गया है।

नई दिल्ली। आज के छह साल पहले उत्तराखंड के केदारनाथ में आई प्राकृतिक आपदा ने करीब 5000 जानें ले ली थीं। आज इस आपदा को पूरे छह साल पूरे हो चुके हैं। इस प्रलयकारी आपदा को याद कर आज भी स्थानीय लोग सिहर उठते हैं। इस आपदा के बाद तत्कालीन केंद्र की कांग्रेस सरकार और राज्य सरकार ने युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य का अभियान चलाया था। इस आपदा के बाद हजारों लोगों के रोजगार और आशियाने छिन गए थे। केंद्र और राज्य सरकार के अथक प्रयास के बाद एक बार फिर केदारनाथ धाम की रौनक लौट आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के फिर से निर्माण और वहां चल रहे कामकाज में बहुत रुचि ली। इस वजह से भी वहां काम तेजी से हो सका। रामबाड़ा से नया पैदल मार्ग तैयार किया गया। जिससे धाम की दूरी दो किमी बढ़ गई। इसके अलावा एमआई 17 हेलीपैड का निर्माणए हेलीपैड से मंदिर तक रास्ते का निर्माण के साथ ही मंदिर के चारों ओर थ्री डी सुरक्षा दीवार का निर्माण किया गया। इस भीषण आपदा के अगले साल तो वहां कोई नहीं जा सका। दूसरे साल सांकेत‍िक रूप से यात्रा शुरू की गई। साल 2016 में केदारनाथ यात्रा पूरी तरह से शुरू हुई थी। आपदा के तीन साल बाद 2016 में केदारनाथ में कई ऐसे घर थे जो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त पड़े थे। केदारनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले हैं और त्रासदी की बरसी के दिन भी हजारों लोग दर्शन के लिए पहुंचे थे।

कुछ ऐसा था मंजर

16 जून 2013 का वो दिन जब इस त्रासदी ने हजारों लोगों को निगल लिया और सैकड़ों लोग लापता हो गए। वहीं भीषण बाढ़ में 11,091 से ज्यादा मवेशी बह गए। ग्रामीणों की 1,309 हेक्टेयर भूमि बाढ़ में बह गई। 2,141 भवनों का नामों-निशान मिट गया। यात्रा मार्ग में फंसे 90 हजार यात्रियों को सेना ने और 30 हजार लोगों को पुलिस ने बाहर निकाला। आपदा में नौ नेशनल हाई-वे, 35 स्टेट हाई-वे और 2385 सड़कें 86 मोटर पुल, 172 बड़े और छोटे पुल बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए थे। आपदा के बाद से लेकर अब तक इन छह सालों में धाम की तस्वीर बदलने की पूरी कोशिश की गई है। जिसका परिणाम ये है कि आज धाम में एक माह और सात दिन के भीतर यात्रा का आंकड़ा छह लाख पचास हजार पहुंच गया है।