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केरल: नागरिकता कानून पर विवादित पैरा पढ़ने से राज्‍यपाल ने किया इंकार,फिर डिस्क्लेमर के साथ पढ़ा

By बलराम सिंह 
Updated Date

Kerala Governor Refuses To Read Disputed Paragraph On Citizenship Law Then Read With Disclaimer

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून पर विपक्षी दलों का विरोध लगातार जारी है। बुधवार को केरल की विधानसभा में बजट सत्र के दौरान यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के विधायकों ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का घेराव किया। उन्होंने राज्यपाल वापस जाओ के नारे लगाते हुए पोस्टर भी दिखाए। इस दौरान राज्यपाल के साथ मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी थे। विधानसभा के मार्शलों ने बल प्रयोग कर विपक्षी सदस्यों को हटाकर राज्यपाल के लिए रास्ता बनाया और उन्हें उनकी सीट तक ले गए।

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राज्यपाल के आसन तक पहुंचते ही राष्ट्रगान बजाया गया लेकिन विपक्ष के सदस्य आसन के समीप एकत्रित हो गए और राष्ट्रगान पूरा होने के तुरंत बाद उन्होंने ‘राज्यपाल वापस जाओ’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। जब राज्यपाल ने संबोधन शुरू किया तो विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए विधानसभा से वाकआउट किया। इस दौरान मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने विधायकों को समझाते हुए वापस जाने की अपील भी की।

अपने अभिभाषण के दौरान राज्यपाल ने कहा कि मैं नागरिकता कानून के खिलाफ इस पैराग्राफ को पढ़ने जा रहा हूं क्योंकि मुख्यमंत्री ऐसा चाहते हैं। हालांकि, मेरा मानना है कि यह नीति या कार्यक्रम के तहत नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह सरकार का दृष्टिकोण है और उनकी इच्छा का सम्मान करने के लिए मैं इस पैरा को पढ़ने जा रहा हूं। राज्य सरकार के सीएए विरोधी रुख भरे संदर्भों को पढ़ते हुए राज्यपाल ने कहा, ‘हमारी नागरिकता धर्म के आधार पर नहीं हो सकती क्योंकि यह धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के खिलाफ है जो कि हमारे संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है।’

विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीथाला ने आरोप लगाया कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान सीएए वापल लेने के लिए पारित किए गए प्रस्ताव को लेकर केरल विधानसभा का उपहास कर रहे हैं। वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं। वे आरएसएस और भाजपा के हाथ की कठपुतली हैं। बता दें कि रमेश चेन्नीथाला ने पहले कहा था कि वे राज्यपाल को हटाने की मांग से जुड़ा प्रस्ताव केरल विधानसभा में पेश करेंगे।

कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथाला ने आरोप लगाया कि सीपीएम और राज्यपाल के बीच गुप्त समझौता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ जारी भ्रष्टाचार के एक मामले की सुनवाई इस सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में होनी है। वह इस मामले में केंद्र सरकार की मदद चाहते हैं।

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पिनराई विजयन की सरकार ने हाल ही में सीएए को रद्द करने की मांग वाले प्रस्ताव को राज्य विधानसभा से पारित किया है। साथ ही उनका कहना है कि केरल में यह कानून लागू नहीं होगा। प्रस्ताव को पेश करते हुए विजयन ने कहा था कि सीएए धर्मनिरपेक्ष नजरिए और देश के ताने बाने के खिलाफ है तथा इसमें नागरिकता देने में धर्म के आधार पर भेदभाव होगा।

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