जानिए कैसे हुआ 11,300 करोड़ का PNB घोटाला

PNB घोटाला, बैंक घोटालेबाज, गैरजमानती वारंट
बैंक घोटालेबाज हीरा कारोबारी मामा-भांजे के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी

Know How Pnb Scam Became Possible

नई दिल्ली। लोकतंत्र में कहने को तो सारी ताकत जनता के हाथों में होती है, इसके बावजूद हर कदम पर जनता ही ठगी का शिकार होती है। उसे हर कदम पर छला जाता है। ऐसा ही एक मामला इन दिनों सुर्खियों में हैं। जहां जनता की गाढ़ी कमाई से जमा हुए 11,300 करोड़ रुपए एक षड्यंत्र के तहत तीन चार अरबपति कारोबारियों पर न्यौछावर कर दिए गए। यह आंकड़ा केवल एक अनुमान है, जिसके और व्यापक होने की पूरी संभावना है।

यह रकम इतनी बड़ी है जिसके बारे में आम आदमी सोच तक नहीं सकता, लेकिन तीन चार अरबपति कारोबारी इतनी बड़ी रकम को डकार गए और सरकार तक इस बात की खबर पहुंचते पहुंचते चार से पांच साल लग गए। चमत्कार की बात यह है कि जनता के पैसे से मौज करने वाले ठग इतने बड़े कारोबारी कहलाए कि उनकी चमक देश ही नहीं दुनिया भर के देशों तक फैल गई। फिलहाल ये ठग कारोबारी भूमिगत हैं और इनके ठिकानों पर ईडी और सीबीआई जैसी केन्द्रीय एजेंसियां छापेमारी कर रहीं हैं।

चलिए आपको बताते हैं कि कैसे इन कारोबारियों में पीएनबी (पंजाब नेशनल बैंक) के जरिए देश की विभिन्न बैंकों को 11,300 करोड़ की चपत लगाई—

1: पीएनबी बैंक की एक शाखा के मैनेजर ने इन कारोबारियों का घोटाले में सहयोग किया।
2: बैंक मैनेजर ने इन कारोबारियों को LOU (लेटर आॅफ अंडरस्टैंडिंग) प्रदान किया। एलओयू एक गारंटी होती है, जिसमें बैंक एलओयू धारक के अक्षम होने की दशा में उसकी देनदारियों को भुगतान करने की उत्तरदायी होती है।
3: घोटाला करने वाले कारोबारियों ने बैंकों के एलओयू के आधार पर विदेश में संचालित भारतीय बैंकों की शाखाओं से करीब 11,300 करोड़ रूपए के लोन हासिल किए।
4: बैंक के अधिकारियों ने इन एलओयू को आधिकारिक रूप से बैंक के दस्तावेजों में नहीं दर्शाया था। एक तरह से ये डीओयू निजी स्तर पर बैंक की ओर से जारी किए गए थे।
5: बैंक को केवल 280 करोड़ के एलओयू जारी होने की जानकारी थी। जिसकी शिकायत बैंक के अधिकारियों की ओर से प्रवर्तन निदेशालय को की गई थी।
6: बैंक के अधिकारियों की सांठगांठ से लिए गए अलग अलग बैंकों के कर्ज को कारोबारियों ने न तो वापस लौटाया और न ही उस कर्ज के एवज में ब्याज को चुकाया।
7: आज यह मामला देश के सबसे बड़े बैंक घोटाले के रूप में सामने आया है। जोकि भविष्य में कई गुना बड़ा हो सकता है।
8: अंदेशा जताया जा रहा है कि एलओयू के आधार पर देश की अन्य बैंकों में भी इस तरह के घोटालों को अंजाम दिया गया होगा। जिसे लेकर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

आपको जानकर हैरानी होगी कि अगर आप 5 से 10 लाख तक की बैंक गारंटी लेने की कोशिश करेंगे तो आपको देश और दुनिया की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ेंगी, अपनी संपत्तियों की कीमत साबित करनी होगी, उनके असली दस्तावेज बैंक में बंधक रखने होंगे, अपना चरित्र प्रमाण पत्र देना होगा और न जाने क्या—क्या? इसके बाद भी बैंक आपको गारंटी देने से बचेगी और देगी भी तो आपकी संपत्तियों के विरुद्ध कुल कीमत से काफी कम रकम की गारंटी प्रदान की जाएगी।

नई दिल्ली। लोकतंत्र में कहने को तो सारी ताकत जनता के हाथों में होती है, इसके बावजूद हर कदम पर जनता ही ठगी का शिकार होती है। उसे हर कदम पर छला जाता है। ऐसा ही एक मामला इन दिनों सुर्खियों में हैं। जहां जनता की गाढ़ी कमाई से जमा हुए 11,300 करोड़ रुपए एक षड्यंत्र के तहत तीन चार अरबपति कारोबारियों पर न्यौछावर कर दिए गए। यह आंकड़ा केवल एक अनुमान है, जिसके और व्यापक होने की पूरी संभावना…