दिल्ली पुलिस के समर्थन में उतरीं किरण बेदी, कहा,’सख्त फैसले हमेशा याद रहते हैं’

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दिल्ली पुलिस के समर्थन में उतरीं किरण बेदी, कहा,'सख्त फैसले हमेशा याद रहते हैं'

नई दिल्ली। पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी ने तीस हजारी अदालत में पुलिस-वकीलों की झड़प पर बुधवार को दिल्ली पुलिस को सलाह दी कि वह अपने रुख पर दृढ़ता से कायम रहे नतीजा चाहे जो हो। बेदी ने आगे लिखा कि मुश्किल वक्त चला जाता है लेकिन सख्त फैसलों की यादें हमेशा कायम रहती हैं। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को वकीलों के हमले को लेकर पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिसकर्मियों ने नारे लगाए गए थे- पुलिस कमिश्नर कैसा हो, ‘किरण बेदी जैसा हो।

Kiran Bedi Who Came Out In Support Of Delhi Police Said Strict Decisions Are Always Remembered :

पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुड्डुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी ने इस मामले पर दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को नसीहत देते हुए कहा कि जब पुलिसकर्मी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी करते हैं तो अधिकारियों द्वारा उन्हें संरक्षण मिलना चाहिए। पटनायक मंगलवार को प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों के सामने तो आए लेकिन वह उनके साथ नहीं दिखे।
किरण बेदी ने बुधवार को ट्वीट करते हुए कहा, ‘लीडरशिप (नेतृत्व) एक ’चरित्र’ है जो जिम्मेदारी लेता है और कठोर निर्णय लेता है। यह करने का ही जीवन है। कठिन समय चला जाता है लेकिन कठिन समय में की गई कार्रवाईयों की स्मृतियां हमेशा यादों में रह जाती हैं।’

बेदी ने कराया था लाठीचार्ज
बता दें कि किरण बेदी को लेकर नारे लगाए जाने पर 31 साल पहले पहले के एक घटनाक्रम की यादें ताजा हो गईं। किरण बेदी डीसीपी थीं, दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच जमकर बवाल मचा था। तमाम अदालतों को बंद करा दिया गया था।
यह घटना 17 फरवरी 1988 की है। इस दिन डीसीपी किरण बेदी के दफ्तर में वकील पहुंचे हुए थे। इस बीच किसी बात पर बहस हो गई जो झड़प में बदल गई, इस दौरान बेकाबू भीड़ के कारण हालात ऐसे हो गए कि किरण बेदी को लाठीचार्ज कराना पड़ा। इस असर यह हुआ कि वकीलों ने दिल्ली की सभी अदालतों को बंद करा दिया।

नई दिल्ली। पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी ने तीस हजारी अदालत में पुलिस-वकीलों की झड़प पर बुधवार को दिल्ली पुलिस को सलाह दी कि वह अपने रुख पर दृढ़ता से कायम रहे नतीजा चाहे जो हो। बेदी ने आगे लिखा कि मुश्किल वक्त चला जाता है लेकिन सख्त फैसलों की यादें हमेशा कायम रहती हैं। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को वकीलों के हमले को लेकर पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिसकर्मियों ने नारे लगाए गए थे- पुलिस कमिश्नर कैसा हो, 'किरण बेदी जैसा हो। https://twitter.com/thekiranbedi/status/1191891632066461696 पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुड्डुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी ने इस मामले पर दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को नसीहत देते हुए कहा कि जब पुलिसकर्मी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी करते हैं तो अधिकारियों द्वारा उन्हें संरक्षण मिलना चाहिए। पटनायक मंगलवार को प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों के सामने तो आए लेकिन वह उनके साथ नहीं दिखे। किरण बेदी ने बुधवार को ट्वीट करते हुए कहा, 'लीडरशिप (नेतृत्व) एक ’चरित्र’ है जो जिम्मेदारी लेता है और कठोर निर्णय लेता है। यह करने का ही जीवन है। कठिन समय चला जाता है लेकिन कठिन समय में की गई कार्रवाईयों की स्मृतियां हमेशा यादों में रह जाती हैं।' बेदी ने कराया था लाठीचार्ज बता दें कि किरण बेदी को लेकर नारे लगाए जाने पर 31 साल पहले पहले के एक घटनाक्रम की यादें ताजा हो गईं। किरण बेदी डीसीपी थीं, दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच जमकर बवाल मचा था। तमाम अदालतों को बंद करा दिया गया था। यह घटना 17 फरवरी 1988 की है। इस दिन डीसीपी किरण बेदी के दफ्तर में वकील पहुंचे हुए थे। इस बीच किसी बात पर बहस हो गई जो झड़प में बदल गई, इस दौरान बेकाबू भीड़ के कारण हालात ऐसे हो गए कि किरण बेदी को लाठीचार्ज कराना पड़ा। इस असर यह हुआ कि वकीलों ने दिल्ली की सभी अदालतों को बंद करा दिया।