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कभी मसालों के बादशाह महाशय धर्मपाल गुलाटी चलाते थे तांगा, सैलरी का 90 फीसदी हिस्सा करते थे दान

By आराधना शर्मा 
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नई दिल्ली: साल 2020 ने दुनिया से बहुत कुछ छीना कई दिग्गजों ने दुनिया को अलविदा कह दिया। दरअसल, आज सुबह 5 बजे मसलों के किंग कहे जाने वाले महाशय धर्मपाल गुलाटी का 98 साल की उम्र में निधन हो गया। आपको बता दें, आज यानी गुरुवार सुबह ही धर्मपाल गुलाटी जी का निधन दिल्ली के माता चंदन देवी हॉस्पिटल में हुआ है। उन्होंने आज सुबह 6 बजे आखिरी सांस ली।

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महाशय धर्मपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च 1923 में हुआ था और वह पाकिस्तान के सियालकोट में जन्मे थे। यहीं से उनके व्यवसाय की नीव पड़ी थी। उनकी कंपनी की शुरुआत शहर में एक छोटी सी दुकान से हुई थी, जिसे उनके पिता ने विभाजन से पहले खोला था। उसके बाद साल 1947 में जब देश का विभाजन हुआ तो उनका परिवार दिल्ली आ गया था।

दिल्ली आकर रोजगार की तलाश में धर्मपाल गुलाटी जी ने तांगा चलाना शुरू किया। काफी समय तक तांगा चलाने के बाद उन्होंने उसे अपने भाई को दे दिया और मसाले बेचना शुरू कर दिया। देखते ही देखते उनका मसाला लोगों को इतना पसंद आया कि देशभर में उनके मसालों की धूम मच गई।

सैलरी का 90 फीसदी हिस्सा दान

आपको यह जानने के बाद हैरानी होगी कि धर्मपाल गुलाटी एफएमसीजी सेक्टर के सबसे ज्यादा कमाई वाले सीईओ थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें साल 2018 में 25 करोड़ रुपये इन-हैंड सैलरी मिली थी। बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि महाशय धर्मपाल गुलाटी अपनी सैलरी का करीब 90 फीसदी हिस्सा दान करते थे। केवल इतना ही नहीं बल्कि वह 20 स्कूल और 1 हॉस्पिटल भी चलाते थे।

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महाशय धर्मपाल गुलाटी की पढ़ाई के बारे में बात करें तो उन्होंने केवल पांचवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की थी, लेकिन कारोबार के मामले में उन्होंने बड़े-बड़े दिग्गज लोगों को मात दी है। अपने व्यापार और उद्योग खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में बेहतर योगदान देने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित भी किया था।

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