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इन महिलाओं ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर तोड़ दी 800 साल पुरानी परंपरा

Know About Those Two Women Bindu Kanakdurga Who Went To Sabarimala

By रवि तिवारी 
Updated Date

सबरीमाला। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पहली बार दो महिलाएं आखिरकार सबरीमाला मंदिर में गर्भगृह तक पहुंचीं। बिंदु और कनकदुर्गा नाम की इन महिला भक्तों ने सुबह 3:45 बजे मंदिर में जाकर दर्शन किया। सुप्रीम कोर्ट से सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिलने के लगभग तीन महीने बाद पहली बार महिलाओं ने सबरीमाला में भगवान अयप्पा के दर्शन किए। मंदिर के 800 साल के इतिहास में पहली बार दो महिलाओं ने यहां प्रवेश कर भगवान अयप्पा की पूजा की है।

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पुलिस ने दोनों महिलाओं को अपनी सुरक्षा में गुप्त तौर पर कहीं रखा है। जानते हैं कि ये दोनों महिलाएं हैं कौन, जिन्होंने पूरे देश में एक सनसनी फैला दी है। इनके नाम बिंदू अमिनी और कनक दुर्गा हैं। दोनों वर्किंग महिलाएं हैं। दोनों विवाहित हैं।दोनों के बच्चे हैं। दोनों को अब लगातार धमकियां मिल रही हैं।

कौन है ये दोनों महिलाए

पेशे से वकील बिंदु और सामाजिक कार्यकर्त्ता कनकदुर्गा ने बताया कि उन्होंने पुरुषों के कपड़ों में मंदिर में प्रवेश करके दर्शन किया। दोनों के मुताबिक इस दौरान दर्जन भर पुलिस कर्मी भी सिविल ड्रेस में उनके साथ मौजूद रहे। महिलाओं के दर्शन के बाद मंदिर के शुद्धिकरण करने की खबरें हैं। बताया जा रहा है कि मंदिर शुद्धिकरण प्रक्रिया के लिए कुछ देर बंद रहा और अब इसे वापस दर्शन-पूजन के लिए खोल दिया गया है।

बिंदू कॉलेज में लेक्चरर और भाकपा (माले) कार्यकर्ता हैं। वह कोझिकोड जिले के कोयिलैंडी की रहने वाली है। कनकदुर्गा मलप्पुरम के अंगदीपुरम में एक नागरिक आपूर्ति कर्मी हैं। वे दोनों 24 दिसंबर को सबरीमला आई थीं। इससे पहले चेन्नई के एक संगठन ने 11 महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया था और अयप्पा मंत्रोच्चारण कर रहे श्रद्धालुओं ने उन्हें वहां से लौटा दिया था।

800 साल से चली आ रही प्रथा

28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में हर उम्र की महिला को प्रवेश देने की इजाजत दी थी। इस फैसले के खिलाफ केरल के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। हालांकि, अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया। इससे पहले यहां 10 से 50 साल उम्र की महिला के प्रवेश पर रोक थी। यह प्रथा 800 साल पुरानी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरे राज्यभर में विरोध हुआ।

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