विदेशी माल को अनुलोम-विलोम के जरिए स्वदेशी बनाते धरे गए योगगुरु रामदेव

Kimbho App
विदेशी माल को अनुलोम-विलोम के जरिए स्वदेशी बनाते धरे गए योगगुरु रामदेव

नई दिल्ली। देश के तमाम टीवी चैनलों पर प्रतिदिन घंटों के हिसाब से विज्ञापन करके देश की भोली भाली जनता के भीतर स्वदेशी और राष्ट्र के कल्याण की भावनायें जगाकर केवल पांच सालों में हजारों करोड़ का बिजनेस अंपायर खड़ा करके, स्वयं देश के सफलतम कारोबारी बनने की प्रशंसा पाने वाले योगगुरु बाबा रामदेव की चोरी आखिरकार पकड़ी गई है। जिस तरह से वह पतंजलि नामक अपनी कंपनी के उत्पादों के प्रचार में विदेशी कंपनियों को मुनाफा कमाने के लिए कोसते हैं वह किसी से छुपा नहीं है, लेकिन देश के आईटी सेक्टर में दस्तक देने की जल्दबाजी में बाबा जी एक इतनी बड़ी गलती कर बैठे जिसने उनकी बनी बनाई बाजार हिलती नजर आ रही है।

हुआ कुछ ऐसा कि बाबा जी ने सोशल मीडिया ऐप व्हाट्स ऐप (वही ऐप जिसे हम और आप मुफ्त में अपने स्मार्टफोन में सालों से यूज करते आ रहे हैं।) को चुनौती देने के लिए अपने स्वदेशी फार्मूले को लागू करने की कोशिश की। बाबा जी भूल गए कि आईटी सेक्टर में उतरना पंसारी की दुकान खोलने जैसा नहीं है। जहां कहीं से भी आटा और कहीं से दाल और तेल खरीदकर उसका अनुलोम विलोम कर दिया और अपनी कंपनी के ब्रांडेड पैकेट में पैकर राष्ट्रवादी उपभोक्ताओं की भीड़ के बीच रखकर 24 से 48 घंटों में मोटा मुनाफा कमा लिया जाए।

{ यह भी पढ़ें:- अटल पर योगी की आस्था को नगर विकास मंत्री ने लगाया बट्टा, घर पर बुलाई आधिकारिक मीटिंग }

अनुलोम विलोम महारथी बाबा जी आईटी सेक्टर में विदेशी माल को योग कराकर स्वदेशी बनाते धरे गए। जो अमेरिकी सोशल मीडिया ऐप बोलो नाम से पिछले दो सालों से यूजर्स को आकर्षित करने में असफल रहा, उसे भारतीय योगगुरू रामदेव ने अनुलोम विलोम के माध्यम से उसे रातों रात अपनी कंपनी का टैग लगाकर स्वदेशी बना दिया।

रातों रात अमेरिकी कंपनी के स्वामित्व वाले ‘बोलो ऐप’ को ‘किम्भो ऐप’ का नाम दे दिया गया। जब बोलो ऐप का नाम बदलकर किम्भो किया जा रहा था उस समय बाबा रामदेव की आईटी टीम एक बड़ी गलती कर गई। कई जगहों पर बाबा जी की टीम ने पुराने एप का नाम डला छोड़ दिया। जब बाबा जी के अनुयायी इस किम्भो ऐप को डाउनलोड करके इंस्टाल करने लगे तो पता चला कि ऐप का वास्तविक नाम बोलो है।

बाबा रामदेव के नए कारोबार को पहला झटका गूगल से लगा जिसने बोलो ऐप को नए नामकरण के साथ ही अपने प्लेस्टोर से ड्रॉप कर दिया। जिसके बाद से बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि पर विदेशी माल की स्वदेशी ब्रांडिंग करने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

{ यह भी पढ़ें:- .... जब चीनी दूतावास में भेड़ों का झुंड लेकर पहुंच गए थे अटल बिहारी }

आपको जानकर हैरानी होगी कि बाबा की जिस ब्रांड को हम पतंजलि के नाम से जानते हैं, वह एक छलावा है। बाबा की ब्रांड झूठी ब्रांडिंग पर टिकी है, जोकि पूर्व में फ्लॉप हो चुकी एक कंपनी का तैयार किया हुआ बिजनेस मॉडल था। उसी फ्लॉप ब्रांड को बाबा रामदेव ने पतंजलि के नाम से दुनिया के सामने पेश किया। टीम पर्दाफाश जल्द ही बाबा रामदेव के पूरे बिजनेस प्लान की कहानी आपके सामने रखेगी।

नई दिल्ली। देश के तमाम टीवी चैनलों पर प्रतिदिन घंटों के हिसाब से विज्ञापन करके देश की भोली भाली जनता के भीतर स्वदेशी और राष्ट्र के कल्याण की भावनायें जगाकर केवल पांच सालों में हजारों करोड़ का बिजनेस अंपायर खड़ा करके, स्वयं देश के सफलतम कारोबारी बनने की प्रशंसा पाने वाले योगगुरु बाबा रामदेव की चोरी आखिरकार पकड़ी गई है। जिस तरह से वह पतंजलि नामक अपनी कंपनी के उत्पादों के प्रचार में विदेशी कंपनियों को मुनाफा कमाने के लिए…
Loading...