KGMU में आग बनी मरीजों का ‘काल’, करोड़ों का फायर फाइटिंग सिस्टम दे गया जवाब

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर में शनिवार देर रात लगी भीषण आग मरीजों के लिये ‘काल’ बन गयी। इस भगदड़ और इलाज के अभाव में पांच मरीजों की मौत हो गयी। इस हादसे के बाद रविवार को सीएम योगी आदित्यनाथ केजीएमयू पहुंचे और हालात का जायजा लिया। सीएम ने इस दुःखद घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। घटना की जांच के बाद मंडलायुक्त लखनऊ को 3 दिनों में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में आग लगने से पूरे परिसर में भगदड़ का माहौल हो गया था। बता दें कि जिस वक़्त ये हादसा हुआ, उस दौरान ट्रॉमा सेंटर में करीब 300 मरीज भर्ती थे, इनमें से 37 वेंटिलेटर पर थे। आनन-फानन में मरीजों को निजी अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। इस हादसे में एक नवजात समेत पांच लोगों की इलाज न मिलने के कारण दूसरे अस्पतालों में ले जाते समय मौत हो गई।

ट्रॉमा-2 का संचालन होता तो ना होती दिक्कतें—

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बसपा सरकार में रायबरेली रोड पर ट्रॉमा-2 बनवाया था। आरोप है कि इसके निर्माण में कई खामियां थीं। लिहाजा पीजीआई ने इसके टेकओवर और संचालन से इनकार कर दिया। बाद में सपा सरकार में केजीएमयू के तत्कालीन कुलपति प्रो. रविकांत ने इसे चलाने का दावा किया, लेकिन तमाम दावों के बावजूद पूरी तरह इसका संचालन नहीं करवा पाए।

आग लगाने के बाद भी नहीं बाजा अलार्म—

ट्रॉमा सेंटर की दूसरी मंजिल पर इंसेफेलाइटिस ऐंड डिजास्टर वॉर्ड में आग लगी थी। इसी वॉर्ड के सामने दरवाजे पर अलार्म का पैनल लगा है, लेकिन आग लगने पर अलार्म नहीं बजा। इस कारण जब तक लोगों को पता चला, आग फॉल्स सीलिंग के भीतर फैल चुकी थी। फायर कर्मियों ने चेक किया तो पैनल ही खराब मिला। अगर अलार्म पैनल ठीक होता तो हल्के धुएं से ही शॉर्ट सर्किट की जानकारी हो जाती।

करोड़ों का फायर फाइटिंग सिस्टम फेल—

ट्रॉमा सेंटर में करोड़ों रुपये खर्च कर लगवाया गया फायर फाइटिंग सिस्टम भी दगा दे गया। आग लगने के बाद न तो अलॉर्म बजे और न ही एमसीबी से बिजली कट ऑफ हुई। फायर एक्सटिंग्यूशर भी बेकार साबित हुए और अप्रशिक्षित कर्मचारी आग बुझाने के बजाए सैकड़ों मरीजों की जान दांव पर लगाकर भाग निकले।