कूवगम है किन्नरों का तीर्थ, जहां देवता से होती है एक रात की शादी

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कूवगम है किन्नरों का तीर्थ, जहां देवता से होती है उनकी एक रात की शादी

Know About Koovagam A Pilgrimage For Transgenders Where Married To Their God For A Night

किन्नर यानी हिजड़े हमारे समाज का ऐसा हिस्सा हैं जिनके बारे में लोग बात करना तक पसंद नहीं करते। किन्नरों से जुड़े कई ऐसे रोचक तथ्य हैं जिनके बारे में आप शायद ही जानते होंगे। आज हम आपको किन्नरों के ​तीर्थ के बारे मे बताने जा रहे हैं। किन्नरों का यह तीर्थ दक्षिण भारत में स्थित है जहां देश और दुनिया भर के किन्नर और शोधकर्ता पहुंचते हैं।

किन्नरों का यह तीर्थ तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले के उल्मदुपेटाई तालुका के कूवगम गांव में स्थि​त है। जिसे कुथन्दवार मंदिर कहा जाता है। इस मंदिर के देवता अरावन को किन्नर अपना आराध्य मानते हैं। हर साल दुनिया भर के किन्नर तमिल नववर्ष की प्रथम पूर्णिमा के दिन कुथन्दवार मंदिर पहुंचकर उनकी पूजा अर्चना शुरू करते हैं। यह क्रम 15 दिनों तक किसी पारंपरिक उत्सव के रूप चलता है। उत्सव शुरू होने के बाद किन्नर हर रात पूरी तरह से श्रृंगार करके अपने अरावन की पूजा करने के लिए मंदिर पहुंचते हैं। किन्नरों की टोलियां मंदिर में और मंदिर के बाहर जमकर नाच गाना करते हैं। इस उत्सव के 14वें दिन सभी अपने देवता किन्नर अरावन से शादी करते हैं और अगले दिन उन्हें विधवा कर दिया जाता है।

क्या है अरावन और किन्नरों की शादी की मान्यता 

बताया जाता है कि कूवगम का यह मंदिर महाभारत काल का प्रतीक है। अरावन को अर्जुन का पुत्र बताया जाता है जिसने युद्ध में पांडवों की विजय के लिए भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर स्वेच्छा से मां काली के चरणों में अपनी बलि दी थी। अपनी बली देने से पहले अरावन ने श्री कृष्ण के समक्ष शर्त रखी थी कि वह शादी करना चाहता है। एक मान्यता के मुताबिक अरावन से शादी करने के लिए भगवान कृष्ण ने स्वयं मोहनी रूप धारण किया था और एक रात के लिए अरावन की दुलहन बने थे।

इसी मान्यता के आधार पर किन्नर इस आयोजन के 14वें दिन एक पारंपरिक तरीके से अरावन से एक रात के लिए विवाह करते हैं। अरावन के नाम का मंगलसूत्र धारण करते हैं, दुलहन की तरह श्रृंगार करते हैं, मांग में सिन्दूर भरते हैं। रात भर चलने वाले इस आयोजन में अरावन की दुलहन बनने वाले किन्नर जमकर गाने गाते हैं। अगले दिन सुबह अरावन की एक प्रतीकात्मक मूर्ति को कूवगम में घुमाया जाता है और उसके बाद नष्ट कर दिया जाता है। अरावन की मूर्ति को नष्ट करने के साथ ही किन्नरों के मंगलसूत्र को मंदिर के पु​जारी अपने हसिये से काट देते हैं तो चूडिंयों को नारियल से तोड़ दिया जाता है। उनकी मांग के सिंदूर को पोछ दिया जाता है। जिसके बाद किन्नरों की टोलियां अपने पति के मृत्यु के लिए मातम मनाती हैं। इस आयोजन के साथ ही कूवगम के समारोह को समाप्त कर दिया जाता है।

15 दिनों के लिए किन्नरों की राजधानी बन जाता है कूवगम 

कूवगम में होने वाले किन्नरों के इस समारोह को मनोरंजक बनाने के लिए कई अलग अलग तरह के आयोजन किए जाते हैं। जिनमें सबसे अहम माना जाता है मिस कूवगम के खिताब के लिए होने वाली प्रतियोगिता। बताया जाता है कि देवता अरावन की दुलहन बनने के लिए कूवगम पहुंचने वाले किन्नरों के लिए एक ब्यूटी पेजेंट प्रतियोगिता का आयोजन होता है। यह ​दुनिया में होने वाला एकमात्र ट्रांसजेंडर ब्यूटी पेजेंट कंपटीशन है।

मिस कूवगम का खिताब जीतने वाले किन्नर को बेहद ​इज्जत भरी नजर से देखा जाता है। किन्नर इस खिताब को जीतने के लिए वैसे ही प्रयास करते हैं जैसे मॉडलिंग की दुनिया में प्रवेश करने के लिए महिलाएं और पुरुष मिस वर्ल्ड और मिस्टर वर्ल्ड जैसे तमाम कंपटीशन में देखने को मिलते हैं। हालांकि इस प्रतियोगिता को अभी तक पहचान मिलना बाकी है। इस कंपटीशन को पहचान दिलाने के लिए आयोजकों ने कुछ वर्षों से कंपटीशन के फाइनल के लिए मुख्य अतिथि के रूप में फिल्मी हस्तियों को बुलाना शुरू किया है।

किन्नरों के आयोजन देखने के लिए कूवगम में दूर दराज के इलाकों से आते हैं लोग

15 दिनों तक कूवगम में चलने वाले किन्नरों के अलग अलग आयोजनों को देखने के लिए लोग दूर दराज के ​इलाकों से यहां पहुंचते हैं। मेले में शामिल होने वाले किन्नरों और आम लोगों के बीच किसी प्रकार का विवाद न हो इसके लिए इलाके में पुलिस और सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध किए जाते हैं। स्थानीय प्रशासन इस आयोजन को लेकर विशेष तैयारी करता है। किन्नर कूवगम की सड़कों पर रात भर मौजूद रहते हैं। कई बार शराब के नशे में किन्नरों और स्थानीय लोगों के बीच झड़पें भी हो जाती हैं। वहीं इन दिनों रात में देह व्यापार में संलिप्त किन्नरों के देर रात तक सड़क पर घूमने से आपराधिक घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इन दिनों में कूवगम में रात दिन पुलिस की पैट्रोलिंग होती है।

होटल मालिकों के लिए कमाई का जरिया 

कुथन्दवार मंदिर पर हर साल 15 दिनों तक चलने वाले किन्नरों के आयोजन ने कूवगम गांव को एक नई पहचान दी है। ट्रांसजेंडर्स के लिए काम करने वाले कई सामाजिक संगठन इस समारोह को ध्यान में रखकर कूवगम पहुंचते हैं। हर साल आने वाले किन्नरों को रुकने के लिए स्थानीय लोगों ने होटलों का निर्माण करवाया है। जो मुख्य रूप से समारोह के दौरान खचाखच भरे रहते हैं। करीब 20 दिनों तक इलाके के होटलों में बाहरी लोगों को ठहरने के लिए जगह नहीं मिलती। होटल के लोगों का भी मानना है कि किन्नरों की वजह से उन्हें सबसे ज्यादा फायदा इस आयोजन के दौरान ही होता है। जहां किन्नर खुले दिल से पैसा उड़ाते हैं।

किन्नरों की दुनिया को करीब से समझने के लिए पहुंचते हैं मनोचिकित्सक 

कुवगम में होने वाले इस वार्षिक समारोह में पहुंचने वाले लोगों में किन्नरों के अलावा ऐसे लोग भी शामिल होते हैं जो किन्नरों की मनोदशा और उनकी जीवनशैली के बारे में जानना चाहते हैं। ऐसे शोधकर्ता कुवगम में पहुंचते हैं जो किन्नरों की जिन्दगी पर शोध कर रहे हैं। ऐसे लोगों को अपने विषय पर जरूरत के हिसाब से विषय और उनके साथ समय बिताने का पर्याप्त समय मिल जाता है।

किन्नर यानी हिजड़े हमारे समाज का ऐसा हिस्सा हैं जिनके बारे में लोग बात करना तक पसंद नहीं करते। किन्नरों से जुड़े कई ऐसे रोचक तथ्य हैं जिनके बारे में आप शायद ही जानते होंगे। आज हम आपको किन्नरों के ​तीर्थ के बारे मे बताने जा रहे हैं। किन्नरों का यह तीर्थ दक्षिण भारत में स्थित है जहां देश और दुनिया भर के किन्नर और शोधकर्ता पहुंचते हैं। किन्नरों का यह तीर्थ तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले के उल्मदुपेटाई तालुका के…