जानिए कैसे इस 3डी डिवाइस से बर्फबारी के दौरान बिजली बनाई जा सकेगी

snowfall
जानिए कैसे इस 3डी डिवाइस से बर्फबारी के दौरान बिजली बनाई जा सकेगी

नई दिल्ली। सर्दी के मौसम में अक्सर बर्फबारी के आसार रहते हैं वहीं इसके साथ अनेकों परेशानियों के भी आसार रहते है, लेकिन लॉस एंजिलिस स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधार्थियों ने ऐसी 3डी डिवाइस बनाने का दावा किया है, जिससे बर्फबारी के दौरान बिजली का उत्पादन हो सकेगा। डिवाइस सिलिकॉन की शीट से बनी है। जो तरीका ईजाद किया गया है, उसमें इलेक्ट्रान के आदान-प्रदान से बिजली बनाई जा सकेगी।

Know How This 3d Device Will Be Able To Generate Electricity During Snowfall :

दरअसल, सर्दी के मौसम में पृथ्वी का लगभग 30% हिस्सा बर्फ से ढका रहता है। इस दौरान रोजमर्रा के काम भी मुश्किल हो जाते हैं। ऐसे में यह  आविष्कार लोगों के लिए एक सौगात की होगा। भारी बर्फबारी में बिजली जाने की समस्या से भी निजात पाई जा सकेगी।

वहीं, यूनिवर्सिटी के शोधार्थी रिचर्ड कनेर ने जर्नल नेनो एनर्जी में लिखा है कि डिवाइस रिमोट एरिया में भी काम करने में सक्षम है। इसे चलाने के लिए बैट्री की जरूरत नहीं होती। सिलिकॉन की वजह से इसमें खुद की शक्ति होती है। यह डिवाइस छोटी और पतली है। इसका आकार प्लास्टिक की शीट जैसा है। इसे आसानी से अपने साथ कही भी ले जाया सकेगा।

साथ ही कनेर का कहना है कि,‘ये एक स्मार्ट डिवाइस है। मौसम केंद्र की तरह यह बता सकती है कि बर्फ कितनी गिर रही है और उसकी दिशा क्या है? इसके अलावा हवा की रफ्तार को मापने में सक्षम होगी। इसे ट्राइबोइलेक्ट्रिक नेनोजेनरेटर का नाम दिया गया है।’

यही नहीं वैज्ञानिक का मानना है कि इसमें इलेक्ट्रान के आदान-प्रदान से स्थिर बिजली बनाई जा सकेगी। स्थिर बिजली तब बनती है,जब दो ऐसी चीजें एक दूसरे के संपर्क में आती हैं, जिसमें से एक में इलेक्ट्रान ग्रहण करने की और दूसरे में देने की क्षमता हो।

एक स्टडी के दौरान माना गया कि बर्फ में पॉजिटिव एनर्जी होती है। इसमें इलेक्ट्रान देने की क्षमता होती है। जबकि सिलिकॉन में नेगेटिव एनर्जी होती है। जब आसमान से गिरती बर्फ सिलिकॉन की सतह के संपर्क में आती है, तब इलेक्ट्रान के आदान-प्रदान से ऊर्जा पैदा होती है। डिवाइस इस ऊर्जा को बिजली में तब्दील कर देती है।

सूत्रों के मुताबिक इस डिवाइस को बनाने के लिए शुरुआती चरण में एल्युमिनियम और टेफलान की शीटों का सहारा लिया गया था, लेकिन वैज्ञानिकों ने महसूस किया कि इनकी अपेक्षा सिलिकॉन में ऊर्जा उत्पादन की क्षमता कहीं ज्यादा है।

इस पर वैज्ञानिकों का कहना है कि बर्फ के जमाव से सूरज की रोशनी कम हो जाती है। ऐसे में सोलर पैनल भी बेकार हो जाते हैं। 3डी डिवाइस का इस्तेमाल सोलर पैनल में भी किया जा सकता है। इसके जरिए लगातार बिजली मिल सकती है।

बता दें, डिवाइस से विंटर स्पोर्ट्स की निगरानी के साथ एथलीट के परफार्मेंस में सुधार किया जा सकता है। इसके जरिए सिगनल भी भेजे जा सकते हैं। इससे पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति विशेष किस अवस्था में है।

नई दिल्ली। सर्दी के मौसम में अक्सर बर्फबारी के आसार रहते हैं वहीं इसके साथ अनेकों परेशानियों के भी आसार रहते है, लेकिन लॉस एंजिलिस स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधार्थियों ने ऐसी 3डी डिवाइस बनाने का दावा किया है, जिससे बर्फबारी के दौरान बिजली का उत्पादन हो सकेगा। डिवाइस सिलिकॉन की शीट से बनी है। जो तरीका ईजाद किया गया है, उसमें इलेक्ट्रान के आदान-प्रदान से बिजली बनाई जा सकेगी। दरअसल, सर्दी के मौसम में पृथ्वी का लगभग 30% हिस्सा बर्फ से ढका रहता है। इस दौरान रोजमर्रा के काम भी मुश्किल हो जाते हैं। ऐसे में यह  आविष्कार लोगों के लिए एक सौगात की होगा। भारी बर्फबारी में बिजली जाने की समस्या से भी निजात पाई जा सकेगी। वहीं, यूनिवर्सिटी के शोधार्थी रिचर्ड कनेर ने जर्नल नेनो एनर्जी में लिखा है कि डिवाइस रिमोट एरिया में भी काम करने में सक्षम है। इसे चलाने के लिए बैट्री की जरूरत नहीं होती। सिलिकॉन की वजह से इसमें खुद की शक्ति होती है। यह डिवाइस छोटी और पतली है। इसका आकार प्लास्टिक की शीट जैसा है। इसे आसानी से अपने साथ कही भी ले जाया सकेगा। साथ ही कनेर का कहना है कि,‘ये एक स्मार्ट डिवाइस है। मौसम केंद्र की तरह यह बता सकती है कि बर्फ कितनी गिर रही है और उसकी दिशा क्या है? इसके अलावा हवा की रफ्तार को मापने में सक्षम होगी। इसे ट्राइबोइलेक्ट्रिक नेनोजेनरेटर का नाम दिया गया है।’ यही नहीं वैज्ञानिक का मानना है कि इसमें इलेक्ट्रान के आदान-प्रदान से स्थिर बिजली बनाई जा सकेगी। स्थिर बिजली तब बनती है,जब दो ऐसी चीजें एक दूसरे के संपर्क में आती हैं, जिसमें से एक में इलेक्ट्रान ग्रहण करने की और दूसरे में देने की क्षमता हो। एक स्टडी के दौरान माना गया कि बर्फ में पॉजिटिव एनर्जी होती है। इसमें इलेक्ट्रान देने की क्षमता होती है। जबकि सिलिकॉन में नेगेटिव एनर्जी होती है। जब आसमान से गिरती बर्फ सिलिकॉन की सतह के संपर्क में आती है, तब इलेक्ट्रान के आदान-प्रदान से ऊर्जा पैदा होती है। डिवाइस इस ऊर्जा को बिजली में तब्दील कर देती है। सूत्रों के मुताबिक इस डिवाइस को बनाने के लिए शुरुआती चरण में एल्युमिनियम और टेफलान की शीटों का सहारा लिया गया था, लेकिन वैज्ञानिकों ने महसूस किया कि इनकी अपेक्षा सिलिकॉन में ऊर्जा उत्पादन की क्षमता कहीं ज्यादा है। इस पर वैज्ञानिकों का कहना है कि बर्फ के जमाव से सूरज की रोशनी कम हो जाती है। ऐसे में सोलर पैनल भी बेकार हो जाते हैं। 3डी डिवाइस का इस्तेमाल सोलर पैनल में भी किया जा सकता है। इसके जरिए लगातार बिजली मिल सकती है। बता दें, डिवाइस से विंटर स्पोर्ट्स की निगरानी के साथ एथलीट के परफार्मेंस में सुधार किया जा सकता है। इसके जरिए सिगनल भी भेजे जा सकते हैं। इससे पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति विशेष किस अवस्था में है।