खाकी पर लगा दाग, मोबाइल हड़पने वाले चर्चित सिपाही को बचाने में लगे कोतवाल

खाकी पर लगा दाग, मोबाइल हड़पने वाले चर्चित सिपाही को बचाने में लगे कोतवाल
खाकी पर लगा दाग, मोबाइल हड़पने वाले चर्चित सिपाही को बचाने में लगे कोतवाल

बिजनौर। पुलिस के आला अधिकारी भले ही अपनी पुलिस को भ्रष्टाचार मुक्त होने का दम भरते हो लेकिन उनके दावो का नगीना थाने में तैनात एक चर्चित सिपाही हरेन्द्र मलिक ने भ्रष्टाचार का नया कारनामा कर पोल खोल दी है। चर्चित सिपाही ने बीती 20 दिसम्बर को सीएए और एनआरसी का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के बाद उनसे बरामद दर्जनों कीमती मोबाइल थाने में जमा न करके खुद हड़प लिए। कारनामा उजागर होने के बावजूद चर्चित सिपाही पर कार्रवाही न होने से पुलिस का इक़बाल लगातार गिर रहा है।

Khaki Par Laga Daag Mobile Hadapne Vale Charchit Sipahi Ko Bachane Me Lage Log :

पिछले काफी समय से नगीना पुलिस आरोपो के घेरे में घिरी हुई है और वह अपने पर लग रहे दाग को धोने के लिए काफी मशक्कत कर रही है लेकिन इस बार थाने में तैनात चर्चित सिपाही हरेन्द्र मलिक का नया कारनामा सामने आया है जिससे नगीना पुलिस के साथ साथ पूरे विभाग की और किरकिरी हो रही है।

बता दें कि बीती 20 दिसम्बर को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान बवाल करने वाले 79 युवकों को नगीना पुलिस ने पकड़ा था। आरोप है कि चर्चित सिपाही ने मौके से पकडे गए शादाब, अयाज, फय्याज सहित दर्जनों युवको से कीमती मोबाइल बरामद कर एक प्लास्टिक के कट्टे में भर लिए थे। सारे नियम कायदों को ताक पर रखकर कुछ मोबाइल बाद में थाने में जमा न करके चर्चित सिपाही हरेन्द्र मलिक ने हड़प लिए। जमानत हो जाने के बाद जब कई युवक थाने हरेंद्र मलिक के पास मोबाइल वापस लेने गए तो उन्हें हड़का कर भगा दिया जानकारी करने पर कीमती मोबाइल मालखाने में भी जमा नहीं मिले। चर्चित सिपाही की लूटमार का यह पहला मांमला नही है।

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के बाद नगीना में तनावपूर्ण स्थिति होने के बावजूद 23 दिसम्बर को नगर के एक मछली व्यापारी को जेल भेजने का डर दिखाकर इसी चर्चित सिपाही हरेंद्र मलिक ने दरोगा वसीम अख्तर के साथ मिलकर चार हज़ार रुपये ऐंठ लिए थे। इतना ही नही जब जेब गर्म होने के बावजूद भी इसका दिल नही भरा तो उसी रात इस चर्चित सिपाही ने मछली व्यापारी को फोन कर अधिकारियों के लिए फ्री में मछली की डिमांड की। जब मामला मीडिया तक पहुंचा तो अपनी पोल खुलती देख बीती 03 जनवरी को हरेंद्र मलिक व दरोगा ने व्यापारी को दो हज़ार वापस किए थे तथा दो हजार रुपए कुछ दिन में देने का वादा कर अपना पीछा छुड़ाया था लेकिन जैसे ही मांमला ठंडा हुआ तो व्यापारी के दो हजार रुपए आज तक नही लौटाए।

मजेदार बात यह है कि कोतवाल राजेश कुमार तिवारी ने मांमला उनके संज्ञान में होने के बावजूद आरोपी सिपाही व दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाही करना तो दूर उल्टा खुलकर आरोपियों का बचाव कर रहे है। कोतवाल राजेश कुमार तिवारी अपने चहीते दागी सिपाही को बचाने के लिए इतना आपा खो बैठे की उन्होंने हमारे संवाददाता शहजाद अंसारी को पुलिसिया रोब दिखाते हुए यह कह दिया कि अगर हिम्मत है तो इनके खिलाफ डकैती का मुकदमा दर्ज करा दो इन्हे पुलिस विभाग में रहने का कोई अधिकार नही है। चर्चित सिपाही हरेन्द्र मलिक द्वारा दर्जनों युवकों से कीमती मोबाइल हड़पने का मामला नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। उधर इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) संजय सिंह का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था आपके माध्यम से आया है जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। इस मामले में जो भी दोषी होगा उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

अब देखना यह है कि पुलिस के आला अधिकारी पुलिस का इकबाल बुलन्द करने के लिए इस मामले में आरोपी सिपाही व दरोगा पर क्या कार्यवाही करते हैं।

बिजनौर। पुलिस के आला अधिकारी भले ही अपनी पुलिस को भ्रष्टाचार मुक्त होने का दम भरते हो लेकिन उनके दावो का नगीना थाने में तैनात एक चर्चित सिपाही हरेन्द्र मलिक ने भ्रष्टाचार का नया कारनामा कर पोल खोल दी है। चर्चित सिपाही ने बीती 20 दिसम्बर को सीएए और एनआरसी का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के बाद उनसे बरामद दर्जनों कीमती मोबाइल थाने में जमा न करके खुद हड़प लिए। कारनामा उजागर होने के बावजूद चर्चित सिपाही पर कार्रवाही न होने से पुलिस का इक़बाल लगातार गिर रहा है। पिछले काफी समय से नगीना पुलिस आरोपो के घेरे में घिरी हुई है और वह अपने पर लग रहे दाग को धोने के लिए काफी मशक्कत कर रही है लेकिन इस बार थाने में तैनात चर्चित सिपाही हरेन्द्र मलिक का नया कारनामा सामने आया है जिससे नगीना पुलिस के साथ साथ पूरे विभाग की और किरकिरी हो रही है। बता दें कि बीती 20 दिसम्बर को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान बवाल करने वाले 79 युवकों को नगीना पुलिस ने पकड़ा था। आरोप है कि चर्चित सिपाही ने मौके से पकडे गए शादाब, अयाज, फय्याज सहित दर्जनों युवको से कीमती मोबाइल बरामद कर एक प्लास्टिक के कट्टे में भर लिए थे। सारे नियम कायदों को ताक पर रखकर कुछ मोबाइल बाद में थाने में जमा न करके चर्चित सिपाही हरेन्द्र मलिक ने हड़प लिए। जमानत हो जाने के बाद जब कई युवक थाने हरेंद्र मलिक के पास मोबाइल वापस लेने गए तो उन्हें हड़का कर भगा दिया जानकारी करने पर कीमती मोबाइल मालखाने में भी जमा नहीं मिले। चर्चित सिपाही की लूटमार का यह पहला मांमला नही है। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के बाद नगीना में तनावपूर्ण स्थिति होने के बावजूद 23 दिसम्बर को नगर के एक मछली व्यापारी को जेल भेजने का डर दिखाकर इसी चर्चित सिपाही हरेंद्र मलिक ने दरोगा वसीम अख्तर के साथ मिलकर चार हज़ार रुपये ऐंठ लिए थे। इतना ही नही जब जेब गर्म होने के बावजूद भी इसका दिल नही भरा तो उसी रात इस चर्चित सिपाही ने मछली व्यापारी को फोन कर अधिकारियों के लिए फ्री में मछली की डिमांड की। जब मामला मीडिया तक पहुंचा तो अपनी पोल खुलती देख बीती 03 जनवरी को हरेंद्र मलिक व दरोगा ने व्यापारी को दो हज़ार वापस किए थे तथा दो हजार रुपए कुछ दिन में देने का वादा कर अपना पीछा छुड़ाया था लेकिन जैसे ही मांमला ठंडा हुआ तो व्यापारी के दो हजार रुपए आज तक नही लौटाए। मजेदार बात यह है कि कोतवाल राजेश कुमार तिवारी ने मांमला उनके संज्ञान में होने के बावजूद आरोपी सिपाही व दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाही करना तो दूर उल्टा खुलकर आरोपियों का बचाव कर रहे है। कोतवाल राजेश कुमार तिवारी अपने चहीते दागी सिपाही को बचाने के लिए इतना आपा खो बैठे की उन्होंने हमारे संवाददाता शहजाद अंसारी को पुलिसिया रोब दिखाते हुए यह कह दिया कि अगर हिम्मत है तो इनके खिलाफ डकैती का मुकदमा दर्ज करा दो इन्हे पुलिस विभाग में रहने का कोई अधिकार नही है। चर्चित सिपाही हरेन्द्र मलिक द्वारा दर्जनों युवकों से कीमती मोबाइल हड़पने का मामला नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। उधर इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) संजय सिंह का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था आपके माध्यम से आया है जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। इस मामले में जो भी दोषी होगा उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अब देखना यह है कि पुलिस के आला अधिकारी पुलिस का इकबाल बुलन्द करने के लिए इस मामले में आरोपी सिपाही व दरोगा पर क्या कार्यवाही करते हैं।