बढ़ते कर्ज से हैं परेशान तो करें ये उपाय

karj-se

भारतीय संस्कृति में कर्ज लेना बेहद गलत माना गया है। हमारे यहां पुरानी कहावत है कि अपने पैर उतने फैलाओं जितनी लंबी चादर हो। लेकिन आजकल चादर छोटी हो चली है और पैर लंबे, जिस वजह से कभी नौकरी में परेशानी आने पर या फिर बीमारी के चलते, हमारी आर्थिक दशा कब दुर्दशा में बदल जाती है पता ही नहीं चलता।

ऐसा नहीं है कि हमारे पूर्वज कर्ज नहीं लेते थे, लेकिन उस समय कर्ज बहुत सोच समझ कर और ऐसे कामों के लिए लिया जाता था, जिन्हें करना बेहद आवश्यक हो और आर्थिक प्रबंध समय से न हो पाए हों। लेकिन आज कल लोन लेना एक स्टेटस सिंबल बन चुका है, जो कई बार हमारे जीवन का सुख चैन छीन लेता है।

{ यह भी पढ़ें:- राशि के अनुसार धारण करें धातु, सभी समस्याओं का होगा अंत }

अगर आपके जीवन में भी कर्ज एक खुशी के रूप में आया था और आज समस्या बन गया है तो आपको कुछ आसान से उपाय करके अपनी समस्या से छुटकारा मिल सकता है।

कर्जे से छुटकारा पाने के उपाय:

{ यह भी पढ़ें:- अमीर बनना है तो ऐसी महिलाओं पर ना डालें बुरी नज़र }

जल्द से जल्द कर्ज से छुटकारा पाने के लिए प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें। ऐसा करने से धीरे-धीरे कर्ज में कमी आने लगती है। हनुमानजी हर संकट का निवारण कर सकते हैं। इसलिए हनुमानजी के चरणों में मंगलवार व शनिवार के दिन तेल-सिंदूर चढ़ाएं और माथे पर सिंदूर का तिलक लगाएं। हनुमान चालीसा या बजरंगबाण का पाठ करें।

सरसों का तेल मिट्टी के दिए में भरकर, फिर मिट्टी के दीए का ढक्कन लगाकर किसी नदी या तालाब के किनारे शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय जमीन में गाड़ देने से कर्ज मुक्त हो सकते हैं। कर्ज से मुक्ति पाने के लिए श्रीगणेश की पूजा करना शुरू कर दें। प्रतिदिन गणेश जी को दूर्वा और मोदक का भोग लगाएं।

श्रीगणेश का अथर्वशीर्ष का पाठ प्रति बुधवार करें। पांच गुलाब के खिले हुए फूलों को गायत्री मंत्र पढ़ते हुए डेढ़ मीटर सफ़ेद कपड़े में बांध दीजिये और इसे नदी में प्रवाहित कर दीजिए। जल्दी ही आपको कर्ज से मुक्ति मिलेगी।

{ यह भी पढ़ें:- इस वास्तु के उपाय से 6 महीने में आपके हाथ में होगी नौकरी }

भारतीय संस्कृति में कर्ज लेना बेहद गलत माना गया है। हमारे यहां पुरानी कहावत है कि अपने पैर उतने फैलाओं जितनी लंबी चादर हो। लेकिन आजकल चादर छोटी हो चली है और पैर लंबे, जिस वजह से कभी नौकरी में परेशानी आने पर या फिर बीमारी के चलते, हमारी आर्थिक दशा कब दुर्दशा में बदल जाती है पता ही नहीं चलता। ऐसा नहीं है कि हमारे पूर्वज कर्ज नहीं लेते थे, लेकिन उस समय कर्ज बहुत सोच समझ कर और…
Loading...